तीन साल में घर ही गिन पाए? डिंपल ने आगे बढ़ाया अखिलेश यादव वाला सवाल, अमित शाह को जवाब
मैनपुरी की सांसद डिंपल यादव ने लोकसभा में महिला आरक्षण बिल की मंशा पर सवाल उठाए हैं। डिंपल ने कहा कि भाजपा परिसीमन को खुद को मजबूत करने के लिए इस्तेमाल करना चाहती है। ये लोग परिसीमन में इसलिए जनगणना को हटाना चाहते हैं ताकि ओबीसी महिलाओं को आरक्षण ना दिया जा सके।

समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पर कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने लोकसभा में सरकार से सवाल दागा कि आखिर इतनी जल्दबाजी क्यों है और जनगणना के आंकड़ों का इंतजार क्यों नहीं किया जा रहा। उन्होंने कहा कि सरकार का इरादा ठीक नहीं लगता है और वह ओबीसी वर्ग की महिलाओं को अधिकार देने से बचने के लिए जाति जनगणना के आंकड़ों का इंतजार नहीं कर रही है। ऐसा ही सवाल गुरुवार को अखिलेश यादव ने भी उठाया था। उनका कहना था कि सरकार को पहले आंकड़े आने देना चाहिए और फिर ओबीसी वर्ग और मुसलमान महिलाओं को भी आरक्षण देना चाहिए।
इसी सवाल को डिंपल यादव ने शुक्रवार को आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा, ‘जब आपकी सरकार 2024 में आई तो आपने जनगणना तुरंत क्यों नहीं शुरू कराई। इसके लिए आपने करीब ढाई साल का इंतजार क्यों किया। अब यदि उसमें देर ही कर दी है तो फिर महिला आरक्षण को बिना जरूरी आंकड़ों के ही लागू करने की जल्दबाजी क्यों दिखा रही है। समाजवादी पार्टी का मानना है कि भाजपा परिसीमन को खुद को मजबूत करने के लिए इस्तेमाल करना चाहती है। ये लोग परिसीमन में इसलिए जनगणना को हटाना चाहते हैं ताकि ओबीसी महिलाओं को आरक्षण ना दिया जा सके।’
उनकी इस टिप्पणी को अमित शाह को जवाब के तौर पर भी देखा जा रहा है। अखिलेश यादव ने जाति जनगणना वाला सवाल पूछा था। इस पर अमित शाह ने उन्हें रोकते हुए कहा था कि अभी तो घरों की गिनती की जा रही है। जब लोगों की गिनती होगी तो जाति वाला कॉलम जुड़ेगा। अब इसी पर तंज करते हुए डिंपल यादव ने कहा कि तीन सालों में सरकार घरों की गिनती ही करा पाई है।
'महिलाओं के खिलाफ हिंसा पर क्यों चुप हैं भाजपा की सांसद?'
इसके आगे उन्होंने उत्तर प्रदेश के हालात पर बात की। डिंपल यादव ने कहा कि यूपी में प्राइमरी स्कूलों को गांव-गांव में बंद किया जा रहा है। इससे महिलाएं कैसे आगे बढ़ेंगी। यूपी की व्यवस्था ध्वस्त है। सुरक्षा और महिलाओं के सम्मान की बात को क्या ही किया किया जाए। फिर उन्नाव में कुलदीप सिंह सेंगर ने क्या किया। इसे भी देखना चाहिए। मणिपुर में जो घटनाएं हुई हैं, उस पर महिलाओं के सम्मान की बात कहां गई। भाजपा की महिला सांसदों ने भी इस मामले में चुप्पी सीधे रखी। उत्तराखंड में अंकिता भंडारी के कत्ल पर आखिर क्या किया गया। इस पर भी बात करनी चाहिए थी।
हरसिमरत ने कहा- 543 सीटों पर ही दें आरक्षण, 100 पुरुष त्याग करें
इस बीच एक और महिला सांसद हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि यदि महिला आरक्षण लागू करना था कि इनमें से ही दिया जाए। 74 महिला सांसद तो पहले से ही हैं। 100 और महिलाओं की बात है तो उतने पुरुष सांसद ही त्याग कर लें और महिलाओं को आने दें। वहीं केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि यदि इतने ही हितैषी विपक्ष के लोग हैं तो अब तक 543 सीटों में से महिलाओं को 33 फीसदी का आरक्षण क्यों नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि ओबीसी की बात करने वाले ध्यान दें कि आयोग को इसी सरकार ने संवैधानिक दर्जा प्रदान किया था।




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