नार्वे में PM मोदी पर नस्ल वादी कार्टून, अखबार ने बीन बजाते हुए दिखाया; सांप के रूप में पेट्रोल पंप हैंडल
नार्डिक देशों की यात्रा पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नस्लीय हमले का सामना करना पड़ा है। नार्वे के एक प्रमुख अखबार ने पीएम मोदी को सपेरे को रूप में दिखाया है, जबकि सांप के रूप में पेट्रोल पंप के हैंडल को दिखाया गया है।
पांच देशों की यात्रा के चौथे चरण में नार्वे पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी को नस्लवादी हमले का सामना करना पड़ा है। नार्वे के एक प्रमुख अखबार पीएम मोदी को एक सपेरे के रूप में दिखाया है, जिनके सामने सांप की जगह पर पेट्रोल पंप की पाइप को रखा गया है। पीएम मोदी की नार्वे यात्रा के पहले 16 मई को छपे इस कार्टून के सोशल मीडिया साइट पर आने के बाद कई लोगों ने अखबार की आलोचना की है।
नार्वे के प्रमुख अखबार 'आफ्टेनपोस्टेन' में प्रकाशित यह कार्टून ऐसे समय में सामने आया है, जब नार्वे में पहले से ही एक पत्रकार द्वारा पीएम मोदी पर टप्रेस की स्वतंत्रताट को लेकर एक पत्रकार द्वारा हमला किया गया था। इसके बाद विदेश मंत्रालय की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भी MEA प्रवक्ताओं से उस पत्रकार की बहस हो गई थी। इस पूरे विवाद को सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हुई है। इतना ही नहीं उसी पत्रकार ने बाद में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की इंटरव्यू के लिए भी आमंत्रित कर दिया है।
कार्टून में क्या दिखाया गया?
नार्वे के अखबार 'आफ्टेनपोस्टेन' में छपे ओपिनियन पीस के साथ प्रकाशित इस कार्टून में पीएम मोदी को एक सपेरे के रूप में दिखाया गया है। इनके सामने एक टोकरी में पेट्रोल पंप की पाइप और उसके आगे के हैंडल को दिखाया गया है। इस संपादकीय की हेडलाइन में लिखा हुआ है- 'एक चतुर लेकिन परेशान करने वाला व्यक्ति।' अखबार ने इस लेख में भारत विरोधी रुख अपनाते हुए बताया है कि नई दिल्ली की नजरें नार्डिक क्षेत्र पर क्यों है।
दरअसल, यह पूरा मामला भारत और उसकी तेल खपत से जुड़ा हुआ है। यूरोप में एक वर्ग है, जो भारत द्वारा रूसी तेल खरीद की वजह से नाराज है। पीएम मोदी की यूरोप यात्रा के दौरान यही वर्ग भारत और प्रधानमंत्री मोदी विरोधी बयानवाजी कर रहा है। गौरतलब है कि यूक्रेन युद्ध के बाद से भारत रूसी तेल का एक बड़ा खरीददार बना हुआ है। इससे न सिर्फ अमेरिका बल्कि यूरोप के तमाम देशों को परेशानी है। इन देशों का ऐसा मानना है कि भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद की वजह से रूस को मदद मिल रही है। विडंबना यह है कि यह देश भी रूस से व्यापार करते हैं।
भारत के खिलाफ नस्ल वादी रही है पश्चिमी मीडिया
बता दें, पश्चिमी मीडिया ने काफी पहले से ही भारत की छवि एक सपेरों, पवित्र हाथियों और अंधविश्वासों को तौर पर बनाई हुई है। विशेष रूप से सपेरे की छवि का इस्तेमाल पश्चिमी मीडिया द्वारा भारतीयों के प्रतीक के रूप में दिखाई जाती रही ह़ै। वैश्विक रूप से इसकी कई बार आलोचना भी की जाती रही है।
पीएम मोदी ने भी 2014 की अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान इस छवि को तोड़ने की कोशिश की थी। इस यात्रा के दौरान उन्होंने कहा था कि भारत आजकल माउस से जादू कर रहा है। इसमें उनका इशारा कंप्यूटर माउस की तरफ था।




साइन इन