न अमेरिका को फायदा, न ईरान को; शशि थरूर बोले- अब जंग खत्म होनी चाहिए
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि वे लगातार सार्वजनिक रूप से केंद्र सरकार से इस युद्ध को समाप्त करने के लिए पहल करने की मांग कर रहे हैं।

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि वे लगातार सार्वजनिक रूप से केंद्र सरकार से इस युद्ध को समाप्त करने के लिए पहल करने की मांग कर रहे हैं। थरूर ने अपने बयान में कहा कि मुझे लगता है कि अब दोनों पक्ष ऐसे मुकाम पर पहुंच चुके हैं जहां वे किसी का भी भला नहीं कर रहे। अमेरिकी पक्ष का दावा है कि उन्होंने अपने सभी लक्ष्य हासिल कर लिए हैं, जबकि ईरान ने अपने शासन और अस्तित्व को बचाने में कामयाबी हासिल कर ली है। मेरे विचार से इतना ही काफी होना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि इस संघर्ष से पूरी दुनिया प्रभावित हो रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते तेल और गैस की आपूर्ति में गंभीर बाधाएं आ रही हैं। थरूर ने जोर देकर कहा कि पूरे क्षेत्र को इस विशेष संघर्ष का बंधक नहीं बनाया जाना चाहिए। मुझे लगता है कि इस युद्ध को तत्काल समाप्त किया जाना चाहिए, क्योंकि हम सभी इससे पीड़ित हैं। थरूर ने वैश्विक स्तर पर शांति बहाली की अपील करते हुए भारत से भी इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने की वकालत की है।
दूसरी ओर संसद की विदेश मामलों की समिति ने कहा है कि 'हाल के घटनाक्रम' से भारत के लिए महत्वपूर्ण और रणनीतिक महत्व वाले चाबहार बंदरगाह के भविष्य पर संकट के बादल छा गए हैं। हालांकि, समिति ने इस बात का स्वागत किया कि केंद्र इन घटनाक्रमों के प्रभावों को दूर करने के लिए सभी संबंधित पक्षों के 'संपर्क में' है। विदेश मंत्रालय की अनुदान मांगों (2026-27) पर विदेश मामलों की समिति की 12वीं रिपोर्ट मंगलवार को संसद में प्रस्तुत की गई।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर विदेश मामलों की समिति के अध्यक्ष हैं। समिति की यह टिप्पणी काफी मायने रखती है क्योंकि यह पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और चाबहार परियोजना में भारत की भागीदारी पर अमेरिकी प्रतिबंधों या 'टैरिफ' नीतियों में हाल ही में हुए बदलावों की पृष्ठभूमि में आई है। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘समिति ने पाया कि चाबहार बंदरगाह के विकास के लिए वर्ष 2025-26 के बजट अनुमान में 100 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, जिसे संशोधित अनुमान में बढ़ाकर 400 करोड़ रुपये कर दिया गया था। जनवरी 2026 तक आवंटित राशि का पूरी तरह से उपयोग हो चुका था।’
विदेश मंत्रालय ने समिति को बताया कि 2026-27 के दौरान इस मद के तहत कोई राशि आवंटित नहीं की गई है क्योंकि भारत ने 2024 में हस्ताक्षरित मुख्य अनुबंध के अनुसार बंदरगाह उपकरणों की खरीद के लिए 12 करोड़ अमेरिकी डॉलर के योगदान की अपनी प्रतिबद्धता पहले ही पूरी कर ली है। रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल के घटनाक्रम से चाबहार बंदरगाह के भविष्य पर संकट के बादल छा गए हैं।''
समिति का मानना है कि चाबहार, भारत के लिए एक ''महत्वपूर्ण और रणनीतिक महत्व का बंदरगाह'' है, क्योंकि यह अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच प्रदान करता है। यह अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा से जुड़ने के लिए भी एक महत्वपूर्ण बंदरगाह है।
समिति ने कहा कि वह इस बात का स्वागत करती है कि भारत सरकार इन घटनाक्रमों के प्रभावों को दूर करने के लिए सभी संबंधित पक्षों के साथ निरंतर संपर्क में है। रिपोर्ट के अनुसार, समिति चाहती है कि मंत्रालय इस संबंध में सभी योजनाओं और प्रगति की जानकारी समिति को देते रहे।
गौरतलब है कि सरकार ने पांच फरवरी को संसद को बताया था कि वह चाबहार परियोजना में भारत की भागीदारी पर अमेरिकी प्रतिबंधों या टैरिफ नीतियों में हाल में हुए बदलावों के प्रभावों को दूर करने के लिए सभी संबंधित पक्षों के 'संपर्क में' है।




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