कर्नाटक के इस गांव का खामेनेई ने किया था दौरा, उनके नाम पर अस्पताल भी; आज सब गमगीन
रविवार को गांव में शोक सभा के दौरान लोग काले कपड़े पहने, काले झंडे लहराते हुए जुलूस निकाला। उन्होंने खामेनेई की तस्वीरें हाथों में लीं और अमेरिका-इजरायल के हमले की निंदा करते हुए नारे लगाए। खामेनेई की आत्मा की शांति के लिए दुआएं मांगीं।

कर्नाटक के चिक्कबल्लापुर जिले में स्थित अलीपुरा गांव में गहरा शोक का माहौल है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत की खबर से यहां के निवासी स्तब्ध और दुखी हैं। अमेरिका और इजरायल के हमले में खामेनेई की मौत हो गई, जिसकी पुष्टि ईरानी राज्य मीडिया ने कर दी है। यह गांव शिया मुस्लिम बहुल है, जहां लगभग 30 हजार निवासियों में अधिकांश शिया समुदाय से हैं। गांव में खामेनेई के नाम पर एक अस्पताल भी बना हुआ है, जो उनकी याद में समर्पित है। रविवार को गांव में विशेष प्रार्थना सभा आयोजित की गई, जिसमें कई लोग भावुक होकर रो पड़े।
अयातुल्लाह अली खामेनेई का इस गांव से विशेष लगाव था। साल 1986 में उन्होंने एक निमंत्रण पर अलीपुरा का दौरा किया था। उस यात्रा के बाद गांव और ईरान के बीच एक तरह का संबंध बन गया। यहां के कई परिवारों के सदस्य ईरान में उच्च शिक्षा और नौकरी के लिए बस गए हैं, जिससे सीधा संपर्क बना हुआ है। खामेनेई की मौत की खबर सुनकर गांव में सदमा लगा। निवासियों ने इसे एक बड़ा झटका बताया और कहा कि ऐसा कभी नहीं होना चाहिए था। गांव में तीन दिनों का शोक घोषित किया गया है। सभी उत्सव और सार्वजनिक कार्यक्रम स्थगित कर दिए गए हैं ताकि शांतिपूर्ण माहौल बना रहे।
काले झंडे लहराते हुए जुलूस निकाला
रविवार को गांव में शोक सभा के दौरान लोग काले कपड़े पहने, काले झंडे लहराते हुए जुलूस निकाला। उन्होंने खामेनेई की तस्वीरें हाथों में लीं और अमेरिका-इजरायल के हमले की निंदा करते हुए नारे लगाए। विशेष प्रार्थना में लोगों ने खामेनेई की आत्मा की शांति के लिए दुआएं मांगीं। कई लोग आंसू बहाते हुए कह रहे थे कि यह एक दुखद घटना है। गांव की दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान स्वेच्छा से बंद रहे। निवासी चुप्पी साधे हुए थे और पूरे इलाके में उदासी छाई हुई थी।
गांव में उनके नाम का अस्पताल
यह घटना अलीपुरा के निवासियों के लिए सिर्फ एक अंतरराष्ट्रीय खबर नहीं, बल्कि व्यक्तिगत नुकसान जैसी है। खामेनेई को वे एक धार्मिक नेता और मार्गदर्शक के रूप में देखते थे। गांव में उनके नाम का अस्पताल उनकी श्रद्धा का प्रतीक है। कई परिवारों के रिश्तेदार ईरान में हैं। इसलिए हमले से उनके सुरक्षित होने की चिंता भी है। इस शोक में पूरा गांव एकजुट है और वे खामेनेई की याद में श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।




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