'एक देश, एक नेता, एक पार्टी' की होड़ में बीजेपी, लोकतांत्रिक संस्थाओं पर हो रहा हमला: ममता बनर्जी
ममता बनर्जी ने कहा कि वर्षों से बंगाल के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियां, राष्ट्रीय आयोग, गोदी मीडिया और न्यायपालिका का एक हिस्सा छोड़ा गया है। यह सब राजनीतिक उद्देश्यों से किया जा रहा है और लोकतंत्र की संस्थाओं का दुरुपयोग हो रहा है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बीजेपी पर 'एक राष्ट्र, एक नेता, एक पार्टी' की होड़ में लोकतांत्रिक संस्थाओं पर हमला करने का इल्जाम लगाया। बनर्जी ने कहा कि आज जो कुछ देखने को मिल रहा है, वह अभूतपूर्व, अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और गणतंत्र की लोकतांत्रिक नींव पर सीधा हमला है। उनके अनुसार, बीजेपी ने अपनी जन-विरोधी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए हर लोकतांत्रिक संस्था और संवैधानिक पद को हथियार बना लिया है।
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीय एजेंसियां, राष्ट्रीय आयोग और मीडिया का एक हिस्सा बंगाल सरकार को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने 'वैनिश कमीशन' का जिक्र करते हुए कहा कि इसका दुरुपयोग वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से मिटाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्षों से बंगाल के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियां, राष्ट्रीय आयोग, गोदी मीडिया और न्यायपालिका का एक हिस्सा छोड़ा गया है। उनका दावा है कि यह सब राजनीतिक उद्देश्यों से किया जा रहा है और लोकतंत्र की संस्थाओं का दुरुपयोग हो रहा है।
संविधान बदलने का लगाया आरोप
मुख्यमंत्री ने और भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बीजेपी बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर की ओर से बनाए गए संविधान को अपनी पार्टी के घोषणापत्र से बदलना चाहती है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'यह वही है जो वे चाहते हैं। वे बाबासाहेब आंबेडकर के संविधान को अपनी पार्टी के मेनिफेस्टो से बदलना चाहते हैं। मैं इसके लिए नहीं तैयार हूं और ना ही होऊंगी।' उन्होंने निशाना साधते हुए कहा कि बीजेपी की एकमात्र प्राथमिकता सत्ता है, जबकि उनकी प्राथमिकता हमेशा जनता रही है। ये दिल्ली के जमींदार बंगाल को कभी अधीन नहीं कर पाएंगे।
ममता बनर्जी ने बंगाल के ऐतिहासिक योगदान का जिक्र करते हुए आत्मविश्वास जताया कि जिस तरह बंगाल ने औपनिवेशिक शासन की जंजीरें तोड़ी थीं, उसी तरह अब बीजेपी के पतन का रास्ता भी बंगाल ही दिखाएगा। उन्होंने धर्मतला धरने को बंगाल-विरोधी एजेंडे के खिलाफ जवाब बताया, जो लोगों को अपमानित, डराने-धमकाने और सताने की कोशिश कर रहा है। यह विवाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दार्जिलिंग दौरे पर हुए विवाद के बीच उभरा है, जहां उनकी अनुपस्थिति और आयोजन पर सवाल उठे थे।




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