who is norway journalist helle lyng clashed with pm modi sibi george active on x after 2 years कौन है पत्रकार हेले लिंग? पीएम मोदी की नॉर्वे यात्रा पर काटा बवाल, 2 साल बाद हुई एक्टिव, International Hindi News - Hindustan
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कौन है पत्रकार हेले लिंग? पीएम मोदी की नॉर्वे यात्रा पर काटा बवाल, 2 साल बाद हुई एक्टिव

नॉर्वे में पीएम मोदी और भारतीय अधिकारियों से भिड़ने वाली पत्रकार हेले लिंग कौन हैं? डैग्सविसेन की इस रिपोर्टर ने 2 साल बाद X (ट्विटर) पर वापसी करते हुए प्रेस फ्रीडम का मुद्दा उठाया है। जानें ओस्लो विवाद और हेले लिंग की पूरी कहानी।

Tue, 19 May 2026 05:48 PMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, ओस्लो
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कौन है पत्रकार हेले लिंग? पीएम मोदी की नॉर्वे यात्रा पर काटा बवाल, 2 साल बाद हुई एक्टिव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नॉर्वे दौरे के दौरान प्रेस की स्वतंत्रता और मानवाधिकारों को लेकर एक बड़ा विवाद देखने को मिला। ओस्लो में नॉर्वे की एक पत्रकार हेले लिंग (Helle Lyng) और भारतीय विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज के बीच तीखी नोकझोंक हुई। यह विवाद तब शुरू हुआ जब पत्रकार ने पीएम मोदी से सीधे सवाल पूछने की कोशिश की और बाद में प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय अधिकारियों पर सवालों की बौछार कर दी।

विवाद की शुरुआत: "दुनिया की सबसे स्वतंत्र प्रेस के सवाल क्यों नहीं लेते?"

इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब प्रधानमंत्री मोदी और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोरे ओस्लो में एक साझा प्रेस बयान दे रहे थे। दोनों नेताओं का संबोधन खत्म होने के बाद, जैसे ही पीएम मोदी वहां से जाने लगे, नॉर्वे के ओस्लो स्थित 'डैग्सविसेन' (Dagsavisen) अखबार की पत्रकार हेले लिंग ने जोर से चिल्लाते हुए कहा, "प्रधानमंत्री मोदी, आप दुनिया की सबसे स्वतंत्र प्रेस से कुछ सवाल क्यों नहीं लेते?"

पीएम मोदी ने इस सवाल का कोई जवाब नहीं दिया और वहां से चले गए। इसके बाद हेले लिंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि उन्हें पीएम मोदी से जवाब की उम्मीद भी नहीं थी। उन्होंने इस बात का जिक्र किया कि 'वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स' में नॉर्वे पहले नंबर पर है, जबकि भारत काफी नीचे 157वें स्थान पर है।

MEA की प्रेस कॉन्फ्रेंस में हुई तीखी बहस

इस घटना के बाद शाम को विदेश मंत्रालय (MEA) की एक प्रेस ब्रीफिंग आयोजित की गई। हेले लिंग इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी पहुंचीं और उन्होंने लगातार तीखे सवाल पूछकर भारतीय राजनयिकों को घेरने की कोशिश की। यहीं पर उनका विदेश मंत्रालय के सचिव सिबी जॉर्ज के साथ सीधा और तनावपूर्ण आमना-सामना हुआ।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में हुई बहस का ब्योरा कुछ इस तरह है-

पत्रकार हेले लिंग: नॉर्वे को भारत पर भरोसा क्यों करना चाहिए? क्या आप अपने देश में मानवाधिकारों के उल्लंघन को रोकेंगे?

सिबी जॉर्ज: (जवाब देना शुरू करते हैं)

पत्रकार हेले लिंग: (बीच में टोकते हुए)

सिबी जॉर्ज: नहीं, आपने मुझसे एक सवाल पूछा है। मुझे इसका जवाब देने दीजिए।

पत्रकार हेले लिंग: नॉर्वे को भारत पर भरोसा क्यों करना चाहिए? क्या पीएम मोदी प्रेस से आलोचनात्मक सवाल लेने के लिए सहमत होंगे? मैं चाहती हूं कि आप मुझे अभी जवाब दें। बिल्कुल अभी।"

MEA प्रवक्ता: (बीच-बचाव करते हुए) मैम, मैं इस प्रेस ब्रीफिंग का संचालन कर रहा हूं।

इसके बाद सिबी जॉर्ज ने सवाल का एक लंबा और सटीक जवाब दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस तीखी बहस के दौरान माहौल इतना गर्म हो गया था कि पत्रकार एक बार ब्रीफिंग रूम से बाहर भी चली गईं और फिर कुछ देर बाद वापस लौट आईं।

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इस बहस के बाद हेले लिंग का वीडियो सोशल मीडिया साइट्स पर वायरल हो गया। लोगों ने सवाल उठाना शुरू कर दिया कि आखिर हेले लिंग MEA प्रवक्ता की पूरी बात सुने बिना प्रेस कॉन्फ्रेंस बीच में छोड़कर क्यों चली गईं। क्या वह केवल एक पॉडकास्टर बनना चाहती थीं कि केवल वही सुनती रहें। इस पर रिएक्ट करते हुए हेले लिंग ने लिखा कि वह पानी पीने के लिए गई थीं।

