law does not criminalize heart break the Karnataka High Court gave a major decision in a rape case दिल टूटने को अपराध नहीं मानता कानून, रेप केस में आया हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, India News in Hindi - Hindustan
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दिल टूटने को अपराध नहीं मानता कानून, रेप केस में आया हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

एक महिला की तरफ से पुरुष के खिलाफ बलात्कार की शिकायत दर्ज कराई गई थी। दोनों पक्ष आयरलैंड में मिले और करीब 2 सालों तक रिलेशन में रहे। शिकायतकर्ता अपनी पिछली शादी में परेशानी का सामना कर रही थी और उनका एक 7 साल का बच्चा भी है।

Wed, 11 March 2026 09:24 AMNisarg Dixit लाइव हिन्दुस्तान
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दिल टूटने को अपराध नहीं मानता कानून, रेप केस में आया हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

रेप केस में सुनवाई कर रहे कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा है कि कानून दिल टूटने को अपराध नहीं मानता है। साथ ही कहा है कि सहमति से बने संबंधों के बाद अगर शादी से इनकार किया जाता है, तो यह दुखद है लेकिन इसे बलात्कार नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कानून में शादी के झूठे वादे को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की है। साथ ही इस बात पर भी गौर किया गया था कि संबंध विदेश में बने थे।

समझें केस क्या था

एक महिला की तरफ से पुरुष के खिलाफ बलात्कार की शिकायत दर्ज कराई गई थी। दोनों पक्ष आयरलैंड में मिले और करीब 2 सालों तक रिलेशन में रहे। शिकायतकर्ता अपनी पिछली शादी में परेशानी का सामना कर रही थी और उनका एक 7 साल का बच्चा भी है। वह आरोपी के साथ लिव इन रिलेशन में रह रहीं थीं। बाद में रिश्ता नहीं चला और जब आरोपी भारत पहुंचा, तो उसने शिकायतकर्ता से बातचीत बंद कर दी।

कोर्ट में क्या हुआ

इस मामले में जस्टिस एम नागप्रसन्ना सुनवाई कर रहे थे। उन्होंने कहा, 'जहां दो वयस्क अपनी मर्जी से लंबे समय तक आपसी सहमति से शारीरिक संबंध बनाते हैं, उसके बाद यदि पुरुष उस महिला से शादी करने से इनकार कर देता है, तो यह कृत्य चाहे कितना भी खेदजनक क्यों न हो, केवल इसी आधार पर उस संबंध को IPC की धारा 376 के तहत बलात्कार के अपराध में नहीं बदला जा सकता।'

कोर्ट ने कहा, 'शिकायत को पूरी तरह से पढ़ने पर कहीं भी जबरदस्ती, शुरुआत से धोखा या बल प्रयोग का ज़िक्र नहीं मिलता। यह शिकायत दो साल तक चले साथ, लिव-इन रिलेशनशिप, साझा घरेलू जीवन और आपसी सहमति वाले संबंधों के बारे में बात करती है...'

आगे कहा गया, 'यह संबंध आयरलैंड में बने, वे आयरलैंड में साथ रहे और अपना जीवन साझा किया। इसके बाद जो हुआ, वह हिंसा का आरोप नहीं बल्कि विश्वासघात का आरोप है। इसलिए, यह शुरुआत से ही धोखे से शारीरिक संबंध बनाने का मामला नहीं है। यह कानून का एक स्थापित सिद्धांत है कि 'कानून दिल टूटने को अपराध नहीं मानता'।'

मतलब समझाया

कोर्ट ने कहा, 'कानून की नज़र में शादी का वादा 'झूठा' केवल तभी माना जाता है, जब यह साबित हो जाए कि वह वादा महज एक छल या धोखेबाजी की चाल थी, जिसे कभी पूरा करने का इरादा ही नहीं था। इसके विपरीत, बाद में मन बदल जाना, भावनात्मक तालमेल न बैठना, परिवार का विरोध या सिर्फ शादी करने में हिचकिचाहट—इन बातों को रिश्ते की शुरुआत में 'आपराधिक इरादा' नहीं माना जा सकता।'

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अदालत ने शिकायत में आगे की जांच रद्द कर दीं। साथ ही कहा कि आपराधिक न्याय व्यवस्था को संबंधों के असफल होने पर हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए।