Ashoka Pillar Now in Bengal Suvendu adhikari Removes Mamata Banerjee Biswa Bangla Logo Color Also Turns Saffron बंगाल में अब अशोक स्तंभ, शुभेंदु ने हटाया ममता बनर्जी का बिस्वा बांग्ला लोगो; रंग भी हुआ भगवा, India News in Hindi - Hindustan
More

बंगाल में अब अशोक स्तंभ, शुभेंदु ने हटाया ममता बनर्जी का बिस्वा बांग्ला लोगो; रंग भी हुआ भगवा

पोर्टल पर अब सफेद बैकग्राउंड के साथ अशोक स्तंभ और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की तस्वीर दिखाई देती है। पर्यटन, उद्योग और कृषि जैसे विभागों के आइकन भी केसरिया ग्राफिक्स के साथ फिर से डिजाइन किए गए हैं।

Sun, 17 May 2026 06:47 AMHimanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान
share
बंगाल में अब अशोक स्तंभ, शुभेंदु ने हटाया ममता बनर्जी का बिस्वा बांग्ला लोगो; रंग भी हुआ भगवा

Suvendu Adhikari: पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने राज्य की प्रशासनिक पहचान को बदलने की प्रक्रिया तेज कर दी है। ममता बनर्जी शासन की पहचान माने जाने वाले विश्व बांग्ला (Biswa Bangla) लोगो को अब आधिकारिक मंचों और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे से हटाया जा रहा है। इसकी जगह अब भारत के राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ को राज्य की मुख्य पहचान के रूप में स्थापित किया जा रहा है। पुनर्ब्रांडिंग का सबसे बड़ा असर कोलकाता के प्रतिष्ठित साल्ट लेक स्टेडियम में देखने को मिला, जहां से 'विश्व बांग्ला' के साइनेज को हटाकर राष्ट्रीय प्रतीक लगा दिया गया है।

राज्य सरकार का मुख्य पोर्टल एगिये बांग्ला अब पूरी तरह बदल गया है। यहां से विश्व बांग्ला लोगो हटाकर अशोक स्तंभ लगा दिया गया है। पोर्टल का पुराना सफेद और नीला थीम अब बदलकर केसरिया लहजे में तब्दील हो गया है। आपको बता दें कि सफेद और नीला रंग टीएमसी सरकार की पहचान था।

पोर्टल पर अब सफेद बैकग्राउंड के साथ अशोक स्तंभ और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की तस्वीर दिखाई देती है। पर्यटन, उद्योग और कृषि जैसे विभागों के आइकन भी केसरिया ग्राफिक्स के साथ फिर से डिजाइन किए गए हैं।

लोगो पर हुआ था विवाद

'विश्व बांग्ला' ब्रांड की शुरुआत 16 सितंबर 2013 को हुई थी। इसे बंगाल की सांस्कृतिक पहचान, हस्तशिल्प और पर्यटन के प्रतीक के रूप में पेश किया गया था। बंगाली अक्षर “ब” (B) के इर्द-गिर्द डिजाइन किया गया यह लोगो पिछले 13 वर्षों से राज्य की हर छोटी-बड़ी सरकारी योजना, वेबसाइट और इमारतों पर छाया हुआ था। पूर्व भाजपा विधायक मुकुल रॉय ने आरोप लगाया था कि यह लोगो निजी स्वामित्व वाला है। तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विधानसभा में स्पष्ट किया था कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से यह लोगो बनाया है और राज्य सरकार को बिना किसी रॉयल्टी के इसके इस्तेमाल की अनुमति दी है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:वादों को पूरा करने में शुभेंदु के छूटेंगे पसीने, कर्ज में डूबा है बंगाल
ये भी पढ़ें:कोई घूस लेते पकड़ा गया तो सीधा जेल भेजो, शुभेंदु अधिकारी का पुलिस को निर्देश
ये भी पढ़ें:क्या ममता बनर्जी फंसने वाली हैं? आरजी कर रेप केस को लेकर शुभेंदु का बड़ा बयान

भाजपा नेताओं ने इस फैसले का बचाव करते हुए तर्क दिया है कि किसी व्यक्ति विशेष द्वारा बनाया गया लोगो किसी राज्य सरकार की प्राथमिक पहचान नहीं होना चाहिए। पार्टी का कहना है कि आधिकारिक सरकारी कामकाज के लिए अशोक स्तंभ ही सबसे सर्वोच्च और उपयुक्त प्रतीक है।

शुभेंदु अधिकारी सरकार के शपथ ग्रहण के तुरंत बाद ही सरकारी प्रणालियों से इस लोगो का गायब होना शुरू हो गया था। यह बदलाव केवल प्रतीकात्मक नहीं है, बल्कि बंगाल की प्रशासनिक और राजनीतिक ब्रांडिंग में एक बड़े वैचारिक बदलाव का संकेत है।