Raghav Chadha News Kejriwal Rajya Sabha MP dispute with Aam Aadmi Party complete story in 5 points कभी केजरीवाल की आंखों के तारे रहे राघव चड्ढा कैसे हो गए दूर, 5 प्वाइंट्स में समझें मोहभंग की पूरी कहानी, India News in Hindi - Hindustan
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कभी केजरीवाल की आंखों के तारे रहे राघव चड्ढा कैसे हो गए दूर, 5 प्वाइंट्स में समझें मोहभंग की पूरी कहानी

Raghav Chada News: आम आदमी पार्टी और सांसद राघव चड्ढा के बीच में घमासान मचा हुआ है। पार्टी ने राघव को राज्यसभा के उप नेता के पद से हटा दिया है। इसके बाद राघव ने बयान जारी करके चुप कराए जाने का आरोप लगाया। अभी दोनों पक्षों के बीच में बयानबाजी जारी है।

Sat, 4 April 2026 12:31 AMUpendra Thapak लाइव हिन्दुस्तान
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कभी केजरीवाल की आंखों के तारे रहे राघव चड्ढा कैसे हो गए दूर, 5 प्वाइंट्स में समझें मोहभंग की पूरी कहानी

Raghav Chadha: आम आदमी पार्टी के नेताओं के बीच में घमासान मचा हुआ है। राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से हटाए जाने के बाद सांसद राघव चड्ढा के बयान ने अटकलों के रूप में चल रहे पार्टी के अंदरूनी विवाद को सार्वजनिक कर दिया। राघव के वीडियो वाले बयान पर पलटवार करते हुए कई आप नेताओं ने तीखे आरोप लगाए। पंजाब के मुख्यमंत्री से लेकर आतिशी और सौरभ भारद्वाज तक सभी ने राघव के ऊपर पार्टी लाइन से हटकर बोलने और प्रधानमंत्री से डरने के आरोप लगाए। भले ही, आम आदमी पार्टी द्वारा राघव को उपनेता के पद से हटाए जाने के बाद यह विवाद सामने आया है, लेकिन राजनीतिक गलियों में काफी पहले से सुर्खियां चल रही थी कि स्वाती मालीवाल के बाद राघव चड्ढा भी 'टीम केजरीवाल' से दूरी बना चुके हैं।

कभी आम आदमी पार्टी के नेताओं की नई पीढ़ी का चेहरा माने जाने वाले राघव चड्ढा आज अपनी ही पार्टी के नेताओं के निशाना पर हैं। आइए समझते हैं कि आखिर तीन साल पहले अपनी शादी में पंजाब के धन बल के उपयोग का आरोप झेलने वाले राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी के बीच में ऐसा क्या हुआ कि दोनों आमने-सामने आ खड़े हुए हैं।

पांच प्वाइंट्स में समझिए राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी के बीच का विवाद…

  1. आम आदमी पार्टी के युवा नेता राघव चड्ढा ने शुरुआत से ही अपनी पहचान एक युवा और नेक्स्ट जेनरेशन आइकॉन के रूप में बनाई। पार्टी नेतृ्त्व ने उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें राज्यसभा भी भेज दिया। मई 2023 में जब उन्होंने बॉलीवुड अभिनेत्री परिणीति चोपड़ा से शादी की, तो आम आदमी पार्टी का पूरा नेतृत्व उन्हें बधाई देने के लिए पहुंचा। यहां तक की इस हाई प्रोफाइल शादी के लिए राघव पर पंजाब के धन बल का गैर जरूरी उपयोग करने के भी आरोप लगे। हालांकि, इसके बाद भी चीजें बिगड़ने लगी। लगातार पार्टी लाइन में रहकर मीडिया के बीच में दिखने वाले राघव धीरे-धीरे लाइम लाइट से पीछे होने लगे। रही सही कसर अगस्त में राज्यसभा समिति नामांकन में नाम आने के बाद उन्हें सदन से सस्पेंड कर दिया गया। इसके बाद वह मीडिया से लगभग गायब हो गए।

