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LPG संकट से ढाबे और रेस्टोरेंट के बंद होने की नौबत, सरकार ने बनाई टास्क फोर्स

भारत में हर साल लगभग 313 लाख टन एलपीजी की खपत होती है। इसमें से 87 प्रतिशत हिस्सा घरेलू रसोई में इस्तेमाल होता है, जबकि 13 प्रतिशत होटल और रेस्टोरेंट जैसे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में खपत होता है। कुल मांग का 62 प्रतिशत आयात से पूरा किया जाता है।

Tue, 10 March 2026 10:12 AMDrigraj Madheshia लाइव हिन्दुस्तान
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LPG संकट से ढाबे और रेस्टोरेंट के बंद होने की नौबत, सरकार ने बनाई टास्क फोर्स

LPG Crisis: तेल मंत्रालय ने व्यावसायिक एलपीजी गैस की अचानक कमी को देखते हुए एक समिति का गठन किया है। होटल और रेस्टोरेंट उद्योग में यह कमी गहरा संकट पैदा कर रही है। रेस्टोरेंट एसोसिएशनों ने आगाह किया है कि अगर सप्लाई बहाल नहीं हुई तो कुछ ही दिनों में खाने-पीने के ढाबे और रेस्टोरेंट बंद हो सकते हैं।

कैसे शुरू हुआ संकट?

मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्घ के कारण ईंधन की सप्लाई प्रभावित हुई है। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से भारत को सऊदी अरब जैसे देशों से होने वाला 85-90 प्रतिशत एलपीजी आयात ठप हो गया है। इस वजह से सरकार ने घरेलू रसोई गैस की सप्लाई को प्राथमिकता दी है, जिससे होटल और रेस्टोरेंट के लिए बाजार भाव वाली व्यावसायिक गैस की किल्लत बढ़ गई है।

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समिति की भूमिका क्या होगी?

मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि तेल विपणन कंपनियों के तीन कार्यकारी निदेशकों की एक समिति बनाई गई है। यह समिति रेस्टोरेंट, होटल और अन्य उद्योगों को एलपीजी सप्लाई से जुड़े मामलों की समीक्षा करेगी।

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कितनी बड़ी है एलपीजी की खपत?

भारत में हर साल लगभग 313 लाख टन एलपीजी की खपत होती है। इसमें से 87 प्रतिशत हिस्सा घरेलू रसोई में इस्तेमाल होता है, जबकि 13 प्रतिशत होटल और रेस्टोरेंट जैसे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में खपत होता है। कुल मांग का 62 प्रतिशत आयात से पूरा किया जाता है।

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सरकार ने उठाए ये कदम

तेल मंत्रालय ने हाल के दिनों में रिफाइनरियों को पेट्रोकेमिकल उत्पादन कम करके एलपीजी का उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, घरेलू गैस सिलेंडर बुकिंग की अवधि 21 से बढ़ाकर 25 दिन कर दी गई है, ताकि जमाखोरी और कालाबाजारी को रोका जा सके। अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों जैसे आवश्यक गैर-घरेलू क्षेत्रों को आयातित एलपीजी की सप्लाई प्राथमिकता के आधार पर की जा रही है।

उद्योग पर क्या असर पड़ रहा है?

PTI के उद्योग सूत्रों के अनुसार, मुंबई और बेंगलुरु में इस सप्लाई व्यवधान का असर पहले ही दिखने लगा है। इंडिया होटल्स एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय शेट्टी का कहना है कि यह कमी तेजी से फैल रही है और जल्द ही पूरे क्षेत्र को ठप कर सकती है।

पुणे में गैस सिलेंडर संकट से रेस्टोरेंट संचालन प्रभावित

पुणे के गैस वितरकों ने HT को बताया कि पिछले कुछ दिनों से चाकण और शिकरापुर स्थित भराई संयंत्रों से 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई में कमी आई है। वितरकों के अनुसार, आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले 19 किलो के सिलेंडर मिलना मुश्किल हो गया है, जबकि 47.5 किलो और 425 किलो के बड़े सिलेंडर भी सीमित मात्रा में ही मिल पा रहे हैं।

