प्रधानमंत्री संसद से भाग गए, अंदर नहीं आ पाएंगे अब, देख लेना; राहुल गांधी ने साधा निशाना
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि अमेरिका के साथ हाल ही में हुए समझौते ने देश को कमजोर स्थिति में डाल दिया है। उन्होंने दावा किया कि यह डील प्रधानमंत्री की मजबूरी या ब्लैकमेल का नतीजा है।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पश्चिम एशिया में चल रहे संकट पर केंद्र सरकार की चुप्पी और संसद में चर्चा न होने पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्रीय संघर्ष से भारत की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान होने वाला है। राहुल गांधी ने चेतावनी दी कि यह संकट एक बड़े पैराडाइम शिफ्ट की ओर इशारा कर रहा है, जिससे देश को आर्थिक रूप से गहरा झटका लगेगा। उन्होंने हालिया स्टॉक मार्केट में आई गिरावट का उदाहरण देते हुए कहा कि बाजार पहले ही इस प्रभाव को महसूस कर चुका है। राहुल ने सवाल उठाया कि क्या पश्चिम एशिया का मुद्दा इतना महत्वहीन है कि इस पर चर्चा नहीं हो सकती? उन्होंने जोर देकर कहा कि ईंधन की कीमतें बढ़ना और आर्थिक तबाही जैसे जनता से जुड़े मुद्दे संसद में प्राथमिकता से उठाए जाने चाहिए।
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि अमेरिका के साथ हाल ही में हुए समझौते ने देश को कमजोर स्थिति में डाल दिया है। उन्होंने दावा किया कि यह डील प्रधानमंत्री की मजबूरी या ब्लैकमेल का नतीजा है, जिससे भारत के हितों पर समझौता हुआ है। कांग्रेस सासंद ने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर चर्चा से बच रही है क्योंकि बहस छिड़ने पर पीएम की कमजोर स्थिति और समझौते के पीछे की वजहें सामने आ जाएंगी। उन्होंने इसे सार्वजनिक महत्व का मामला बताते हुए मांग की कि पहले इस पर चर्चा हो, उसके बाद अन्य मुद्दों पर बात की जा सकती है। विपक्ष के अनुसार, सरकार जानबूझकर इन संवेदनशील विषयों से दूर भाग रही है।
पीएम मोदी पर संसद से भागने का आरोप
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री पर संसद से भागने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी अब संसद में नहीं आ पाएंगे। इससे पहले, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पश्चिम एशिया संकट के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने सोमवार को लोकसभा में कहा कि उस क्षेत्र में रहने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा व अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना भारत सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। अमेरिका और इजरायल ने बीते 28 फरवरी को ईरान पर बड़ा सैन्य हमला किया था, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई मारे गए थे। अधिकारियों के अनुसार, युद्ध में अब तक ईरान में कम से कम 1,230 लोग, लेबनान में 397 और इज़राइल में 11 लोग मारे गए हैं।
विदेश मंत्री ने संसद में क्या कहा
संसद के दोनों सदनों में पश्चिम एशिया संघर्ष पर दिए अपने वक्तव्य में जयशंकर ने कहा कि भारत सरकार पश्चिम एशियाई क्षेत्र के सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता बनाए रखने के पक्ष में है। उन्होंने एक ईरानी जहाज को भारतीय बंदरगाह पर खड़ा करने की इजाजत देने को मानवीय आधार पर लिया गया सही निर्णय बताया। उन्होंने कहा कि भारत सरकार इस क्षेत्र के हालात पर नजर रख रही है और संघर्ष क्षेत्र में फंसे 67,000 भारतीय नागरिकों को पहले ही वापस लाया जा चुका है। भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा व व्यापार जैसे राष्ट्रीय हित सरकार के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता हैं। भारत शांति के पक्ष में है और बातचीत व कूटनीति का मार्ग अपनाने का आग्रह करता है। हम तनाव कम करने, संयम बरतने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की पैरोकारी करते हैं।




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