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2. मीडिया से दूर राघव चड्ढा पार्टी के कामों से भी दूर नजर आने लगे। लेकिन मार्च 2024 में शराब घोटाले के मामले में केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद चीजें पूरी तरह से बदल गईं। आम आदमी पार्टी के हर नेता ने इस कार्रवाई के लिए केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। दिल्ली की गद्दी पर आतिशी बैठीं और उन्होंने प्रदेश को संभालने की कोशिश की, लेकिन राघव कहीं नजर नहीं आए। पार्टी के युवा नेता होने के नाते उनसे उम्मीद थी कि वह फ्रंटलाइन पर आकर मोर्चा संभालेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। यहीं से पार्टी के कार्यक्रमों में उनके कम दिखने की धारणा बनने लगी और मतभेद की चर्चाओं का बाजार भी गर्म होने लगा।

3. लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान आम आदमी पार्टी के प्रमुख नेता अरविंद केजरीवाल शराब घोटाले के आरोप में जेल में थे। ऐसे में पार्टी के नेतृत्व के ऊपर दबाव था। एक कट्टर ईमानदार वाली छवि वाला नेता जेल में था। ऐसे में पार्टी के बाकी नेताओं को इसका बचाव करने के लिए भारी मेहनत की जरूरत थी। इस चुनाव के दौरान भी सांसद राघव चड्ढा की भूमिका सीमित ही नजर आई। राघव के मुकाबले आतिशी, सौरभ भारद्वाज और संजय सिंह जैसे नेता ज्यादा नजर आए। अरविंद केजरीवाल को भी कोर्ट ने राहत देते हुए चुनाव प्रचार के लिए जमानत दे दी, लेकिन पार्टी का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा।

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इस चुनाव के बाद से ही पार्टी नेतृत्व और अन्य जगहों पर राघव चड्ढा की भूमिका को लेकर सवाल उठाए जाने लगे। हालांकि, किसी भी आप नेता ने खुलकर उनके बारे में कुछ नहीं बोला। केजरीवार और मनीष सिसोदिया को शराब घोटाले के केस में जब राहत मिली, तो पूरी पार्टी ने इसे जीत की तरह मनाया, लेकिन राघव नजर नहीं आए।

4. दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान केजरीवाल जेल से बाहर आ चुके थे। पार्टी को अपना गढ़ बचाने के लिए पूरी ताकत के साथ मैदान में आने की जरूरत थी। लेकिन इस समय भी राघव चड्ढा पार्टी नेतृत्व के साथ नजर नहीं आए। उनकी भूमिका सीमित रही। इससे पार्टी में उनकी पोजीशन को लेकर भी सवाल उठने लगे। हालांकि, जब पार्टी नेता संजय सिंह से इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने सीधा जबाव देने से इनकार कर दिया। दूसरी तरफ आतिशी ने भी उनके लंदन में होने की बात कहकर ऐसे सवालों को टाल दिया। लेकिन आम कार्यकर्ता के मन में राघव चड्ढा और पार्टी को लेकर धारणा बनना शुरू हो गईं।

इसके बाद राघव चड्ढा ने राज्यसभा में पार्टी लाइन से अलग हटकर मुद्दे उठाने शुरू कर दिए। उन्होंने गिग वर्कर्स, मेंस्ट्रुअल हाइजीन, सरपंच पति प्रथा, मध्यवर्ग और टैक्स से जुड़े मुद्दे, एयरपोर्ट पर समोसे जैसे आम आदमी के मुद्दे उठाने की शुरुआत की। सोशल मीडिया पर चड्ढा के इस काम को काफी सराहा गया, लेकिन पार्टी नेतृत्व के भीतर इसे लेकर असमंजस की स्थिति बनती दिखी।

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5. लगातार चलती खींचतान को आम आदमी पार्टी की तरफ से सार्वजनिक रंग तब दे दिया गया, जब राघव को राज्यसभा से पार्टी के उपनेता पद से हटा दिया गया। इस पर राघव ने उन्हें जानबूझकर 'चुप कराए' जाने का आरोप लगाया। राघव के इस बयान के बाद पार्टी के तमाम नेताओं ने उन पर हमला बोलना शुरू कर दिया। सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि राघव चड्ढा ने बड़े राष्ट्रीय मुद्दों को उठाने के बजाए समोसे की कीमत का मुद्दा उठाया। इतना ही नहीं उन्होंने राघव पर भाजपा के साथ समझौता करने का भी आरोप लगाया।

इसके अलावा भारद्वाज ने कहा कि जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष महाभियोग लेकर आया था, उस पर राघव ने हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था।