गैस वितरक किशोर मोरे ने बताया, "हमने कल कमर्शियल सिलेंडर भरवाने के लिए वाहन भेजा था, लेकिन पूरा दिन इंतजार करने के बाद भी हमें सप्लाई नहीं मिली। रेस्टोरेंट मालिक लगातार फोन करके पूछ रहे हैं कि सिलेंडर कब आएंगे, लेकिन हमारे पास अभी कोई स्पष्ट जवाब नहीं है।"

रेस्टोरेंट मालिकों का क्या कहना है

शहर भर के रेस्टोरेंट मालिकों का कहना है कि यह स्थिति उनके दैनिक कारोबार को प्रभावित करने लगी है। कोथरुड में स्नैक सेंटर के मालिक संतोष जाधव ने कहा, "हमारी रसोई पूरी तरह से 19 किलो के कमर्शियल सिलेंडरों पर चलती है। हमारे पास कुछ अतिरिक्त स्टॉक था, लेकिन वह केवल कुछ दिनों के लिए ही चलेगा। अगर जल्द ही नए सिलेंडर नहीं आए, तो हमें अस्थायी रूप से रसोई का संचालन बंद करना पड़ सकता है।"

पुणे रेस्टोरेंट एंड होटलियर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष गणेश शेट्टी ने चेतावनी दी है कि यदि सप्लाई जल्द सामान्य नहीं हुई तो स्थिति आतिथ्य क्षेत्र को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने बताया, "पुणे शहर में 10,000 से अधिक रेस्टोरेंट, स्नैक सेंटर और भोजनालय संचालित हैं। ये प्रतिष्ठान निवासियों के साथ-साथ हजारों छात्रों, कार्यालय जाने वालों और प्रवासी श्रमिकों को भी सेवा प्रदान करते हैं। लाखों लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस खाद्य व्यवसाय पर निर्भर हैं। अगर अगले चार-पांच दिनों में 19 किलो के कमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई में सुधार नहीं हुआ, तो कुछ रेस्टोरेंट को अस्थायी रूप से अपना संचालन स्थगित करना पड़ सकता है।"

नागरिकों से नहीं घबराने की अपील

हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि शहर में घरेलू एलपीजी की कोई कमी नहीं है। जिला सप्लाई अधिकारी महेश सुधालकर ने बताया कि केंद्र सरकार ने अंतरराष्ट्रीय स्थिति को देखते हुए तेल कंपनियों को निर्बाध घरेलू एलपीजी सप्लाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। गैस वितरकों ने भी नागरिकों से नहीं घबराने की अपील की है और कहा है कि शहर में घरेलू एलपीजी का स्टॉक पर्याप्त बना हुआ है। इस बीच, महाराष्ट्र नेचुरल गैस लिमिटेड ने कहा कि पाइप्ड नेचुरल गैस और कंप्रेस्ड नेचुरल गैस की सप्लाई पर्याप्त बनी हुई है।

आज क्या हैं एलपीजी सिलेंडर के रेट

दिल्ली में 19 किलो वाला एलपीजी सिलेंडर आज 1883 रुपये, कोलकाता में आज 1990 रुपये और मुंबई में कॉमर्शियल सिलेंडर 835 रुपये का मिल रहा है। जबकि, चेन्नई में कॉमर्शियल सिलेंडर 2043.50 रुपये का है। दूसरी ओर आज 14.2 किग्रा वाला घरेलू सिलेंडर दिल्ली में ₹913 में मिल रहा है। जबकि, मुंबई में ₹912.50, कोलकाता में यह 939 रुपये और चेन्नई में 928.50 रुपये का हो गया है।

इनपुट: पीटीआई

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