खामेनेई को कांग्रेस सांसद ने बताया शहीद, लिखा- जाते हैं जन्नत को घर नहीं आते...
इस खबर का असर भारत में भी देखने को मिल रहा है। कई शहरों में विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। वहीं, कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने भी शोक जताया है। उन्होंने तो खामेनेई को शहीद तक बता दिया। इसके लिए उन्होंने एक शायरी का सहारा लिया है।

ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई इजरायल और अमेरिका के द्वारा संयुक्त रूप से चलाए गए ऑपरेशन में मारे गए। इन हमलों में उनके साथ उनके परिवार के और भी कई सदस्य मारे गए। रिपोर्ट के मुताबिक, उनके ठिकानों पर एक साथ 30 से अधिक विध्वंसक बम गिराए गए। खामेनेई की मौत को लेकर ईरान में विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। अमेरिका और इजरायल के खिलाफ नारेबाजी हो रही है। बदला लेने की बात कही जा रही है।
इस खबर का असर भारत में भी देखने को मिल रहा है। कई शहरों में विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। वहीं, कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने भी शोक जताया है। उन्होंने तो खामेनेई को शहीद तक बता दिया। इसके लिए उन्होंने एक शायरी का सहारा लिया है।
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी साबिर जफर की शायरी के जरिए अपना शोक व्यक्त किया है। वह लिखते हैं, ‘न इंतिज़ार करो इनका ऐ अज़ा-दारो, शहीद जाते हैं जन्नत को घर नहीं आते।-साबिर ज़फ़र’
दुनियाभर के नेताओं की प्रतिक्रिया
एक बयान में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री केअर स्टॉर्मर, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने अमेरिका-ईरान से फिर से बातचीत शुरू करने का आह्वान किया है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके देश ईरान पर हुए हमलों में शामिल नहीं हैं, लेकिन वे अमेरिका, इजराइल और क्षेत्र के सहयोगी देशों के साथ लगातार संपर्क में हैं। ये तीनों देश ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत से समाधान की कोशिशों में आगे रहे हैं।
उन्होंने कहा, "हम क्षेत्र के देशों पर ईरान के हमलों की कड़ी निंदा करते हैं। ईरान को बिना सोचे समझे सैन्य हमले करने से बचना चाहिए। आखिर में, ईरानी लोगों को अपना भविष्य खुद तय करने देना चाहिए।"
बाद में, आपात सुरक्षा बैठक में मैक्रों ने कहा कि ईरान पर हुए हमलों के बारे में फ्रांस को न पहले से बताया गया था और न ही फ्रांस इसमें शामिल था। उन्होंने कहा कि बातचीत से समाधान निकालने की कोशिशें और तेज करनी चाहिए।
मैक्रों ने कहा, "ईरान के परमाणु कार्यक्रम, उसकी बैलिस्टिक गतिविधियों और क्षेत्र में अस्थिरता जैसे मुद्दे सिर्फ हमलों से ही हल हो जाएंगे, यह सोचना गलत है।"
22 देशों के अरब लीग ने ईरान के हमलों को "शांति का समर्थन करने और स्थिरता लाने की कोशिश करने वाले देशों की संप्रभुता का खुला उल्लंघन" बताया। यह समूह पहले भी इजराइल और ईरान के ऐसे कदमों की निंदा करता रहा है जिनसे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ने का खतरा हो सकता है।




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