TMC में बड़ी उथल पुथल के आसार, ममता बनर्जी को हटाने की मांग; बड़े नेता ने खोला मोर्चा
पूर्व राज्यसभा सदस्य और तृणमूल कांग्रेस नेता शांतनु सेन ने गुरुवार को पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से इस्तीफा दे दिया। इससे पहले सांसद काकोली घोष दस्तीदार सभी पदों से इस्तीफा दे चुकी हैं। टीएमसी में उथल-पुथल का दौर जारी है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद अब तृणमूल कांग्रेस या TMC में हालात और विकट होने के आसार हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता सुप्रीमो ममता बनर्जी के खिलाफ खुलकर बोलने लगे हैं और उन्हें हटाए जाने की मांग की जा रही है। ये मांग ऐसे समय पर उठ रही है, जब टीएमसी पार्षदों से लेकर सांसद स्तर तक नेताओं की नाराजगी से जूझ रही है। हाल ही में सांसद काकोली घोष दस्तीदार समेत कई बड़े नेताओं ने पदों से इस्तीफे दे दिए हैं।
ममता बनर्जी के 4 दशक पुराने राजनीतिक साथी माने जाने वाले पार्षद तारक सिंह नाराज चल रहे हैं। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने पार्टी के नेतृत्व में बदलाव की मांग कर दी है। साथ ही लोकसभा सांसद और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक के खिलाफ भी जमकर नाराजगी जाहिर की है। हालांकि, इसे लेकर पार्टी नेतृत्व की तरफ से प्रतिक्रिया नहीं आई है।
क्या बोले तारक सिंह
एबीपी आनंद से बातचीत में सिंह से पूछा गया कि वह क्या बदलना चाहते हैं। इसपर उन्होंने जवाब दिया, 'जो नेतृत्व कर रहे हैं, मैं उन्हें बदलना चाहता हूं।' दूसरा सवाल किया गया कि क्या वह ममता बनर्जी के बारे में बात कर रहे हैं। उन्होंने जवाब दिया, 'हां, बिल्कुल। मैं यह ऑन रिकॉर्ड कह रहा हूं। मैं डरता हूं क्या। जो नेतृत्व फेल हो गया है, जो नेतृत्व कार्यकर्ताओं के साथ नहीं रह सकता है, वो क्या करेगा।'
उन्होंने कहा, 'ज्यादा से ज्यादा वो क्या कर सकते हैं। मुझे पार्टी से निकाल सकते हैं। तो निकाल दें। मुझे फर्क नहीं पड़ता।' अभिषेक बनर्जी को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा, 'मुझे उनके बारे में कुछ नहीं कहना है। मुझे इसलिए कुछ नहीं कहना, क्योंकि मैं उस व्यक्ति के खिलाफ हूं जिसने अभिषेक को बनाया है।'
शांतनु सेन भी भड़के
पूर्व राज्यसभा सदस्य और तृणमूल कांग्रेस नेता शांतनु सेन ने गुरुवार को पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से इस्तीफा दे दिया। पत्र में सेन ने कहा कि तृणमूल की स्थापना के बाद से एक 'वफादार सिपाही' होने के बावजूद पार्टी से जुड़े विवादों का सार्वजनिक रूप से बचाव करना अब उन्हें नैतिक रूप से ठीक नहीं लगता। उन्होंने लिखा, 'कई मुश्किल परिस्थितियों में जब मेरी अंतरात्मा भी सहमत नहीं थी। तब भी मैंने टेलीविजन पर बहस और मीडिया मंचों पर सार्वजनिक रूप से पार्टी का पक्ष रखा और इसके लिए मुझे आम लोगों की आलोचना का सामना करना पड़ा।'
उन्होंने कहा, 'लेकिन अब जब आरजी कर घटना, नौकरी घोटाले और विभिन्न अनैतिक कार्यों व भ्रष्टाचार के कारण लोगों ने हमें नकार दिया है, तो मेरी अंतरात्मा मुझे प्रवक्ता के रूप में इन बातों का समर्थन करने की अनुमति नहीं देती।'




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