जम्मू-कश्मीर में क्यों हो रही एकनाथ शिंदे की तारीफ, पहलगाम आतंकी हमले से क्या कनेक्शन
पहलगाम में पर्यटकों की जान बचाते हुए आतंकियों के हमले में एक स्थानीय शख्स सैयद आदिल हुसैन शाह मारा गया था। आदिल की वीरता को नमन करते हुए एकनाथ शिंदे ने उसके परिवार की मदद के लिए हाथ बढ़ाया था। इसीलिए उन्हें याद किया जा रहा है और परिवार तारीफें करते नहीं थक रहा।

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में बीते साल 22 अप्रैल को ही भीषण आतंकी हमला हुआ था। इस हमले में हिंदू पर्यटकों को नाम और मजहब पूछकर मार डाला गया था। पाकिस्तानी आतंकियों की इस कायराना हरकत का जवाब भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिए दिया था और कई दिनों तक पाकिस्तान के साथ संघर्ष चला था। इस ऑपरेशन में पाकिस्तान स्थित कई आतंकी ठिकाने तबाह हो गए थे। आज उसी पहलगाम आतंकी हमले की बरसी है और जम्मू-कश्मीर में मारे गए तमाम लोगों के साथ ही सेना के शौर्य को भी याद किया जा रहा है। इस बीच एक और नाम की चर्चा है, वह है महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे का।
ऐसा इसलिए क्योंकि इस हमले में पर्यटकों की जान बचाते हुए आतंकियों के हमले में एक स्थानीय शख्स सैयद आदिल हुसैन शाह मारा गया था। आदिल की वीरता को नमन करते हुए एकनाथ शिंदे ने उसके परिवार की मदद के लिए हाथ बढ़ाया था। इसीलिए उन्हें याद किया जा रहा है और आदिल का परिवार एकनाथ शिंदे की सराहना करते नहीं थक रहा। इस संबंध में जब मीडिया ने बात की तो आदिल के पिता हैदर शाह ने कहा, 'हम तो एकनाथ शिंदे के बहुत शुक्रगुजार हैं कि जब 22 अप्रैल 2025 को यह घटना हुई तो उनके सारे लोग हमारे साथ खड़े रहे। आज भी जब एक साल पूरा हुआ है तो वह हमारे साथ खड़े हैं।'
आदिल के पिता बोले- एकनाथ शिंदे ने वादा निभाया, मजहब नहीं देखा
हैदर शाह ने कहा कि एकनाथ शिंदे ने हमसे घर बनाने का वादा किया था और उसे उन्होंने पूरा किया। उनकी ओर से राशन, मकान समेत तमाम चीजें दी गई हैं। इस मकान को बनाने में एक साल का वक्त लगा और उनकी ओर से भेजे गए लोग इसमें लगे रहे। इसके आगे आदिल के पिता कहते हैं कि मेरे बेटे ने तो इंसानियत कायम की। उसने हिंदू, मुसलमान या फिर सिख नहीं देखा बल्कि उसने परिवार को छोड़कर देश के लोगों के लिए जान दी। इस बात को समझते हुए एकनाथ शिंदे साहब ने भी हमारे साथ ऐसा ही सलूक किया। आदिल ने यह मिसाल कायम की सभी मिलकर रहें और इंसानियत को जिंदा रखें।
आदिल के भाई ने कहा- घर बनकर तैयार, अब उद्घाटन की बारी
आदिल के भाई सैयद नौशाद ने कहा कि हम लोगों को आज भी यकीन नहीं होता कि आदिल अब हमारे बीच नहीं है। हमारे पास कुछ भी नहीं था, लेकिन उनके जाने के बाद एकनाथ शिंदे ने हमारी बहुत मदद की। इसके अलावा स्थानीय सरकार ने भी मदद की और पूरे हिंदुस्तान से लोग पहुंचे। खासतौर पर मीडिया का शुक्रिया अदा करूंगा, जिनके चलते पूरी दुनिया को पता चला कि आदिल कौन थे। महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने भी समझा कि इंसानियत क्या है। उन्होंने तब ही हमें 5 लाख रुपये कैश दिए थे और मकान का वादा किया था। अब यह मकान तैयार हो गया है और इसका उद्घाटन होना है।




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