2021 में थी कांटे की टक्कर, इस बार बड़ी हार; ममता बनर्जी पर फिर भारी पड़े शुभेंदु अधिकारी
इस बार शुभेंदु अधिकारी टीएमसी के गढ़ माने जाने वाले भवानीपुर में सेंध लगाने में कामयाब हो गए हैं, जबकि 2021 के चुनाव में नंदीग्राम का किला ढहा दिया था। एक तरह से सुवेंदु ने सिटिंग सीएम को फिर से हराकर 'इतिहास को दोहराया' है।

बंगाल की सिटिंग सीएम और टीएमसी चीफ ममता बनर्जी को भाजपा के शुभेंदु अधिकारी ने एक बार फिर चुनावी मैदान में चारों खाने चित कर दिया है। इस बार मुकाबला भवानीपुर में हुआ, जिसे तृणमूल कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को 15105 वोटों बड़े अंतर से हराया है। जबकि 2021 के चुनाव में कांटे की टक्कर देखने को मिली थी। तब नंदीग्राम के रण में ममता 1956 वोटों से हारीं थीं। इस तरह शुभेंदु ने सिटिंग सीएम को फिर से हराकर ‘इतिहास दोहराया’ है।
2021 के चुनाव में दिखा था कांटे का मुकाबला
अगर 2021 के नंदीग्राम चुनाव पर नजर डालें, तो वह मुकाबला बेहद कांटे का रहा था। उस समय सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को सिर्फ 1,956 वोटों के मामूली अंतर से हराया था। भाजपा उम्मीदवार को 1,10,764 वोट मिले थे, जबकि ममता बनर्जी 1,08,808 वोटों पर रह गई थीं। नंदीग्राम में मतगणना के दौरान कई बार रुझान बदले और आखिरी राउंड तक सस्पेंस बना रहा। यहां तक कि एक समय ममता की जीत की खबरें भी सामने आई थीं, लेकिन अंतिम गिनती में परिणाम पलट गया और सुवेंदु विजेता घोषित हुए।
ममता ने हार को स्वीकारने से किया था इंकार, पहुंचीं कोर्ट
साल 2021 की हार ममता बनर्जी के लिए बड़ा झटका थी, क्योंकि उन्होंने अपनी पारंपरिक सीट छोड़कर नंदीग्राम को प्रतिष्ठा की लड़ाई बनाया था। नंदीग्राम की हार के बाद ममता बनर्जी ने परिणाम पर सवाल उठाए और वोटों की गिनती में गड़बड़ी के आरोप लगाए थे। उन्होंने इस नतीजे को चुनौती देते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख किया। हालांकि राज्य स्तर पर तृणमूल कांग्रेस ने बहुमत हासिल कर सरकार बना ली, लेकिन नंदीग्राम सीट का परिणाम लंबे समय तक राजनीतिक और कानूनी विवाद का विषय बना रहा।
इस बार बड़े अंतर से ममता को हराया
सोमवार 4 मई को बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने आए, तो सारी स्थिति साफ हो गई। शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर में 73,917 वोट हासिल किए, जबकि ममता बनर्जी 58,812 वोटों पर सिमट गईं। इस तरह भाजपा नेता ने 15,105 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। हालांकि शुरुआत में ममता बनर्जी ने बढ़त बनाई हुई थी, लेकिन जैसे-जैसे वोटों की गिनती हुई, रुझान बदलते चले गए। आखिरी में शुभेंदु अधिकारी ने 15 सालों से मुख्यमंत्री का पद संभाल रहीं ममता बनर्जी को हरा दिया।
शुभेंदु का दावा सही साबित हुआ…
यह मुकाबला इसलिए भी खास था, क्योंकि शुभेंदु अधिकारी ने पहले ही दावा किया था कि शुरुआती गिनती में ममता बनर्जी आगे रहेंगी, लेकिन बाद के चरणों में वे बढ़त हासिल कर लेंगे। चुनाव परिणामों ने उनके इस दावे को सही साबित किया। भवानीपुर को तृणमूल कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है, वहां भाजपा की यह जीत राज्य की राजनीति में बड़ा संकेत मानी जा रही है।
TMC के ‘पोस्टर बॉय’ रहे शुभेंदु से हारीं ममता
दूसरी खास बात यह है कि शुभेंदु अधिकारी एक समय पर टीएमसी के 'पोस्टर बॉय' हुआ करते थे। वे नंदीग्राम में ममता बनर्जी के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन का प्रमुख चेहरा भी रहे हैं। लेकिन आज स्थिति यह है कि अपने ही सबसे बड़े विरोधी बन गए हैं। जो राजनीति में न केवल हरा रहे हैं, बल्कि दशकों में तैयार की गई जमीन को बुरी तरह ध्वस्त कर रहे हैं।
जबरदस्त जीत पर क्या बोले शुभेंदु?
बंगाल में मिले जनादेश पर शुभेंदु अधिकारी ने प्रतिक्रिया देते हुए लिखा- "मैं नंदीग्राम और भवानीपुर के बहादुर और हिम्मत वाले लोगों का हमेशा शुक्रगुजार रहूँगा। इन दोनों चुनाव क्षेत्रों की मेरी बहनों और भाइयों, मुझ पर अटूट भरोसा रखने और मुझे अपनी आवाज़ के तौर पर चुनने के लिए आपका धन्यवाद।"
भाजपा के लिए ये जीत ऐतिहासिक क्यों?
चश्में को बड़ा करके देखें तो केवल यही सीट नहीं, भाजपा ने पूरे बंगाल में जबरदस्त प्रदर्शन किया है। भाजपा ने दो तिहायी से अधिक बहुमत के साथ 206 सीटों पर जीत दर्ज की है। जबकि सत्ता पर काबिज तृणमूल कांग्रेस 81 सीट पर सिमट गयी है। इन नतीजों ने राज्य की सियासी तस्वीर को पूरी तरह बदल दिया है और भाजपा के लिए यह ऐतिहासिक जीत मानी जा रही है, क्योंकि वर्ष 2021 के चुनावों में तृणमूल ने 213 तथा भाजपा ने 77 सीटें जीती थीं।
कांग्रेस और माकपा खाता खोलने में हुए कामयाब
अन्य दलों की बात करें तो कांग्रेस और आम जनता उन्नयन पार्टी ( ए जे यू पी ) ने दो-दो और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने एक सीट जीती है। कांग्रेस तथा मकपा का पिछले चुनाव में खाता भी नहीं खुला था। आपको बताते चलें पश्चिम बंगाल में 294 में से 293 के नतीजे आये हैं। फाल्टा विधानसभा पर 21 मई को दोबारा चुनाव कराया जायेगा।




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