एग्जाम से पहले बौद्ध बन गया? चीफ जस्टिस की बेंच ने NEET के लिए धर्मांतरण पर लगाई क्लास
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि सीधे खारिज। आप अल्पसंख्यकों के अधिकार छीनना चाहते हैं। आप देश के सबसे अमीर जगहों में से एक से हैं। आपको अपनी काबिलियत पर गर्व होना चाहिए। यह एक और तरह का धोखा है। हमें और टिप्पणी करने के लिए मजबूर न करें।

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को हरियाणा के एक परिवार के इस दावे पर सवाल उठाया कि उन्होंने अल्पसंख्यक आरक्षण का लाभ लेने के लिए परीक्षाओं से ठीक पहले बौद्ध धर्म अपना लिया था और हरियाणा सरकार से अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र जारी करने के बारे में स्पष्टीकरण मांगा। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने इस कोशिश की कड़ी आलोचना की और परिवार की मंशा पर संदेह जताया। सीजेआई ने इसे एक नए तरीके का फ्रॉड बताया।
न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार, यह मामला हरियाणा के हिसार के एक जाट परिवार के कृष्ण पुनिया के बच्चों नितिन पूनिया और एकता पूनिया द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है, जो जन्म से सामान्य श्रेणी में आते हैं। उनकी याचिका के अनुसार, याचिकाकर्ताओं को उत्तर प्रदेश के सुभारती मेडिकल कॉलेज, सुभारती यूनिवर्सिटी में बौद्ध अल्पसंख्यक कोटे के तहत एडमिशन के लिए चुना गया था, लेकिन वे NEET-PG कोर्स में सफलतापूर्वक दाखिला नहीं ले पाए।
याचिकाकर्ताओं ने हिसार के सब-डिविजनल ऑफिसर (सिविल) द्वारा जारी बौद्ध अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र प्राप्त किए थे, जिससे उन्हें कॉलेज में एडमिशन मिल गया। हालांकि, उत्तर प्रदेश सरकार ने 2016 की एक अधिसूचना के माध्यम से, अल्पसंख्यक दर्जा का दावा करने वाले संस्थानों के लिए यह ज़रूरी कर दिया है कि उन्हें राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग से मान्यता प्राप्त होने के बावजूद, उत्तर प्रदेश राज्य से भी मान्यता प्राप्त करनी होगी। उत्तर प्रदेश राज्य ने ऐसी मान्यता देने से इनकार कर दिया था, हालांकि संबंधित अथॉरिटी ने एडमिशन दे दिया था। मामले की सुनवाई करते हुए, बेंच ने कड़ी मौखिक टिप्पणियां कीं और परिवार के इस काम को एक तरह का धोखा बताया।
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, "सीधे खारिज। आप अल्पसंख्यकों के अधिकार छीनना चाहते हैं। आप देश के सबसे अमीर जगहों में से एक से हैं। आपको अपनी काबिलियत पर गर्व होना चाहिए। यह एक और तरह का धोखा है। हमें और टिप्पणी करने के लिए मजबूर न करें।'' जस्टिस बागची ने यह भी टिप्पणी की कि परीक्षा से पहले बौद्ध बन गए? कोर्ट ने जिला प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए पूछा, “हिसार के सब-डिविजनल ऑफिसर ने ऐसे सर्टिफिकेट कैसे जारी किए?”
कोर्ट ने पाया कि उम्मीदवारों ने आवेदन करते समय खुद को जनरल कैटेगरी का बताया था और पुष्टि की थी कि वे जन्म से जनरल कैटेगरी के हैं। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, "आगे की पूछताछ में, और उम्मीदवारों के वकील से पता चलने पर, यह साफ है कि उम्मीदवार जनरल कैटेगरी के उम्मीदवारों के तौर पर पेश हुए क्योंकि वे जन्म से जनरल कैटेगरी के हैं।" बेंच ने आगे कहा कि सर्टिफिकेट तब जारी किए गए जब उम्मीदवार NEET 2025 की परीक्षा दे रहे थे, भले ही वे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) से संबंधित नहीं थे। कोर्ट ने पूछा, "वे EWS से संबंधित नहीं हैं। उन्हें अल्पसंख्यक समुदाय से संबंधित उम्मीदवार के रूप में कैसे माना गया?" जवाबदेही तय करने के लिए, कोर्ट ने हरियाणा के मुख्य सचिव को राज्य में अल्पसंख्यक सर्टिफिकेट जारी करने के दिशानिर्देशों पर एक स्टेटस-रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।




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