कौन हैं पत्रकार हेले लिंग?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नॉर्वे दौरे के दौरान भारतीय विदेश मंत्रालय के अधिकारियों से तीखी बहस करने वालीं नॉर्वे की पत्रकार हेले लिंग अचानक दुनियाभर की मीडिया की सुर्खियों में आ गई हैं। जिस विवादित अंदाज में उन्होंने पीएम मोदी और भारतीय राजनयिक सिबी जॉर्ज से सवाल किए, उसके बाद हर कोई यह जानना चाहता है कि आखिर हेले लिंग हैं कौन। इस पूरे विवाद में एक और दिलचस्प बात यह सामने आई है कि हेले लिंग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (ट्विटर) पर पूरे 2 साल बाद एक्टिव हुई हैं।

नॉर्वे के प्रतिष्ठित अखबार 'डैग्सविसेन' से जुड़ी हैं हेले

हेले लिंग नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में स्थित एक प्रमुख और पुराने दैनिक समाचार पत्र 'डैग्सविसेन' के लिए काम करती हैं। यह अखबार नॉर्वे में अपने स्वतंत्र पत्रकारिता, राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर बेबाक राय रखने के लिए जाना जाता है। हेले लिंग इसी अखबार की ओर से उस प्रेस कॉन्फ्रेंस को कवर करने पहुंची थीं, जहां उन्होंने प्रेस की स्वतंत्रता और मानवाधिकारों को लेकर भारत पर सवाल दागे। इससे पहले वे Nettavisen में रिपोर्टर के रूप में काम कर रही थीं। वहां उन्होंने इकॉनमी सेक्शन में रिपोर्टिंग की और अमेरिका की पूर्व संवाददाता के रूप में काम किया, खासकर पिछले अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान।

चीन की कठपुतली होने का आरोप

सोशल मीडिया पर हेले लिंग को चीन की कठपुतली कहा जा रहा है। इसकी वजह उनकी पिछली रिपोर्टिंग है। उन्होंने कई मौकों पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को "सुपरहीरो" कहा और चीन को "सुपर पावर" बताया। अमेरिकी कंपनी टेस्ला की आलोचना और चीनी EV कंपनियों को बेहतर विकल्प के रूप में प्रमोट किया। दुनिया भर में मजदूर एकता के पतन पर बार-बार अफसोस जताया, जिसे सोवियत-स्टाइल प्रोपगैंडा से जोड़ा गया। उनके ज्यादातर लेख ट्रंप प्रशासन और अमेरिका की नीतियों की आलोचना करते हैं। ट्रंप के लिए "अत्यधिक भद्दी" भाषा का इस्तेमाल।

एक्स (X) पर 2 साल का ब्रेक और फिर अचानक वापसी

हेले लिंग को लेकर सबसे दिलचस्प बात यह सामने आई है कि वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पिछले लगभग दो सालों से निष्क्रिय थीं। लेकिन पीएम मोदी के दौरे और प्रेस कॉन्फ्रेंस में हुए विवाद के तुरंत बाद वह वापस इस प्लेटफॉर्म पर एक्टिव हो गईं। सीधे 2 साल बाद 'एक्स' पर लौटते ही उन्होंने सबसे पहले वही वीडियो शेयर किया, जिसमें वह पीएम मोदी के पीछे से चिल्लाते हुए पूछ रही थीं, "प्रधानमंत्री मोदी, आप दुनिया की सबसे स्वतंत्र प्रेस से कुछ सवाल क्यों नहीं लेते?"

प्रेस फ्रीडम इंडेक्स का दिया हवाला

अपने इस कमबैक पोस्ट में हेले लिंग ने सिर्फ वीडियो ही शेयर नहीं किया, बल्कि 'वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स' का हवाला देते हुए एक तीखी टिप्पणी भी की। उन्होंने लिखा कि उन्हें पीएम मोदी से जवाब मिलने की कोई उम्मीद भी नहीं थी। अपने पोस्ट में उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रेस की आजादी के मामले में नॉर्वे दुनिया भर में पहले (नंबर 1) स्थान पर है, जबकि भारत की रैंकिंग काफी नीचे 157वें पायदान पर है।

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सिबी जॉर्ज का कड़ा पलटवार: "अज्ञानी एनजीओ की रिपोर्ट पढ़कर आते हैं..."

पत्रकार के इस आक्रामक रवैये और सवालों का सिबी जॉर्ज ने बेहद मजबूती से जवाब दिया। उन्होंने भारत के विशाल लोकतांत्रिक ढांचे का बचाव करते हुए आलोचकों की समझ पर सवाल उठाए। सिबी जॉर्ज ने विदेशी पत्रकार को भारत की सच्चाई बताते हुए कहा, “क्या आपको पता है कि हमारे यहां कितनी खबरें आती हैं? सिर्फ दिल्ली में ही अंग्रेजी, हिंदी और कई अन्य भाषाओं में कम से कम 200 टीवी चैनल हैं। लोगों को भारत की विशालता (स्केल) की कोई समझ ही नहीं है।” भारतीय राजनयिक ने कड़े शब्दों में कहा, "लोगों में समझ की कमी है। वे कुछ अनजान और 'अज्ञानी एनजीओ' द्वारा प्रकाशित एक या दो भ्रामक खबरें पढ़ लेते हैं और फिर आकर इस तरह के सवाल पूछते हैं।"

संविधान और महिला अधिकार का दिया हवाला

मानवाधिकारों के मुद्दे पर जवाब देते हुए सिबी जॉर्ज ने कहा कि भारत का संविधान सभी नागरिकों को मौलिक अधिकारों की गारंटी देता है। उन्होंने जोर देकर कहा, "1947 में ही हमने अपनी महिलाओं को वोट देने की आजादी दे दी थी। मुझे ऐसे कई देश पता हैं, जहां महिलाओं को भारत के कई दशकों बाद वोटिंग का अधिकार मिला। हम समानता में विश्वास करते हैं। और मानवाधिकार का सबसे बड़ा उदाहरण क्या है? अपनी सरकार बदलने और वोट देने का अधिकार।"

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