Mamata Banerjee Big Setback Only 6 MPs and 8 MLA Reached in Meeting ममता बनर्जी को बड़ा झटका, बैठक में पहुंचे सिर्फ छह सांसद; विधायक हुए और कम, India News in Hindi - Hindustan
More

ममता बनर्जी को बड़ा झटका, बैठक में पहुंचे सिर्फ छह सांसद; विधायक हुए और कम

ममता बनर्जी द्वारा बुलाई गई विधायकों और सांसदों की बैठक में सिर्फ आठ विधायक और छह सांसद ही पहुंचे। पिछली बार की विधायकों की बैठक में सिर्फ 20 विधायक पहुंचे थे।

Fri, 5 June 2026 07:07 PMMadan Tiwari लाइव हिन्दुस्तान, कोलकाता
share
ममता बनर्जी को बड़ा झटका, बैठक में पहुंचे सिर्फ छह सांसद; विधायक हुए और कम

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी को एक के बाद एक झटके लग रहे हैं। शुक्रवार को बुलाई गई विधायकों और सांसदों की बैठक में सिर्फ आठ विधायक और छह सांसद ही पहुंचे। पिछली बार की विधायकों की बैठक में सिर्फ 20 विधायक पहुंचे थे। इस बार यह आंकड़ा और कम हो गया है। उल्लेखनीय है कि टीएमसी के 80 में से 58 विधायकों ने बगावत करके नया नेता विपक्ष चुन लिया है।

ममता बनर्जी के कोलकाता स्थित घर पर टीएमसी के विधायकों और सांसदों की बैठक बुलाई गई थी। बैठक में पहुंचने वाले विधायकों में बीना मंडल, आशिमा पात्रा, मदन मित्रा, कुणाल घोष, फिरहाद हकीम, शोभनदेब चट्टोपाध्याय, बिमान बनर्जी, अशोक कुमार देब के नाम शामिल हैं, जबकि सांसदों में डोला सेन, माला रॉय, कल्याण बनर्जी, अभिषेक बनर्जी, डेरेक ओ'ब्रायन, सुदीप बंद्योपाध्याय के नाम हैं।

वहीं, दूसरी ओर इंडिया टुडे ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि टीएमसी में लोकसभा सांसदों की भी बहुत बड़ी टूट देखने को मिल सकती है। कुल 29 लोकसभा सांसदों में 23 सांसद बागी विधायकों के सपर्क में हैं और आने वाले दिनों में बड़ी टूट देखने मिलने की आशंका है। दलबदल विरोधी कानून के तहत दो तिहाई आंकड़ा 22 है। वहीं, राज्यसभा सांसदों की बात करें तो यहां पार्टी के पास 13 सांसद हैं।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:ममता को लगने वाला है एक और झटका? 23 MPs बागियों संग पका रहे खिचड़ी

तृणमूल 1998 में अस्तित्व में आने के बाद से अपने 28 साल के इतिहास में सबसे बड़े संकट का सामना कर रही है। कांग्रेस से अलग हो कर ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की थी। तृणमूल कांग्रेस के भीतर यह संकट केवल सत्ता से बाहर होने का नहीं बल्कि नेतृत्व की एकछत्र सत्ता पर उठे सवालों का है। हालांकि असंतुष्ट विधायक अब भी ममता बनर्जी के नेतृत्व को स्वीकार कर रहे हैं, लेकिन ममता के भतीजे और राजनीतिक उत्तराधिकारी माने जाने वाले अभिषेक बनर्जी के प्रति खुला विरोध सामने आया है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:ममता के लिए गुड न्यूज, आपस में ही भिड़ गए बागी विधायक; TMC लीडरशिप को लेकर बवाल

पार्टी के वरिष्ठ सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा कि जो लोग ममता बनर्जी का साथ छोड़ रहे हैं, उनका राजनीतिक अस्तित्व उनके बिना नहीं है। पार्टी के वरिष्ठ राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने आशंका जताई है कि असंतोष का यह माहौल आगे चलकर संसद तक फैल सकता है। हालांकि पार्टी नेतृत्व का दावा है कि अभी सांसदों के बीच किसी संगठित विद्रोह के संकेत नहीं हैं, लेकिन यह चिंता गहराती जा रही है कि विधानसभा का संकट लोकसभा और राज्यसभा तक जा सकता है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:मानसिक रूप से पार्टी में नहीं; TMC में विधायकों के बाद सांसदों की बगावत के संकेत

उधर, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने पार्टी के 28 साल के इतिहास में पहली बार हुए विभाजन के बाद पार्टी से और अधिक विधायकों के पाला बदलने को रोकने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। वह व्यक्तिगत रूप से बागी विधायकों से संपर्क साध रही हैं, जबकि वरिष्ठ नेता अन्य विधायकों को एकजुट रखने के लिए काम कर रहे हैं। पार्टी सूत्रों ने बताया कि बनर्जी ने पिछले दो दिनों में हावड़ा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर के कई विधायकों से बात की है, जिनमें से कई को रीताब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी खेमे की बैठकों में भाग लेते देखा गया था।