Madras High Court refuses to entertain PIL to stop IPL matches in Tamil nadu assembly elections IPL मैच रोक दीजिए मिलॉर्ड, हाईकोर्ट में पहुंची अर्जी; जज साहब बोले- मैच का मजा लीजिए भई, India News in Hindi - Hindustan
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IPL मैच रोक दीजिए मिलॉर्ड, हाईकोर्ट में पहुंची अर्जी; जज साहब बोले- मैच का मजा लीजिए भई

याचिका में यह आदेश देने की मांग की गई थी कि या तो IPL मैच चुनाव के बाद कराए जाएं या फिर आचार संहिता का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान मजेदार टिप्पणियां कीं।

Tue, 7 April 2026 03:23 PMJagriti Kumari लाइव हिन्दुस्तान
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IPL मैच रोक दीजिए मिलॉर्ड, हाईकोर्ट में पहुंची अर्जी; जज साहब बोले- मैच का मजा लीजिए भई

मद्रास हाईकोर्ट ने सोमवार को IPL मैचों पर प्रतिबंध लगाने वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। इस याचिका में चुनाव के दौरान तमिलनाडु में इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) मैचों को रेगुलेट करने के निर्देश देने की मांग की गई थी। इस याचिका पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश एस ए धर्माधिकारी और जस्टिस अरुल मुरुगन की पीठ ने कहा कि यह याचिका केवल आशंका पर आधारित है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को मैच का आनंद लेने की नसीहत भी दी।

इससे पहले याचिका में निर्देश देने की मांग की गई थी कि या तो IPL मैच चुनाव के बाद कराए जाएं या फिर आदर्श आचार संहिता का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। इसमें मैच के वेन्यू पर राजनीतिक प्रतीकों और प्रचार सामग्री के प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगाने की भी मांग की गई थी। बता दें कि तमिलनाडु में आगामी 23 अप्रैल को चुनाव होने हैं।

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क्या बोला कोर्ट?

कोर्ट ने इस तर्क पर कहा कि अगर आदर्श आचार संहिता का कोई उल्लंघन होता है तो चुनाव आयोग उससे निपटने में पूरी तरह सक्षम है। कोर्ट ने यह भी कहा कि कई फैसलों में आयोग की भूमिका को पहले ही मान्यता दी जा चुकी है। वहीं पीठ ने नोट किया कि एक IPL मैच बिना किसी दिक्कत के पहले ही हो चुका है। कोर्ट ने कहा, "यह केवल एक आशंका है। एक मैच खत्म हो चुका है। अगर आप कुछ भी गलत नहीं बता पा रहे हैं, तो क्या होता है? आपने मैच देखा या नहीं? क्या हुआ? कुछ नहीं हुआ।”

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कोर्ट में बना दिलचस्प माहौल

इस दौरान पीठ ने हल्के-फुल्के अंदाज में आगे कहा, "आपने इस मैच का मजा लिया। दूसरे मैच का भी मजा लीजिए।" साथ ही, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि नागरिक अपनी किसी भी शिकायत को लेकर चुनाव आयोग से संपर्क करने के लिए स्वतंत्र हैं। याचिकाकर्ता ने अंत में अपनी याचिका वापस ले ली।

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