बुलडोजर राजनीति में विश्वास नहीं करता बंगाल, शुभेंदु सरकार के ऐक्शन पर ममता बनर्जी का पलटवार
शुभेंदु अधिकारी सरकार के ऐक्शन के बाद ममता बनर्जी ने लिखा कि घरों से लेकर फेरीवालों की दुकानों तक, गरीब लोग राजनीतिक अहंकार की कीमत चुका रहे हैं। बंगाल बुलडोजर की राजनीति में विश्वास नहीं करता।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रविवार को शुभेंदु सरकार के बनने के बाद राज्य के कुछ हिस्सों में हाल ही में चलाए गए बेदखली और अतिक्रमण रोधी अभियानों को बुलडोजर की राजनीति करार दिया और दावा किया कि गरीब लोग राजनीतिक अहंकार की कीमत चुका रहे हैं।
सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में उन्होंने दावा किया कि इन अभियानों ने अशांति को जन्म दिया और आम लोगों के बीच कठिनाई पैदा की। बनर्जी ने लिखा, “घरों से लेकर फेरीवालों की दुकानों तक, गरीब लोग राजनीतिक अहंकार की कीमत चुका रहे हैं। बंगाल बुलडोजर की राजनीति में विश्वास नहीं करता। टैगोर और नेताजी की धरती पर भय, बल और आम नागरिकों के खिलाफ तोड़फोड़ के अभियानों के जरिए शासन नहीं किया जा सकता।”
तृणमूल प्रमुख ने किसी का नाम लिए बिना कहा कि ये घटनाक्रम समाज के कमजोर वर्गों की गरिमा और आजीविका पर हमले को दर्शाता है। उन्होंने कहा, "आज हम जो देख रहे हैं वह बंगाल के लोगों की गरिमा पर हमला है... जिन्होंने एक एक ईंट जोड़कर अपना जीवन बनाया है।" उनकी ये टिप्पणियां हावड़ा स्टेशन के आसपास व्यापक अतिक्रमण रोधी और तोड़फोड़ अभियान और पार्क सर्कस क्षेत्र में हो रहे विरोध प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में आई हैं।
इससे पहले, तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने रविवार को पार्टी के जिला परिषद सदस्यों के साथ बैठक कर "बंगाल की रक्षा और बेहतर भविष्य सुनिश्चित करने" की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। एक दिन पहले, पार्टी नेतृत्व ने विधानसभा चुनाव में पार्टी के उम्मीदवार रहे नेताओं के साथ कोलकाता में स्थित ममता के आवास कालीघाट पर बैठक की थी। उस बैठक में शीर्ष नेताओं ने कहा था कि हालिया विधानसभा चुनावों में करारी हार के बावजूद संगठन फिर से खड़ा होगा।
तृणमूल ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "हमारी अध्यक्ष ममता बनर्जी और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने कालीघाट में हमारे जिला परिषद सदस्यों से मुलाकात की।" पोस्ट में कहा गया है, "हम सब मिलकर बेहतर कल के लिए यह लड़ाई जारी रखेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि बंगाल को विभाजन और हिंसा के समर्थकों से सुरक्षित रखा जाए।" विधानसभा चुनावों में करारी पराजय के बाद तृणमूल नेतृत्व अब संगठन के पुनर्निर्माण और ग्रामीण क्षेत्रों में अपने जनाधार को बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।




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