फैसले लेने वालीं ममता बनर्जी देंगी दलीलें, बंगाल हार के बाद काला कोट पहन पहुंचीं हाईकोर्ट
बंगाल में भाजपा की जीत के बाद ममता बनर्जी सार्वजनिक मंचों पर कम ही नजर आई हैं। दूसरी तरफ टीएमसी खेमे में भी सन्नाटा पसरा हुआ है। इस बीच ममता खुद हाईकोर्ट में पहुंचीं।

बीते फरवरी महीने में SIR मामले में खुद दलील देने पहुंचीं ममता बनर्जी एक बार फिर वकील बनकर कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंचीं। गुरुवार को पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी को हाईकोर्ट के सामने वकील के काले गाउन में देखा गया, जो चर्चा का विषय बन गया। कोर्ट परिसर का उनका एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है। यहां ममता बनर्जी विधानसभा चुनाव में TMC की हार के बाद राज्य में हुई चुनावी हिंसा के मामले में खुद अदालत के सामने दलीलें पेश करेंगी।
बता दें कि ममता बनर्जी एक लॉ ग्रेजुएट हैं। इस बार वे टीएमसी नेता कल्याण बनर्जी के बेटे शीर्षण्य बंद्योपाध्याय द्वारा दायर एक मामले में अदालत में पैरवी करेंगी। इस याचिका में आरोप लगाए गए हैं कि राज्य में भाजपा की जीत के बाद पार्टी के दफ्तरों और कई कार्यकर्ताओं पर हमले हुए। इन हमलों के कई लोग मारे भी गए थे। याचिकाकर्ता के अनुसार चुनाव के बाद कई तृणमूल नेताओं और कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर अपना घर छोड़ने के लिए भी मजबूर किया गया। कलकत्ता HC में यह याचिका 12 मई को दायर की गई थी और यह और इस पर मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल और न्यायमूर्ति पार्थसारथी सेन की पीठ सुनवाई करेगी।
इससे पहले भी वकील बनीं थी ममता
ममता बनर्जी इससे पहले इस साल फरवरी में काले गाउन में सुप्रीम कोर्ट पहुंची थीं। यहां उन्होंने SIR के एक मामले में दलीलें दी थीं। तब ममता बनर्जी ने चुनावों से पहले SIR की प्रकिया पर सवाल उठाए थे और कहा था कि यह प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है। ममता बनर्जी का यह कदम ऐतिहासिक था क्योंकि यह पहली बार हुआ जब कोई मौजूदा मुख्यमंत्री वकील की हैसियत से सुप्रीम कोर्ट में दलील देने पहुंचा था।
ममता जैसा कोई नहीं: टीएमसी
ममता बनर्जी के इस कदम को पार्टी ने उत्साह बढ़ाने वाला बताया है। टीएमसी ने ममता बनर्जी का काले गाउन वाला वीडियो शेयर कर कहा है कि मुश्किल वक्त में वो बंगाल के लोगों का हाथ नहीं छोड़ती। टीएमसी ने लिखा, “हमारी माननीय अध्यक्ष ममता बनर्जी आज खुद कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंचीं और बंगाल में चुनाव के बाद हुई हिंसा के मामले में दलील पेश की। एक बार फिर उन्होंने दिखा दिया कि उन्हें क्या दूसरों से अलग बनाता है। वह बंगाल के लोगों को मुश्किल वक्त में कभी नहीं छोड़तीं। वह सच, न्याय और संवैधानिक मूल्यों के लिए लड़ना कभी बंद नहीं करतीं। और हर बार नफरत की राजनीति से ऊपर उठकर करुणा, साहस और दृढ़ता का परिचय देती हैं। चाहे SIR के कथित अन्याय का सामना करना हो या भाजपा के व्यवहार के खिलाफ मजबूती से खड़ा होना, वो बार-बार साबित करती हैं कि आज देश में उनके जैसा नेता कोई नहीं है।”




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