विश्वगुरु जिम्मेदार हैं; ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान के 'चौधरी' बनने पर कांग्रेस
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर हमला करते हुए कहा कि सूत्र कह रहे हैं कि पाकिस्तान इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता करने वालों में शामिल है। यह भारत की कूटनीति के लिए बड़ा झटका है।

ईरान और अमरिका-इजरायल के बीच पाकिस्तान की कथित मध्यस्थता को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार को घेरते हुए इसे भारत के लिए बड़ा झटका बताया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मीडियी रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि पाकिस्तान उन देशों में शामिल है जो कि युद्ध रुकवाने के लिए मध्यस्थता कर रहे हैं। भारत की भूमिका पर सवाल उठाते हुए जयराम रमेश ने कहा कि अगर ये रिपोर्ट सही हैं तो इसके लिए पूरी तरह से स्वघोषित विश्वगुरु जिम्मेदार हैं।
सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में रमेश ने कहा, 'प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों की कई रिपोर्टों ने पाकिस्तान को उन मध्यस्थों में से एक बताया है, जिनका इस्तेमाल एक तरफ अमेरिका और इज़रायल तथा दूसरी तरफ ईरान के बीच किया जा रहा है। यदि ये रिपोर्टें सही हैं, तो यह भारत के लिए एक बड़ा झटका है और भारत की उपेक्षा है-और इसके लिए पूरी तरह स्वघोषित विश्वगुरु जिम्मेदार हैं।'
रिपोर्ट्स में कहा गया है कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का कार्य तीन देश संभाल रहे हैं जिनमें पाकिस्तान भी शामिल है। इस मामले में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है। इतना कयास जरूर लगाया जा रहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत भी पाकिस्तान में हो सकती है। अमेरिका का कहना है कि इस बारे में कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट खोलने की चेतावनी देते हुए ईरान को 48 घंटे का आल्टिमेटम दिया था जिसे अब पांच दिन में बदल दिया गया है।
उन्होंने कहा, 'एक साल से अधिक समय से यह बिल्कुल स्पष्ट है कि ऑपरेशन सिंदूर में हमारी निर्विवाद सैन्य सफलताओं के बावजूद, दुखद सच्चाई यह है कि उसके बाद पाकिस्तान की कूटनीतिक सक्रियता और नैरेटिव प्रबंधन मोदी सरकार की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी रहा है। पाकिस्तान, जो राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और वैश्विक स्तर पर बेहद नाजुक स्थिति में था, उसे एक नई जिंदगी मिल गई। राष्ट्रपति ट्रंप ने बार-बार और गर्मजोशी से उस व्यक्ति का आवभगत किया, जिसकी भड़काऊ और उकसाने वाली बयानबाजी ने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम आतंकी हमलों की पृष्ठभूमि तैयार की थी, साथ ही फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को दो बार व्हाइट हाउस में आमंत्रित किया (जिसमें एक अभूतपूर्व लंच भी शामिल था)। पाकिस्तानी प्रतिष्ठान ने राष्ट्रपति ट्रंप के करीबी सर्कल के साथ एक बेहद घनिष्ठ संबंध बना लिया है।'
पीएम मोदी की इजरायल यात्रा के समय पर सवाल उठाते हुए जयराम रमेश ने कहा, 'ईरान पर अमेरिका-इज़रायल के बिना उकसावे वाले हवाई हमले शुरू होने से ठीक दो दिन पहले समाप्त हुई पीएम मोदी की अविवेकपूर्ण इज़रायल यात्रा, हमारे राजनीतिक इतिहास में एक बेहद विनाशकारी निर्णय के रूप में दर्ज होगी-एक ऐसा निर्णय जिसने हमें उस स्थिति से पीछे धकेल दिया, जहां हम मध्यस्थ की भूमिका निभा सकते थे और निभानी भी चाहिए थी। प्रधानमंत्री की झप्पी कूटनीति की पूरी तरह पोल खुल चुकी है। देश को इसकी कीमत चुकाने के लिए मजबूर किया जा रहा है।'




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