भारत की सीमा पर 'ड्रोन वॉरफेयर' की साजिश! ऐसे NIA के जाल में फंसे 7 विदेशी, क्या बोले US-यूक्रेन?
NIA ने भारत के खिलाफ आतंकी साजिश रचने के आरोप में 6 यूक्रेनी और 1 अमेरिकी नागरिक को गिरफ्तार किया है। ये मिजोरम के रास्ते म्यांमार में विद्रोहियों को ड्रोन और हथियारों की ट्रेनिंग दे रहे थे। जानिए इस इंटरनेशनल साजिश की पूरी खबर।

भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए सात विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है, जिनमें छह यूक्रेन के और एक अमेरिका का नागरिक है। इन पर भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों की साजिश रचने का गंभीर आरोप है। गिरफ्तार किए गए इन विदेशी नागरिकों पर
मिजोरम के प्रतिबंधित इलाकों में अवैध रूप से प्रवेश करने, बिना वैध परमिट के म्यांमार की सीमा पार करने, म्यांमार के जातीय सशस्त्र समूहों को ट्रेनिंग देने और विद्रोहियों से जुड़े नेटवर्क को अवैध तरीके से ड्रोन की खेप पहुंचाने के आरोप लगे हैं।
कौन हैं ये 7 विदेशी नागरिक?
नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने एक अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वैनडाइक को छह यूक्रेनी नागरिकों के साथ गिरफ्तार किया है। यह ऑपरेशन बिल्कुल किसी फिल्मी सीन जैसा था। ये गिरफ्तारियां तीन हवाई अड्डों पर की गईं। अमेरिकी नागरिक वैनडाइक को कोलकाता एयरपोर्ट से पकड़ा। वहीं लखनऊ और दिल्ली एयरपोर्ट से तीन-तीन यूक्रेनी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार किए गए यूक्रेनी नागरिकों की पहचान इस प्रकार है: पेट्रो हुर्बा, तारास स्लीवियाक, इवान सुकमानोव्स्की, मारियन स्टेफ़ानकिव, मैक्सिम होनचारुक और विक्टर कामिंस्की।
सभी सातों आरोपियों को दिल्ली लाकर शनिवार को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जहां से उन्हें 3 दिन की रिमांड पर भेजा गया था। सोमवार को उनकी हिरासत अवधि 27 मार्च तक (11 और दिनों के लिए) बढ़ा दी गई है। इन सभी को मुख्य रूप से गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की धारा 18 (आतंकवादी साजिश का हिस्सा होने के लिए सजा) और अन्य संबंधित धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया है।
गिरफ्तारी पर क्या बोले अमेरिका और यूक्रेन?
भारत में अमेरिकी दूतावास ने इस मामले पर कहा है कि वे स्थिति से अवगत हैं, लेकिन प्राइवेसी कारणों का हवाला देते हुए अमेरिकी नागरिक से जुड़े मामले पर कोई भी विस्तृत टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। यूक्रेन के विदेश मंत्रालय ने अपने छह नागरिकों की गिरफ्तारी की पुष्टि की है। यूक्रेनी राजनयिक मिशन ने बयान जारी कर बताया कि वे हिरासत में लिए गए नागरिकों के परिजनों के लगातार संपर्क में हैं और स्थिति पर विशेष नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय अधिकारी इस मामले में अपनी जांच कर रहे हैं।
साजिश का तरीका: NIA की FIR के खुलासे
6 यूक्रेनी नागरिक अपने देश के 14 लोगों के एक बड़े समूह का हिस्सा थे। ये सभी टूरिस्ट वीजा पर अलग-अलग तारीखों में भारत आए और गुवाहाटी पहुंचे। गुवाहाटी से ये लोग बिना अनिवार्य दस्तावेज- 'प्रतिबंधित क्षेत्र परमिट' (RAP) या 'संरक्षित क्षेत्र परमिट' (PAP) के मिजोरम चले गए। अमेरिकी नागरिक इस समूह में कब और कहां जुड़ा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
म्यांमार में ट्रेनिंग और ड्रोन सप्लाई
इन्होंने अवैध रूप से म्यांमार की सीमा पार की ताकि वहां के जातीय सशस्त्र समूहों को ट्रेनिंग दी जा सके। NIA के मुताबिक, ये समूह म्यांमार के सैन्य शासन को निशाना बनाने के लिए भारत में सक्रिय विद्रोही संगठनों का भी समर्थन करते हैं। आरोपियों ने उन्हें ड्रोन युद्ध, असेंबली और जैमिंग तकनीक का प्रशिक्षण दिया। जांच के अनुसार, आरोपियों ने यूरोप से मंगाए गए ड्रोन की कई खेप मिजोरम के जरिए म्यांमार भेजी हैं।
पूछताछ में हुए अहम खुलासे
NIA ने कोर्ट को बताया कि आरोपियों ने पूछताछ में कई बातें कबूली हैं। वे AK47 राइफल लेकर चलने वाले 'अज्ञात आतंकवादियों' के सीधे संपर्क में थे और उनकी अवैध गतिविधियों में मदद कर रहे थे। उन्होंने बिना जरूरी कागजातों के मिजोरम यात्रा करने और म्यांमार में घुसने की बात स्वीकार की है। उन्होंने म्यांमार के सशस्त्र गुटों के लिए एक से ज्यादा बार ट्रेनिंग कैंप लगाए और यूरोप से भारी मात्रा में ड्रोन अवैध रूप से मंगाकर उन्हें दिए। NIA का दावा है कि ये समूह भारत के कुछ प्रतिबंधित विद्रोही गुटों को भी हथियार और हार्डवेयर सप्लाई करके समर्थन दे रहे थे।
रिमांड की वजह
NIA का कहना है कि पूरी साजिश का पर्दाफाश करने, घुसपैठ के रास्तों का पता लगाने और उनके फरार अज्ञात साथियों को पकड़ने के लिए उन्हें और पूछताछ की जरूरत है। आरोपियों के जब्त किए गए मोबाइल फोन 'CERT-IN' (इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम) को भेजे गए हैं ताकि सोशल मीडिया और डेटा का विश्लेषण करके मुख्य साजिशकर्ता और फंडिंग (पैसे कहां से आ रहे थे) का पता लगाया जा सके।




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