Haryana farmers opposed new wheat procurement rules protested bullock carts drums बैलगाड़ियां और ढोल लेकर फिर सड़क पर उतरे किसान, नए खरीद नियमों पर क्यों भड़के, India News in Hindi - Hindustan
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बैलगाड़ियां और ढोल लेकर फिर सड़क पर उतरे किसान, नए खरीद नियमों पर क्यों भड़के

नए खरीद नियमों के तहत किसानों को पहले 'मेरी फसल-मेरा ब्यौरा' पोर्टल पर पंजीकरण कराना पड़ता है। मंडी पहुंचने पर बायोमेट्रिक रजिस्ट्रेशन, ट्रैक्टर-ट्रॉली की फोटो, वाहन नंबर और जियोफेंसिंग के जरिए फसल की पुष्टि करनी होती है। 

Fri, 10 April 2026 03:50 PMNiteesh Kumar लाइव हिन्दुस्तान
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बैलगाड़ियां और ढोल लेकर फिर सड़क पर उतरे किसान, नए खरीद नियमों पर क्यों भड़के

हरियाणा के किसानों ने गेहूं खरीद के नए नियमों का खुलकर विरोध किया है। बैलगाड़ी, ढोल-नगाड़ों और नारों के साथ उन्होंने शुक्रवार को विरोध प्रदर्शन किया। नए नियमों में बायोमेट्रिक सत्यापन, वाहन ट्रैकिंग, जियोफेंसिंग और तीन स्तर की जांच शामिल है। किसान इन्हें बोझिल और अपमानजनक बता रहे हैं। यमुनानगर की सदहुरा मंडी और जिंद की जुलाना मंडी में किसानों ने पुरानी ट्रॉली और बैलगाड़ी से फसल लाकर सरकार के डिजिटल सिस्टम का विरोध जताया। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने शनिवार को चार घंटे हाईवे ब्लॉक करने की घोषणा की है।

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नए खरीद नियमों के तहत किसानों को पहले 'मेरी फसल-मेरा ब्यौरा' पोर्टल पर पंजीकरण कराना पड़ता है। मंडी पहुंचने पर बायोमेट्रिक रजिस्ट्रेशन, ट्रैक्टर-ट्रॉली की फोटो, वाहन नंबर और जियोफेंसिंग के जरिए फसल की पुष्टि करनी होती है। सरकार का दावा है कि इससे पड़ोसी राज्यों से सस्ते चावल की घुसपैठ रोकी जा सकेगी। 8 अप्रैल तक 75 प्रतिशत गेहूं बायोमेट्रिक तरीके से सत्यापित हो चुका है। लेकिन किसान इसे महाभारत बता रहे हैं।

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किन बातों से परेशान हैं किसान

हिसार के किसान नेता सुरेश कोठ ने कहा, 'हम कितनी बार साबित करें कि हम सच्चे किसान हैं? पोर्टल, बायोमेट्रिक, फोटो और अनगिनत सवाल… यह हमारे लिए बोझ बन गया है।' जुलाना मंडी में किसानों ने बैलगाड़ी पर फसल लाकर ढोल बजाते हुए नारे लगाए। एक किसान ने कहा, 'हम फसल बेचने आए हैं, नशीले पदार्थ बेचने नहीं।' सदहुरा मंडी में 70 वर्षीय किसान ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा से शिकायत की कि उनका ट्रैक्टर तीन दिन से गेट पर खड़ा है। बूढ़ी उम्र में रात कहां सोएं और पुराने ट्रैक्टर के कागज न होने से बायोमेट्रिक भी नहीं हो पा रहा।

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भूपिंदर सिंह हुड्डा ने नियम तुरंत रोकने का आश्वासन दिया और कहा कि किसानों के साथ अपराधी जैसा व्यवहार किया जा रहा है। पगड़ी संभाल जट्टा किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष मंदीप नथवान ने भी एसकेएम के आंदोलन का समर्थन किया। किसान नेताओं का आरोप है कि 2025 में चावल मिलर्स और अधिकारियों की मिलीभगत से गेट पास बिना फसल पहुंचे जारी किए गए। इससे उत्तर प्रदेश और बिहार से सस्ता चावल (1500 रुपये प्रति क्विंटल) लाकर हरियाणा की एमएसपी (2389 रुपये) वाली फसल को नुकसान पहुंचाया गया। अब असली किसानों को नौकरशाही के जाल में फंसाया जा रहा है।