आपने अब तक क्या किया? जस्टिस स्वामीनाथन के खिलाफ टिप्पणी करने वालों पर SC सख्त, नोटिस जारी
जनहित याचिका में आरोप लगाया गया कि जस्टिस स्वामीनाथन के खिलाफ जाति और धर्म आधारित अपमानजनक टिप्पणियां सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ने और कानून व्यवस्था और सांप्रदायिक अशांति भड़काने के इरादे से की गईं थीं।

सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के जज जस्टिस जीआर स्वामीनाथन के खिलाफ कथित रूप से जाति और धर्म आधारित आपत्तिजनक टिप्पणियां करने वालों के खिलाफ सख्त रुख दिखाते हुए राज्य सरकार से पूछा है कि अभी तक इस मामले में क्या कार्रवाई की गई है। शीर्ष अदालत ने बुधवार (28 जनवरी) को एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए इस मामले पर तमिलनाडु सरकार से जवाब तलब किया है। इस PIL में उन प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है, जिन्होंने कथित तौर पर जस्टिस जीआर स्वामीनाथन के खिलाफ कार्तिगई दीपम मामले में उनके आदेश के बाद अपमानजनक टिप्पणियां की थीं।
जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने तमिलनाडु राज्य से इस मामले में उठाए गए कदमों का पता लगाने के लिए एक स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। स्टैंडिंग काउंसिल, एडवोकेट सबरिश सुब्रमण्यम ने तमिलनाडु सरकार की ओर से नोटिस स्वीकार किया। पीठ ने इस मामले में राज्य सरकार, पुलिस महानिदेशक, चेन्नई के पुलिस आयुक्त समेत अन्य संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया। अदालत ने सरकार को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 2 फरवरी को तय की है।
याचिका किसने दायर की और क्या मांग?
यह याचिका अधिवक्ता जी. एस. मणि द्वारा दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि डीएमके समर्थित दलों, कुछ वामपंथी संगठनों, व्यक्तियों और वकीलों ने सार्वजनिक स्थलों के साथ-साथ मद्रास हाईकोर्ट के परिसरों (चेन्नई और मदुरै) में भी अवैध प्रदर्शन किए और जस्टिस स्वामीनाथन के खिलाफ अत्यंत आपत्तिजनक और अवमाननापूर्ण टिप्पणियां कीं। याचिका में कहा गया है कि ये टिप्पणियां जाति और धर्म के आधार पर की गईं, जिनका उद्देश्य सामाजिक सौहार्द बिगाड़ना और कानून-व्यवस्था व सांप्रदायिक तनाव पैदा करना था। याचिका में तमिलनाडु सरकार और पुलिस अधिकारियों को ऐसे कृत्यों के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही सहित कड़ी कानूनी कार्रवाई शुरू करने का निर्देश देने की मांग की गई है।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह विवाद जस्टिस स्वामीनाथन के 1 दिसंबर 2025 के आदेश से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने मदुरै के थिरुप्परनकुंड्रम पहाड़ी पर स्थित ‘दीपथून’ (पत्थर का दीप स्तंभ) पर कार्तिगई दीपम जलाने की अनुमति दी थी। यह स्थान एक दरगाह के समीप स्थित है। अपने आदेश में न्यायाधीश ने स्पष्ट किया था कि दीप जलाने से दरगाह की संरचना को कोई नुकसान नहीं होगा क्योंकि दोनों स्थानों के बीच कम से कम 50 मीटर की दूरी है। जब आदेश का पालन नहीं हुआ, तो 3 दिसंबर को जस्टिस स्वामीनाथन ने एक और आदेश पारित कर श्रद्धालुओं को स्वयं दीप जलाने की अनुमति दी और सीआईएसएफ को सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके बाद तमिलनाडु सरकार ने इस मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।




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