Mamata Banerjee holds hurried meeting amid MLAs rebellion takes five major decisions विधायकों की बगावत के बीच ममता बनर्जी की आनन-फानन में बैठक, लिए 5 बड़े फैसले, India News in Hindi - Hindustan
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विधायकों की बगावत के बीच ममता बनर्जी की आनन-फानन में बैठक, लिए 5 बड़े फैसले

पार्टी सूत्रों ने बताया कि ममता बनर्जी ने पिछले दो दिनों में हावड़ा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर के कई विधायकों से बात की है, जिनमें से कई को रीताब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी खेमे की बैठकों में भाग लेते देखा गया था। 

Fri, 5 June 2026 07:35 PMNiteesh Kumar लाइव हिन्दुस्तान
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विधायकों की बगावत के बीच ममता बनर्जी की आनन-फानन में बैठक, लिए 5 बड़े फैसले

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने पार्टी के 28 साल के इतिहास में पहली बार हुए विभाजन के बाद पार्टी से और अधिक विधायकों के पाला बदलने को रोकने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। वह व्यक्तिगत रूप से बागी विधायकों से संपर्क साध रही हैं, जबकि वरिष्ठ नेता अन्य विधायकों को एकजुट रखने के लिए काम कर रहे हैं। इस बीच, शुक्रवार को पार्टी की राष्ट्रीय कार्य समिति की बैठक हुई। टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने इसमें लिए गए फैसलों की जानकारी दी।

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विधायकों की बगावत के बीच ममता बनर्जी की आनन-फानन में बुलाई गई बैठक में पांच बड़े फैसले लिए गए...

1. अभिषेक बनर्जी TMC के राष्ट्रीय महासचिव हैं, उनकी सहायता के लिए डेरेक ओ ब्रायन और डोला सेन को राष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त सचिव बनाया जाएगा।

2. विभिन्न राज्यों में राज्य स्तर से सुझाव मिलने के बाद वहां कमेटियां गठित की जाएंगी।

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3. टीएमसी के पश्चिम बंगाल अध्यक्ष सुब्रत बक्शी बीमार हैं। इसलिए चंद्रिमा भट्टाचार्य उन्हें रिप्लेस करेंगी। सजदा अहमद, नयना बंद्योपाध्याय और कुछ अन्य उपाध्यक्ष होंगे।

4. सायोनी घोष युवा टीएमसी की अध्यक्ष, माला रॉय अखिल भारतीय तृणमूल महिला कांग्रेस की अध्यक्ष और प्रियंका अधिकारी टीएमसी छात्र विंग की अध्यक्ष हैं।

5. डेरेक ओ ब्रायन और कल्याण बनर्जी राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं, जबकि कुणाल घोष राज्य प्रवक्ता हैं।

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पार्टी सूत्रों ने बताया कि ममता बनर्जी ने पिछले दो दिनों में हावड़ा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर के कई विधायकों से बात की है, जिनमें से कई को रीताब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी खेमे की बैठकों में भाग लेते देखा गया था। तृणमूल के 58 विधायकों ने पार्टी विधायक दल पर नियंत्रण कर लिया और निष्कासित विधायक रीताब्रता बनर्जी को विपक्ष का नेता चुना।

पार्टी को एकजुट रखने के प्रयास ऐसे समय में किए जा रहे हैं, जब तृणमूल की संस्थापक खुद को एक ऐसी असहज स्थिति में पाती हैं, जहां उन्हें उन नेताओं को बनाए रखने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, जिन्हें उन्होंने कभी खुद चुना था और राजनीतिक रूप से मजबूत किया था।