ईरान-अमेरिका युद्धविराम में पाकिस्तान की मध्यस्थता का जश्न मनाना चाहिए, ये क्या बोल गए शशि थरूर
ईरान-अमेरिका युद्धविराम में पाकिस्तान ने अहम भूमिका निभाते हुए मध्यस्थता की है। इस पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि भारत को पाकिस्तान की मध्यस्थता का जश्न मनाना चाहिए, क्योंकि हम भी शांति ही चाहते हैं।

सवा महीने से चल रहा ईरान-अमेरिका युद्ध पाकिस्तान की मध्यस्थता की वजह से दो हफ्ते के लिए रुक गया है। 10 सू्त्रीय योजना के तहत ईरान व अमेरिका युद्धविराम पर सहमत हो गए हैं। इस युद्ध को रोकने में पाकिस्तान ने अहम भूमिका निभाई है और लगातार बैठकें करके खतरनाक हो रहे युद्ध को भले कुछ समय के लिए ही, लेकिन रोक दिया है। इस मध्यस्थता पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि भारत को पाकिस्तान की मध्यस्थता का जश्न मनाना चाहिए, क्योंकि हम भी शांति ही चाहते हैं।
एनडीटीवी से बात करते हुए शशि थरूर से पूछा गया कि क्या युद्धविराम में पाकिस्तान की मध्यस्थता करने की वजह से भारत को चिंतित होने की जरूरत है? इस पर उन्होंने जवाब दिया, ''मुझे ऐसी कोई वजह नहीं नजर आ रही है। सच कहूं तो हर चीज एक के लिए फायदेमंद और दूसरे के लिए नुकसान वाली नहीं होती है। अगर भारत में आतंकी भेजने के लिए पाकिस्तान की तारीफ की गई होती तो यह एक के लिए फायदा व दूसरे के लिए नुकसान वाली बात होती, लेकिन अब जब पाकिस्तान शांति के लिए काम कर रहा है तो मुझे लगता है कि इसका जश्न मनाया जाना चाहिए। शांति हो, यही हम लोग भी चाहते थे।''
थरूर ने युद्धविराम पर आए भारत के रुख की भी तारीफ की। उन्होंने कहा, ''वास्तव में, भारत सरकार के बयान में शांति का स्वागत किया गया है, और मुझे लगता है कि यह सही, समझदारी भरा और उचित कदम है। क्योंकि हमें इन घटनाक्रमों से निपटने के लिए रणनीतिक संयम, क्षेत्रीय जिम्मेदारी की भावना और नए सिरे से प्रतिबद्धता का मेल अपनाना होगा। साथ ही, ग्लोबल साउथ की आवाज के तौर पर अपनी भूमिका को भी नहीं भूलना चाहिए।''
पाकिस्तान की मध्यस्थता पर कांग्रेस ने कसा था तंज
वहीं, कांग्रेस ने पाकिस्तान की मध्यस्थता की भूमिका को लेकर प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधा था और तंज कसते सवाल किया कि पापा ने वार रुकवा दी का क्या हुआ। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह दावा भी किया कि मोदी सरकार विश्व मंच पर पाकिस्तान को अलग-थलग करने और आतंकवाद के प्रति उसके समर्थन को उजागर करने में नाकाम रही। रमेश ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, ''भारत के प्रधानमंत्री, जो अमेरिका, इज़राइल, ईरान और खाड़ी देशों के साथ बहुत विशेष मित्रता का दावा करते हैं और जिनके पास इस वर्ष ब्रिक्स+ की अध्यक्षता भी है, युद्धविराम वार्ता के दौरान तस्वीर में क्यों नहीं हैं? युद्धविराम की बात के दौरान भारत कैसे और क्यों निर्णायक नहीं रहा?''
भारत ने सीजफायर का किया है स्वागत
विदेश मंत्रालय ने अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए सीजफायर पर एक बयान जारी किया। MEA ने कहा कि उसे उम्मीद है कि इस समझौते से पश्चिम एशिया में स्थायी शांति आएगी। बयान में कहा, "हम हुए सीजफायर का स्वागत करते हैं और उम्मीद करते हैं कि इससे पश्चिम एशिया में स्थायी शांति आएगी। जैसा कि हमने पहले भी लगातार कहा है, चल रहे संघर्ष को जल्द से जल्द खत्म करने के लिए तनाव कम करना, बातचीत और कूटनीति जरूरी हैं। इस संघर्ष से लोगों को पहले ही बहुत ज्यादा तकलीफ हुई है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार नेटवर्क में रुकावट आई है। हमें उम्मीद है कि होर्मुज के रास्ते बिना किसी रुकावट के जहाजों की आवाजाही और वैश्विक व्यापार का प्रवाह जारी रहेगा।"




साइन इन