मैं इन मामलों में बहुत रूढ़िवादी हूं, नए वकील पर भड़के CJI सूर्यकांत; याचिका देख हुए नाराज
वकील ने जवाब दिया कि यह मुद्दा 'राष्ट्रीय मुद्दा' बन गया है और यह किसी एक घटना तक सीमित नहीं है। प्रधान न्यायाधीश ने वकील से पूछा कि वह कितने समय से वकालत कर रही हैं। इस पर, वकील ने जवाब दिया कि वह चार साल से वकालत कर रही हैं।

उच्चतम न्यायालय ने निकाय संबंधी कथित लापरवाही के कारण होने वाली मौतों को रोकने के लिए निर्देश जारी किए जाने संबंधी याचिका सोमवार को खारिज कर दी। साथ ही कहा कि युवा अधिवक्ताओं को केवल मीडिया प्रचार पाने के लिए जनहित याचिकाएं दायर नहीं करनी चाहिए। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने एक युवा वकील को सलाह दी कि वह वकालत के शुरुआती वर्षों में पेशे पर ध्यान केंद्रित करे और कानून तथा मसौदा तैयार करने के कौशल सीखे।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, '...इसलिए बेहतर होगा कि आप अपने पेशे पर ध्यान दें, राष्ट्रीय मीडिया में इस तरह की बातें आना बंद होना चाहिए, खासकर उन लोगों के लिए जो इस पेशे में गंभीरता से आगे बढ़ना चाहते हैं। मैं इन मामलों में बहुत रूढ़िवादी और दृढ़ हूं। दफ्तरों में काम करने, कानून सीखने के बजाय, आप निराधार याचिकाएं तैयार कर रहे हैं, सिर्फ इसलिए कि आप सोशल मीडिया पर छा जाएंगे।'
न्यायालय ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि यह 'अस्पष्ट और व्यापक दावों से भरी है, जिसमें ऐसे निर्देश मांगे गए हैं, जिनका पालन करना मुश्किल है। जनहित याचिका पर विचार करने का कोई कारण नहीं है'।
सामने रखे सवाल
सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के रखरखाव में विफलताओं के कारण होने वाली मौतों की घटनाओं को रोकने के निर्देश संबंधी जनहित याचिका पर विचार करते हुए, पीठ ने शुरुआत में याचिकाकर्ता की वकील से पूछा कि जनहित याचिका के माध्यम से अदालत में आने के बजाय, इस विशिष्ट मामले में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ शिकायत क्यों नहीं दर्ज कराई गई।
वकील ने जवाब दिया कि यह मुद्दा 'राष्ट्रीय मुद्दा' बन गया है और यह किसी एक घटना तक सीमित नहीं है। प्रधान न्यायाधीश ने वकील से पूछा कि वह कितने समय से वकालत कर रही हैं। इस पर, वकील ने जवाब दिया कि वह चार साल से वकालत कर रही हैं।
इसके बाद, प्रधान न्यायाधीश ने युवा वकीलों को सलाह दी कि वे केवल प्रचार के लिए याचिकाएं दायर करने के बजाय वरिष्ठों के मार्गदर्शन में पेशे को सीखने में समय व्यतीत करें।
उच्चतम न्यायालय ने एक वकील की पांच याचिकाएं निरर्थक बताकर खारिज कीं
उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को एक वकील द्वारा दायर पांच निरर्थक (फ्रिवोलस) जनहित याचिकाओं को खारिज कर दिया। इनमें एक याचिका ऐसी भी थी, जिसमें यह जानने के लिए वैज्ञानिक अध्ययन कराने की मांग की गई थी कि क्या प्याज और लहसुन में 'तामसिक' (नकारात्मक) ऊर्जा होती है। एक याचिका में शराब और तंबाकू उत्पादों में कथित रूप से मौजूद हानिकारक सामग्री को नियंत्रित करने का निर्देश मांगा गया था। एक याचिका में संपत्तियों के अनिवार्य पंजीकरण को लेकर निर्देश देने का आग्रह था, जबकि एक और याचिका में शास्त्रीय भाषाओं की घोषणा के लिए दिशा-निर्देश जारी करने का अनुरोध किया गया था।




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