Nishant was going to Rajya Sabha but how did Nitish Kumar name come up Read the inside story निशांत के राज्यसभा जाने की थी चर्चा, फिर कैसे आया नीतीश कुमार का नाम? पढ़ें इनसाइड स्टोरी, India News in Hindi - Hindustan
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निशांत के राज्यसभा जाने की थी चर्चा, फिर कैसे आया नीतीश कुमार का नाम? पढ़ें इनसाइड स्टोरी

बीजेपी ने नीतीश कुमार को उनके पुराने राज्यसभा जाने के सपने की याद दिलाई और यह तर्क दिया कि अगर वे अभी यानी कि अप्रैल में नहीं जाते हैं, तो अगला मौका दो साल बाद ही मिलेगा।

Fri, 6 March 2026 09:06 AMHimanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान
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निशांत के राज्यसभा जाने की थी चर्चा, फिर कैसे आया नीतीश कुमार का नाम? पढ़ें इनसाइड स्टोरी

Nitish Kumar: बिहार की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से चल रही सुगगाहट का पटाक्षेप हो चुका है। दो दशकों से अधिक समय तक बिहार की सत्ता की कमान संभालने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब अपनी पारी समेटकर राज्यसभा की ओर रुख कर रहे हैं। हालांकि यह बदलाव अचानक लग सकता है, लेकिन बीजेपी और जेडीयू के गलियारों से छनकर आ रही खबरें बताती हैं कि इसकी पटकथा बेहद सलीके से पिछले एक महीने से लिखी जा रही थी।

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत लगभग एक महीने पहले नीतीश कुमार के बेटे निशांत को राजनीति में स्थापित करने की चर्चा से हुई थी। राजनीति से दूर रहने वाले निशांत हाल के दिनों में जेडीयू के कार्यक्रमों में सक्रिय दिखे हैं। पार्टी के भीतर एक बड़ा वर्ग उन्हें नीतीश कुमार के गिरते स्वास्थ्य के बीच पार्टी को एकजुट रखने वाली धुरी के रूप में देख रहा था।

शुरुआत में चर्चा यह थी कि निशांत को राज्यसभा भेजकर राजनीति की बारीकियां सिखाई जाएं। लेकिन बीजेपी के रणनीतिकारों, विशेषकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसे एक बड़े अवसर के रूप में देखा। शाह का मानना था कि नीतीश कुमार का स्वास्थ्य एक गंभीर चिंता है और उन्हें राज्यसभा भेजकर एक सम्मानजनक विदाई का रास्ता देना ही सबसे बेहतर विकल्प होगा।

अक्टूबर 2025 के विधानसभा चुनाव परिणामों में बीजेपी को 89 और जेडीयू को 85 सीटें मिली थीं। इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी उस रिपोर्ट में लिखा है, बीजेपी नेतृत्व को लगा कि यह नीतीश कुमार को पद छोड़ने के लिए मनाने का सबसे सही समय है। सूत्रों का कहना है कि बीजेपी नेताओं को डर था कि अगर समय बीत गया तो जेडीयू जमीन पर फिर से मजबूत हो जाएगी और तब मुख्यमंत्री की कुर्सी खाली करवाना मुश्किल होगा। बीजेपी सितंबर 2026 तक का इंतजार करने के पक्ष में नहीं थी, क्योंकि तब तक जेडीयू अपने कोटे के मंत्रियों की संख्या बढ़ाकर और मजबूत हो सकती थी।

अमित शाह की रणनीति और तीन दूत

इस पूरे ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए अमित शाह ने जेडीयू के तीन दिग्गज नेताओं ललन सिंह, संजय झा और विजय कुमार चौधरी के साथ कई दौर की बैठकें कीं। विजय कुमार चौधरी ने ही अंततः नीतीश कुमार के सामने इस प्रस्ताव को रखने की कमान संभाली। फरवरी के आखिरी हफ्ते से इन नेताओं की नीतीश कुमार के साथ लगातार बैठकें शुरू हुईं।

बीजेपी ने नीतीश कुमार को उनके पुराने राज्यसभा जाने के सपने की याद दिलाई और यह तर्क दिया कि अगर वे अभी यानी कि अप्रैल में नहीं जाते हैं, तो अगला मौका दो साल बाद ही मिलेगा।

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नीतीश कुमार के परिवार को इस पूरे घटनाक्रम की भनक 3 मार्च को लगी, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। 4 मार्च को जेडीयू के सबसे वरिष्ठ मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने आखिरी कोशिश के तौर पर नीतीश कुमार से मुलाकात की और उनसे फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया। लेकिन राजनीतिक चक्रव्यूह रचा जा चुका था और नीतीश कुमार ने राज्यसभा के नामांकन पत्रों पर हस्ताक्षर कर दिए थे।

समझौते के तहत निशांत अब दिल्ली के बजाय बिहार की राजनीति से अपनी पारी शुरू करेंगे। नीतीश कुमार का यह जाना बिहार की राजनीति में एक युग का अंत है। जो नेता कभी 'सुशासन बाबू' के नाम से जाना जाता था, उसने अपने बेटे के राजनीतिक भविष्य और स्वास्थ्य कारणों के चलते सीएम पद को अलविदा कह दिया है।

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