'बहन ने 5 मिनट में जो हासिल कर लिया, मैं 20 साल में नहीं कर पाया'; राहुल गांधी ने ऐसा क्या बताया
राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने अपनी बहन को 5 मिनट में वह हासिल करते देखा, जो वह अपने 20 साल के राजनीतिक करियर में नहीं कर पाए, गृह मंत्री अमित शाह को मुस्कुराने पर मजबूर करना। इस टिप्पणी पर सदन में हंसी का माहौल बन गया।

लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने महिलाओं की भूमिका की जमकर सराहना की। शुक्रवार को उन्होंने कहा कि इस सदन में मौजूद हर व्यक्ति ने अपने जीवन में महिलाओं से बहुत कुछ सीखा है। उन्होंने खास तौर पर अपनी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा की तारीफ करते हुए एक दिलचस्प टिप्पणी की। राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने अपनी बहन को 5 मिनट में वह हासिल करते देखा, जो वह अपने 20 साल के राजनीतिक करियर में नहीं कर पाए, गृह मंत्री अमित शाह को मुस्कुराने पर मजबूर करना। इस टिप्पणी पर सदन में हंसी का माहौल बन गया, हालांकि उस समय प्रियंका और अमित शाह दोनों मौजूद नहीं थे।
राहुल गांधी जिस मुस्कान का जिक्र कर रहे थे, वह उस समय आई जब प्रियंका गांधी ने हल्के-फुल्के अंदाज में अमित शाह पर तंज कसा था। दरअसल, प्रियंका गांधी ने चर्चा के दौरान कहा था कि अगर प्राचीन राजनीतिक विचारक चाणक्य आज जीवित होते, तो बीजेपी और अमित शाह की राजनीतिक रणनीतियों को देखकर हैरान रह जाते। उन्होंने मुस्कुराते हुए यह भी कहा कि गृह मंत्री हंस रहे हैं और उनकी पूरी योजना तैयार है। इस टिप्पणी पर सदन में ठहाके गूंज उठे।
संसद में हुई जोरदार बहस
राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें अपनी बहन पर एक बड़े भाई के तौर पर गर्व महसूस हुआ और वह उनसे यह हुनर सीखना चाहते हैं। उन्होंने अपनी दादी और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का जिक्र करते हुए डर पर काबू पाने की एक कहानी भी साझा की। बता दें कि लोकसभा में यह चर्चा उन तीन विधेयकों को लेकर हो रही थी, जिनमें सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 तक करने और महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण देने का प्रस्ताव है।
कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी इस कदम के जरिए राजनीतिक लाभ के लिए परिसीमन करना चाहती है। वहीं, अमित शाह ने स्पष्ट किया कि सीटों की संख्या बढ़ने से किसी राज्य के साथ भेदभाव नहीं होगा और दक्षिणी राज्यों को भी 50 प्रतिशत तक सीटों में बढ़ोतरी दी जाएगी, जिससे उनकी वर्तमान हिस्सेदारी बरकरार रहेगी। हालांकि कांग्रेस का कहना है कि विधेयकों में इस तरह की कोई स्पष्ट गारंटी नहीं दी गई है।




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