गिरफ्तारी से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे पवन खेड़ा, हिमंत की पत्नी पर लगाए थे गंभीर आरोप
गुवाहाटी हाई कोर्ट द्वारा एंटीसिपेटरी बेल की याचिका खारिज होने के बाद कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने अब सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। वह असम के मुख्यमंत्री हिमंत की पत्नी द्वारा एफआईआर मामले में एंटीसिपेटरी बेल के लिए शीर्ष अदालत पहुंचे हैं।

गुवाहाटी हाई कोर्ट द्वारा एंटीसिपेटरी बेल की याचिका खारिज होने के बाद कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने अब सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। वह असम के मुख्यमंत्री हिमंत की पत्नी द्वारा एफआईआर मामले में एंटीसिपेटरी बेल के लिए शीर्ष अदालत पहुंचे हैं। गौरतलब है कि पवन खेड़ा ने आरोप लगाया था कि हिमंत की पत्नी रिंकी भुइयां के पास तीन देशों का पासपोर्ट होने का आरोप लगाया था। इसके बाद हिमंत बिस्वा सरमा ने काफी आक्रामक जवाब दिया था। इससे पहले गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
कांग्रेस ने कहा था हम खेड़ा के साथ
गुवाहाटी उच्च न्यायालय द्वारा पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद कांग्रेस की प्रतिक्रिया आई थी। शनिवार को पार्टी की तरफ से कहा गया कि वह अपने मीडिया विभाग के प्रमुख के साथ खड़ी है। साथ ही उम्मीद जताई कि उत्पीड़न की राजनीति पर न्याय की जीत होगी।पवन खेड़ा ने हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी पर कई पासपोर्ट और विदेश में अघोषित संपत्तियां होने के आरोपों से जुड़े मामले में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की थी। सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां ने खेड़ा और अन्य लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत गुवाहाटी अपराध शाखा पुलिस थाने में आपराधिक मामले दर्ज कराए थे।
इससे पहले तेलंगाना उच्च न्यायालय ने खेड़ा को सात दिन की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी, लेकिन असम पुलिस ने इसके खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख किया था। शीर्ष अदालत ने अंतरिम आदेश पारित कर ट्रांजिट अग्रिम जमानत पर रोक लगा दी थी और खेड़ा को गुवाहाटी उच्च न्यायालय जाने को कहा था।
गुवाहाटी हाई कोर्ट ने क्या कहा
गुवाहाटी हाई कोर्ट के आदेश में कहा गया है कि यदि खेड़ा ने ये आरोप मुख्यमंत्री के खिलाफ लगाए होते, तो यह मामला राजनीतिक बयानबाजी माना जा सकता था। लेकिन राजनीतिक लाभ लेने के लिए उन्होंने एक निर्दोष महिला को विवाद में घसीट लिया। न्यायाधीश ने कहा कि खेड़ा अब तक यह संदेह से परे साबित नहीं कर पाए हैं कि रिंकी शर्मा के पास तीन अन्य देशों के पासपोर्ट हैं। वह यह भी साबित नहीं कर पाए हैं कि उन्होंने अमेरिका में कोई कंपनी खोली और उसमें भारी निवेश किया। अदालत ने कहा कि उसकी राय में मौजूदा परिस्थितियों में इस मामले को केवल साधारण मानहानि का मामला नहीं कहा जा सकता, यानी ऐसा मामला जिसमें दुर्भावना या साजिश जैसे अतिरिक्त तत्व न हों।




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