केरल के बाद पश्चिम बंगाल का भी बदलेगा नाम? ममता बनर्जी ने केंद्र पर निशाना साधते हुए क्या कहा
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बीजेपी पर तीखा हमला करते हुए इसे बांग्ला विरोधी करार दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर आरोप लगाया कि वे बंगाल की धरोहर, भाषा, संस्कृति और आइकॉन्स का कोई सम्मान नहीं करते।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर राज्य का नाम बदलकर बांग्ला करने की मांग दोहराई है। केरल राज्य के नाम को केरलम करने के केंद्रीय मंत्रिमंडल के फैसले पर बधाई देते हुए उन्होंने केंद्र सरकार से सवाल किया। ममता ने पूछा कि बंगाल के प्रस्ताव को वर्षों से क्यों लंबित रखा जा रहा है? यह बयान मंगलवार को कोलकाता से आया, जहां तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने एक्स पर इसकी जानकारी साझा की। ममता ने कहा कि राज्य विधानसभा ने 2018 में ही इस नाम पर सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया था और कई बार केंद्र को भेजा गया है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने इसे बंगाल की सांस्कृतिक पहचान और भाषा से जुड़ा वैध मुद्दा बताया।
ममता बनर्जी ने बीजेपी पर तीखा हमला करते हुए इसे बांग्ला विरोधी करार दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर आरोप लगाया कि वे बंगाल की धरोहर, भाषा, संस्कृति और आइकॉन्स का कोई सम्मान नहीं करते। टीएमसी के बयान में कहा गया कि चुनाव के मौसम में मोदी और शाह बंगाल आकर नकली आंसू बहाते हैं और संस्कृति से प्यार दिखाने का नाटक करते हैं, लेकिन असल में उनकी कोई चिंता नहीं है। ममता ने इसे राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित भेदभाव बताया और कहा कि बंगाल की वैध मांग को सिर्फ इसलिए ठुकराया जा रहा है क्योंकि राज्य बीजेपी के सामने नहीं झुकता।
बंगाल के साथ भेदभाव का आरोप
टीएमसी चीफ ने अन्य राज्यों की पहचान की पुष्टि पर खुशी जताई, लेकिन बंगाल के साथ भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह मांग ऐसे समय में उठी है जब पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। टीएमसी एक बार फिर बड़ी जीत की उम्मीद कर रही है, जबकि बीजेपी सत्ता हासिल करने की कोशिश में जुटी है। ममता बनर्जी की सरकार 2011 से सत्ता में है और नाम बदलने का प्रस्ताव लंबे समय से केंद्र के पास लंबित है।
बांग्ला नाम को इतिहास से जोड़ा
ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया कि बांग्ला नाम राज्य की इतिहास, संस्कृति और जनता की आकांक्षाओं को बेहतर ढंग से दर्शाता है। 1947 में बंगाल के विभाजन के बाद वेस्ट बंगाल नाम पड़ा था, लेकिन अब पूर्वी हिस्सा बांग्लादेश बन चुका है, इसलिए वेस्ट का कोई मतलब नहीं रह गया है। ममता ने केंद्र से अपील की कि बंगाल की 10 करोड़ जनता की इच्छा का सम्मान किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य की पहचान मजबूत करने वाले कदम का स्वागत है, लेकिन राजनीतिक कारणों से भेदभाव नहीं चल सकता। यह मुद्दा बंगाल की क्षेत्रीय अस्मिता और केंद्र के साथ तनाव को फिर उजागर करता है।




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