Calling someone a bastard during an argument is not a crime Supreme Court ruling बहस में किसी को बास्टर्ड कहना अपराध नहीं, सुप्रीम कोर्ट का फैसला; जज ने वजह भी बताई, India News in Hindi - Hindustan
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बहस में किसी को बास्टर्ड कहना अपराध नहीं, सुप्रीम कोर्ट का फैसला; जज ने वजह भी बताई

अपूर्वा अरोड़ा बनाम राज्य दिल्ली सरकार के मामले में कोर्ट ने यह फैसला दिया था कि अश्लीलता का संबंध ऐसी सामग्री से है, जो यौन और कामुक विचार जगाती है। जबकि मौजूदा मामले में इस्तेमाल की गई गाली-गलौज या अपशब्दों का ऐसा कोई असर नहीं होता।

Tue, 7 April 2026 12:56 PMNisarg Dixit लाइव हिन्दुस्तान
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बहस में किसी को बास्टर्ड कहना अपराध नहीं, सुप्रीम कोर्ट का फैसला; जज ने वजह भी बताई

IPC यानी भारतीय दंड संहिता की धारा 294(बी) से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष न्यायालय का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति बहस के दौरान बास्टर्ड जैसे शब्द या गाली का इस्तेमाल करता है, तो इसे इस धारा के तहत अश्लीलता का अपराध नहीं माना जा सकता। अदालत ने आरोपियों को राहत दी और दोषसिद्धि को रद्द कर दिया है।

हाई कोर्ट के आदेश को दी चुनौती

मद्रास हाई कोर्ट की तरफ से आरोपियों को धारा 294(बी) के तहत दोषी पाया गया था। उनपर बहस के दौरान बास्टर्ड शब्द के इस्तेमाल के आरोप लगे थे। इसके बाद दोनों ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जहां से उन्हें राहत भी मिली है। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

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सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई

बेंच ने कहा है कि इस धारा के तहत अपराध साबित होने के लिए शब्दों में कोई यौन तत्व शामिल होना जरूरी है। कोर्ट ने उच्च न्यायालय के आदेश को रद्द कर दिया है।

बेंच ने कहा, 'हमारा मानना है कि केवल 'बास्टर्ड' शब्द का इस्तेमाल करना किसी व्यक्ति की कामुक इच्छाओं को जगाने के लिए काफी नहीं है। खासकर तब जब आज के दौर में बहस के दौरान ऐसे शब्दों का इस्तेमाल आम बात हो गई है। इसलिए, हमारा मानना है कि IPC की धारा 294(b) के तहत दोषियों को दी गई सजा सही नहीं है और इसे रद्द किया जाता है।'

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पूरा मामला समझें

यह मामला एक पारिवारिक संपत्ति के विवाद से जुड़ा हुआ है। संपत्ति की बाउंड्री को लेकर विवाद चल रहा था। दोनों आरोपियों का कहना है कि धारा 294(b) के तहत अपराध नहीं हुआ है। जबकि, सरकारी वकील का कहना है कि बास्टर्ड शब्द का इस्तेमाल मृतक के लिए किया गया था। हालांकि, कोर्ट ने इस दलील को नहीं सुव्कीर किया।

पीठ ने मामले में आईपीसी की धारा 294 बी के तहत सजा को रद्द कर दिया है, जबकि अन्य आरोपों में सजा को बहाल रखा है।

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पुराने फैसले का जिक्र

पीठ ने शिवकुमार व अन्य की ओर से दाखिल अपीलों पर यह फैसला दिया है। पीठ ने कहा कि दंड संहिता में 'अश्लील' शब्द की कोई परिभाषा नहीं दी गई है। लेकिन अपूर्वा अरोड़ा बनाम राज्य दिल्ली सरकार के मामले में कोर्ट ने यह फैसला दिया था कि अश्लीलता का संबंध ऐसी सामग्री से है, जो यौन और कामुक विचार जगाती है। जबकि मौजूदा मामले में इस्तेमाल की गई गाली-गलौज या अपशब्दों का ऐसा कोई असर नहीं होता।