यह एक बहुत ही जबरदस्त जीत, महिला आरक्षण बिल पास न होने पर बोले शशि थरूर; परिसीमन से जोड़ा
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि यह एक बहुत ही जबरदस्त जीत रही है। संवैधानिक संशोधन (महिला आरक्षण बिल) को पास करने के लिए भाजपा को जितने दो-तिहाई वोटों की जरूरत थी, उससे 52 वोट कम रह गए। हमें जीत का एक खास एहसास हो रहा है।

महिला आरक्षण में संशोधन विधेयक शुक्रवार को लोकसभा में पारित नहीं हो सका। विपक्षी दलों के विरोध से पक्ष में सिर्फ 298 वोट ही मिल सके। विपक्ष ने महिला आरक्षण बिल को परिसीमन से जोड़ने पर आपत्ति जताई, जिसके चलते इसे पास नहीं होने दिया। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इसे बहुत ही बड़ी और जबरदस्त जीत बताया है। साथ ही कहा है कि अगर महिला आरक्षण को परिसीमन से अलग कर देंगे तो हम महिला आरक्षण के पक्ष में वोट देंगे।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा, "यह एक बहुत ही जबरदस्त जीत रही है। संवैधानिक संशोधन को पास करने के लिए भाजपा को जितने दो-तिहाई वोटों की जरूरत थी, उससे 52 वोट कम रह गए। हमें जीत का एक खास एहसास हो रहा है। यह वोट महिलाओं के आरक्षण के खिलाफ नहीं है, बल्कि परिसीमन और उस गड़बड़ी के खिलाफ है जो परिसीमन और संसद के अचानक विस्तार से हमारे लोकतंत्र को नुकसान पहुंचा सकती है, इसलिए हमने अपने लोकतंत्र को बचाने के लिए वोट दिया।"
उन्होंने आगे कहा, "हमने अपनी स्पीच में भी कहा है कि अगर आप महिलाओं के आरक्षण को परिसीमन से अलग कर देंगे, तो हम उसके पक्ष में वोट देंगे। उनके इसे अलग करने से इनकार करने के खिलाफ ही हमने वोट दिया है।" इससे पहले, थरूर ने महिला आरक्षण अधिनियम में संशोधन के लिए सरकार द्वारा संसद में लाए गए विधेयकों पर उसे आड़े हाथ लेते हुए आरोप लगाया कि परिसीमन (डिलिमिटेशन) की कवायद 'राजनीतिक नोटबंदी (डिमोनेटाइजेशन)' साबित होगी। थरूर ने शुक्रवार को लोकसभा में महिला आरक्षण अधिनियम से संबंधित 'संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026', 'परिसीमन विधेयक, 2026' और 'संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026' पर चर्चा में भाग लिया था।
उन्होंने कहा महिलाओं के आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना भारतीय महिलाओं की आकांक्षाओं को ''देश के इतिहास की सबसे विवादास्पद और जटिल प्रशासनिक कवायदों में से एक'' में बंधक बनाकर रखना है। उन्होंने कहा, ''प्रधानमंत्री कहते हैं कि वह नारी शक्ति के लिए न्याय का उपहार लाए हैं लेकिन उन्होंने इसे कंटीले तारों में लपेट दिया है, महिला आरक्षण को लागू करने को संसद सत्र के विस्तार से, 2011 की जनगणना के आंकड़ों के इस्तेमाल से और परिसीमन की प्रक्रिया से जोड़ दिया है।''
राहुल गांधी ने क्या कहा?
वहीं, विधायिका में महिलाओं के आरक्षण से जुड़ा 131वां सविधान संशोधन विधेयक शुक्रवार को लोकसभा में पारित नहीं होने के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण के पूरी तरह से पक्ष में है लेकिन सरकार इस विधेयक के माध्यम से देश का निर्वाचक ढांचा बदलना चाहती थी इसलिए इसका विरोध किया गया। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि उनकी पार्टी और पूरा विपक्ष विधायिका में महिलाओं को आरक्षण दिए जाने के पक्ष में है । उन्होंने कहा " मैं प्रधानमंत्री जी से कहना चाहता हूं कि वह 2023 के महिला आरक्षण विधेयक को आज लागू करने के लिए लाएं तो विपक्ष उनका पूरा साथ देगा।"




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