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घबराइए मत! भारत में तेल और गैस की कोई कमी नहीं, नजर रख रही सरकार; क्या बोले केंद्रीय मंत्री?

ईरान युद्ध के कारण भारत में कमर्शियल एलपीजी की भारी किल्लत हो गई है, जिससे रेस्टोरेंट मालिक परेशान हैं। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, शोभा करंदलाजे ने लोगों से न घबराने की अपील की है। जानें सरकार इस संकट से निपटने के लिए क्या कदम उठा रही है।

Wed, 11 March 2026 07:58 AMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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घबराइए मत! भारत में तेल और गैस की कोई कमी नहीं, नजर रख रही सरकार; क्या बोले केंद्रीय मंत्री?

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता के बावजूद, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने देशवासियों को आश्वस्त किया है कि भारत में ईंधन की किसी भी तरह की कोई कमी नहीं है। संभावित सप्लाई बाधाओं को लेकर चिंताओं को दूर करते हुए गोयल ने मीडिया को बताया कि सरकार मौजूदा हालात पर पैनी नजर बनाए हुए है और देश भर में ईंधन की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठा रही है।

सरकार की स्थिति पर कड़ी नजर

तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में बोलते हुए, पीयूष गोयल ने इस बात पर जोर दिया कि अधिकारी सतर्क हैं और घरेलू सप्लाई चैन को सुरक्षित रखने के लिए संबंधित विभाग लगातार वैश्विक घटनाक्रमों की समीक्षा कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा- ईंधन की बिल्कुल भी कोई कमी नहीं है। विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है। एक गंभीर युद्ध चल रहा है... इस स्थिति में जो भी चिंताएं होंगी, संबंधित विभागों द्वारा समय-समय पर सभी को अवगत कराया जाएगा। वे स्थिति की बहुत बारीकी से निगरानी कर रहे हैं।

केंद्र सरकार ने लोगों से न घबराने की अपील की

गोयल के अलावा, केंद्रीय राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने भी देश में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कमी से परेशान होटल और रेस्टोरेंट संचालकों व आम लोगों से न घबराने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण वैश्विक सप्लाई चेन बाधित हुई है, लेकिन केंद्र सरकार इस समस्या के समाधान के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है।

मंत्री ने बताया कि सरकार स्थिति पर करीब से नजर रख रही है और व्यवसायों तथा आम नागरिकों पर इसके प्रभाव को कम करने के लिए संबंधित मंत्रालयों के साथ मिलकर काम कर रही है। शोभा करंदलाजे ने बताया कि उन्होंने इस संकट को लेकर केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी से फोन पर बात की है और व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर उन्हें कर्नाटक सहित देशभर के होटल मालिकों की समस्याओं से अवगत कराया है। एलपीजी संकट के अलावा, सरकार युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में फंसे कन्नड़ लोगों सहित सभी भारतीयों को सुरक्षित वापस लाने के प्रयासों में भी जुटी है। मंत्री ने राज्य सरकारों से भी इस दिशा में सहयोग का आग्रह किया है।

मंत्री ने जमीनी हकीकत बताते हुए कहा कि कर्नाटक और देश के अन्य हिस्सों से होटल एसोसिएशनों ने पत्रों और फोन के माध्यम से कमर्शियल एलपीजी की कमी का मुद्दा उठाया है। उन्होंने बताया कि भारत कच्चे तेल के उत्पादन में आत्मनिर्भर नहीं है। भारत अपनी कुल आवश्यकता का लगभग 80-90% कच्चा तेल मध्य पूर्व के देशों से आयात करता है। वर्तमान भू-राजनीतिक संघर्ष के कारण भारत को होने वाली कच्चे तेल की आपूर्ति में कमी आई है, जिससे पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता पर असर पड़ा है।

आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू

मंत्रियों का यह आश्वासन ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार ने इसी हफ्ते की शुरुआत में वैश्विक आपूर्ति दबावों के बीच घरेलू ऊर्जा बाजार को स्थिर करने के लिए 'आवश्यक वस्तु अधिनियम' (ईसी एक्ट) लागू किया है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने एक नियंत्रण आदेश जारी कर रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल इकाइयों को तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी - रसोई गैस) का उत्पादन अधिकतम करने और देश भर में इसकी स्थिर आपूर्ति बनाए रखने के लिए प्रमुख हाइड्रोकार्बन को एलपीजी पूल में मोड़ने का निर्देश दिया है।

घरेलू उपभोक्ताओं को मिलेगी सर्वोच्च प्राथमिकता

संशोधित ढांचे के तहत, प्राकृतिक गैस के वितरण में घरेलू उपभोक्ताओं को सबसे ऊपर रखा गया है।

घरेलू और वाहन उपयोग (100% आपूर्ति): सरकार ने घरों में 100 प्रतिशत पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) और वाहनों के लिए संपीड़ित प्राकृतिक गैस (सीएनजी) की आपूर्ति का आश्वासन दिया है।

उद्योग और विनिर्माण (80% आपूर्ति): गैस ग्रिड से जुड़े चाय प्रसंस्करण इकाइयों और अन्य विनिर्माण क्षेत्रों के साथ-साथ औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को उनके पिछले छह महीनों की औसत खपत का 80 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा।

उर्वरक संयंत्र (70% आपूर्ति): इस पुनर्वितरण योजना के तहत उर्वरक संयंत्रों को उनके पिछले छह महीने की औसत खपत का 70 प्रतिशत हिस्सा आवंटित किया गया है।

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आपूर्ति में कटौती और वैकल्पिक मार्गों की तलाश

अधिकारियों ने बताया कि इस संतुलन प्रक्रिया के तहत जरूरी घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देने के लिए रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल संयंत्रों से प्राकृतिक गैस की आपूर्ति में 35 प्रतिशत की कटौती की गई है।

यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब भारत होर्मुज जलडमरूमध्य में होने वाली बाधाओं के कारण लॉजिस्टिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। गौरतलब है कि भारत का लगभग 30 प्रतिशत प्राकृतिक गैस आयात इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है।

अल्पावधि की कमी को दूर करने और भू-राजनीतिक संकट के बीच ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, सरकार प्राकृतिक गैस की खरीद के लिए वैकल्पिक व्यापार मार्गों की भी तलाश कर रही है, जबकि घरों के लिए एलपीजी की उपलब्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

जमीनी स्तर पर रेस्टोरेंट संचालकों की परेशानी

इस कमी का सीधा असर छोटे और मध्यम दर्जे के खाद्य व्यवसायों पर पड़ रहा है। हैदराबाद स्थित 'सोफी कबाब हाउस' के मालिक अलीम खान ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के बिना उनके लिए व्यवसाय चलाना नामुमकिन हो रहा है। उन्होंने कहा- हमें सिलेंडरों की कीमतों और उपलब्धता दोनों को लेकर भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। पिछले दो दिनों से हमें कमर्शियल सिलेंडर नहीं मिला है। अगर यही स्थिति रही, तो हमारा व्यवसाय पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा।

क्या है वैश्विक संकट का कारण?

पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष अब केवल ईरान तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि इसका विस्तार हो चुका है। ईरान ने मिसाइलों और ड्रोन्स के जरिए जवाबी हमले किए हैं।

इन हमलों में यूएई, सऊदी अरब, कतर, कुवैत, बहरीन और जॉर्डन जैसे पड़ोसी खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों, दूतावासों और ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचों को निशाना बनाया गया है।

इस युद्ध ने विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को बुरी तरह बाधित किया है। आपको बता दें कि दुनिया भर के कुल तेल व्यापार का लगभग 20% हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है।

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