Justice Yashwant Varma Quits Amid Removal Process now will he Get Retirement Benefits महाभियोग के बीच जस्टिस यशवंत वर्मा का इस्तीफा, क्या उन्हें पेंशन और रिटायरमेंट लाभ मिलेंगे?, India News in Hindi - Hindustan
More

महाभियोग के बीच जस्टिस यशवंत वर्मा का इस्तीफा, क्या उन्हें पेंशन और रिटायरमेंट लाभ मिलेंगे?

सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस वर्मा के न्यायिक कामकाज छीन लिए और उन्हें कोई काम न सौंपने के निर्देश जारी किए। घटना के बाद संसदीय प्रक्रिया तेज हुई। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की ओर से गठित समिति ने इन-हाउस जांच शुरू की। 

Fri, 10 April 2026 05:46 PMNiteesh Kumar लाइव हिन्दुस्तान
share
महाभियोग के बीच जस्टिस यशवंत वर्मा का इस्तीफा, क्या उन्हें पेंशन और रिटायरमेंट लाभ मिलेंगे?

लुटियंस दिल्ली स्थित जस्टिस यशवंत वर्मा के आवास से एक स्टोररूम में भारी मात्रा में नकदी बरामद हुई, जिस घटना ने पूरे देश को चौंका दिया। जस्टिस वर्मा उस समय दिल्ली हाईकोर्ट में तैनात थे और बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट में ट्रांसफर हो गया। अब जस्टिस वर्मा ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को इस्तीफा सौंप दिया है। इस्तीफे के साथ सबसे बड़ा सवाल पेंशन और रिटायरमेंट बेनिफिट्स का है। कानूनी जानकारों के अनुसार, हाईकोर्ट जज (वेतन और सेवा शर्तें) अधिनियम 1954 के तहत इस्तीफा रिटायरमेंट माना जा सकता है। इसलिए जस्टिस वर्मा को सामान्य रिटायरमेंट वाली पेंशन और अन्य सुविधाएं मिलने की संभावना है। अगर संसद की ओर से महाभियोग के जरिए उन्हें हटाया जाता, तो वे इन लाभों से वंचित हो जाते।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:वकील ने दायर कर दीं 25 PIL, भड़के CJI सूर्यकांत बोले- अपने प्रोफेशन पर ध्यान दो

हालांकि, यह पहलू कई लोगों को चुभ सकता है। क्या न्यायिक पद पर रहते हुए हुई अनियमितता के बावजूद पूर्ण लाभ मिलना उचित है? सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों में भी इस्तीफे को रिटायरमेंट के समकक्ष माना गया है। यह स्थिति न्यायिक नैतिकता और कानूनी प्रावधानों के बीच के अंतर को उजागर करती है, जहां संस्था की गरिमा बनाम व्यक्तिगत अधिकारों का संतुलन बिगड़ता दिखता है। इस घटना ने न्यायपालिका में सुधार की जरूरत को एक बार फिर सामने रखा है। आम नागरिक न्यायालयों से निष्पक्षता और पारदर्शिता की उम्मीद रखते हैं। जब शीर्ष स्तर पर ऐसी घटनाएं सामने आती हैं, तो पूरे सिस्टम पर सवाल उठते हैं।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:बैलगाड़ियां और ढोल लेकर फिर सड़क पर उतरे किसान, नए खरीद नियमों पर क्यों भड़के

जस्टिस यशवंत वर्मा का क्या है दावा

बता दें कि यशवंत वर्मा ने घर पर मिली नकदी से अपने या अपने परिवार का कोई लेना-देना नहीं होने का दावा किया। लेकिन इस घटना ने न्यायाधीशों की निष्पक्षता और ईमानदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत वर्मा के न्यायिक कामकाज छीन लिए और उन्हें कोई काम न सौंपने के निर्देश जारी किए। घटना के बाद संसदीय प्रक्रिया तेज हुई। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की ओर से गठित समिति ने इन-हाउस जांच शुरू की और संसद में महाभियोग की प्रक्रिया चली।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:तलाक मांगने पहुंचे पति से बोला SC- शांति से बैठे रहो, 15 हजार दो और खुश रहो

अभियोजन पक्ष ने मार्च में अपना पक्ष रखा, जबकि जस्टिस वर्मा को अपना बचाव पेश करने का समय दिया गया था। ठीक उसी दिन, जब वे अपने बचाव की दलीलें शुरू करने वाले थे, जस्टिस वर्मा ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को इस्तीफा सौंप दिया। अपने पत्र में उन्होंने गहरी वेदना के साथ इस्तीफा देने का जिक्र किया और कहा कि यह सम्मानजनक सेवा का अंत है। इस्तीफे के साथ महाभियोग की प्रक्रिया स्वतः समाप्त हो गई।