ईरानी जहाज के भारत में लंगर डालने पर बोले जयशंकर, कहा- तेहरान ने 3 के लिए मांगी थी इजाजत
विदेश मंत्री एस जय़शंकर ने सोमवार को कोच्चि में लंगर डाले ईरानी जहाज को लेकर संसद में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि 28 फरवरी को ईरान ने तीन जहाजों को डॉक करवाने की इजाजत मांगी थी, भारत ने 1 मार्च को इसकी इजाजत दे दी थी।

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को लेकर विदेश मंत्री जयशंकर ने सोमवार को संसद में भारत सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने सभी पक्षों से तनाव कम करने और संयम बरतने की अपील की। इसके साथ ही जोर दिया कि सरकार का मुख्य ध्यान इस क्षेत्र में रहने वाले लगभग 1 करोड़ भारतीयों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार को निर्बाध बनाए रखने पर है। इसके साथ ही जयशंकर ने पिछले दिनों हिंद महासागर में डुबोए गए आईआरआईएस डेना को लेकर भी भारत की स्थिति साफ की।
संसद में विपक्ष के हंगामे के बीच विदेश मंत्री ने उन तीन ईरानी युद्धपोतों का भी जिक्र किया जो पिछले महीने भारत द्वारा आयोजित इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू और बहुराष्ट्रीय अभ्यास के कारण क्षेत्रीय जलक्षेत्र में थे। उन्होंने कहा, “ईरान ने 28 फरवरी को अपने तीन जहाजों को हमारे बंदरगाहों पर आने की अनुमति मांगी थी। हमने 1 मार्च को इसकी अनुमति दे दी थी। इनमें से एक जहाज IRIS Lavan 4 मार्च को कोच्चि में आकर रुका और उसके क्रू मेंबर फिलहाल भारतीय नौसेना की सुविधाओं में है।” जयशंकर ने कहा कि यह मानवीय आधार पर लिया गया सही फैसला था और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इसके लिए धन्यवाद भी दिया।
ईरान के डुबोए गए जहाज की बात करते हुए जयशंकर ने कहा, "दूसरा जहाज IRIS Dena 4 मार्च को अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा टॉरपीडो से डुबो दिया गया, जबकि तीसरे जहाज IRIS Booshehr को श्रीलंका ने शरण दी और उसके 208 सदस्यों के दल को नौसैनिक शिविर में रखा।"
आपको बता दें, 4 मार्च तड़के अमेरिकी नौसेना की एक पनडुब्बी ने अंतर्राष्ट्रीय जलक्षेत्र में खड़े ईरानी जहाज को डुबो दिया था। इसमें काफी ईरानी नौसैनिकों की मौत हो गई थी। इमरजेंसी कॉल पर मदद के लिए पहुंची श्रीलंकाई नौसेना को वहां पर कुछ नाविक तैरते हुए मिले, जिसे उन्होंने बचा लिया। श्रीलंकाई मीडिया के मुताबिक इन नौसैनिकों को फिलहाल श्रीलंका में ही रखा गया है।
भारतीय ऊर्जा आपूर्ति और भारतीयों की सुरक्षा पर ध्यान: जयशंकर
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बताया कि सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि सरकार की सबसे बड़ी चिंता यह है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह से बंद हो गया है। इस रास्ते से भारत 50 फीसदी ऊर्जा आयात करता है। इस युद्ध के कारण तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर पहुंच गई हैं, जो कि रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पहली बार हुआ है। गौरतलब है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का 85 फीसदी तेल आयात करता है, जिसकी वजह से यह एक बड़ा सवाल है।
विदेश मंत्री ने बताया कि सरकार की दूसरी बड़ी चिंता इन देशों में फंसे भारतीय लोग हैं। इस क्षेत्र में कुल 1 करोड़ भारतीय रहते हैं, इनमें से 80 फीसदी सऊदी और संयुक्त अरब अमीरात में रहते हैं, जिनके ऊपर फिलहाल ईरान लगातार हमला कर रहा है। उन्होंने बताया कि अभी तक 67 हजार नागरिकों को वहां से निकाल लिया गया है। उन्होंने बताया कि भारत ईरान समेत सभी देशों के साथ लगातार संपर्क में है। इन सभी देशों ने वहां पर मौजूद भारतीयों की सुरक्षा करने का आश्वासन दिया है। आने वाले समय में भी इन सभी से उच्च स्तरीय संपर्क जारी रहेगा।




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