अब ममता के भतीजे ने भरी ‘झुकूंगा नहीं’ वाली हुंकार; शुभेंदु अधिकारी पर भी निशाना
तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने कोलकाता नगर निगम की ओर से भेजे गये दो नोटिसों पर मंगलवार को कहा कि प्रशासन भले ही उनके घर गिरा दे, लेकिन वह झुकेंगे नहीं।

तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने कोलकाता नगर निगम की ओर से भेजे गये दो नोटिसों पर मंगलवार को कहा कि प्रशासन भले ही उनके घर गिरा दे, लेकिन वह झुकेंगे नहीं। कालीघाट में तृणमूल कांग्रेस के विधायकों की एक बैठक के बाद बनर्जी ने कहाकि उन्हें घर गिराने दीजिए। मैं झुकूंगा नहीं। साथ ही श्री बनर्जी ने यह भी कहा कि उन्होंने शुभेंदु अधिकारी जैसा बदले की भावना से काम करने वाला मुख्यमंत्री नहीं देखा है।
सीएम शुभेंदु ने क्या कहा था
भवानीपुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को कहा था कि उन्होंने नगर मामलों के सचिव और कोलकाता नगर निगम को संपत्ति के मालिकाना हक में कथित अनियमितताओं को लेकर चार लोगों के नामों की जांच करने को कहा है। उन्होंने कहा था कि बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और अवैध रूप से संपत्ति जुटाने में शामिल सभी लोगों को सलाखों के पीछे भेजा जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहाकि मैं आपको नाम बताता हूं। भतीजे अभिषेक बनर्जी के पास कुल 24 संपत्तियां हैं। उनकी कंपनी ‘लीप्स एंड बाउंड्स’ के पास 14 संपत्तियां हैं। चार संपत्तियां खुद उनके नाम पर हैं, जबकि छह संपत्तियां उनके पिता की हैं। इसी तरह जावेद खान के बेटे के नाम पर भी 90 संपत्तियां दर्ज हैं।
जारी हुई दो नोटिस
इसके तुरंत बाद, कोलकाता नगर निगम ने अभिषेक बनर्जी से जुड़ी संपत्तियों पर कथित अवैध निर्माण को लेकर दो नोटिस जारी कर दी। नगर निगम के भवन विभाग द्वारा कोलकाता नगर निगम अधिनियम, 1980 की धारा 400(1) के तहत भेजे गए ये नोटिस, भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र के वार्ड 73 में स्थित 121, कालीघाट रोड और 188ए, हरीश मुखर्जी रोड की संपत्तियों से संबंधित हैं। एक नोटिस श्री बनर्जी की मां लता बनर्जी के नाम पर जारी किया गया है, जबकि दूसरा नोटिस ‘लीप्स एंड बाउंड्स’ कंपनी को भेजा गया है।
सात दिन के भीतर गिराने का निर्देश
नोटिस के अनुसार, इन दोनों पतों पर किए गए निर्माण के कुछ हिस्से कथित तौर पर स्वीकृत भवन योजनाओं से अलग हटकर बनाए गए हैं। कोलकाता नगर निगम कानून की धारा 400(1) के तहत, नगर आयुक्त को अनाधिकृत निर्माण के मामलों में उसे गिराने या काम रोकने का आदेश देने का अधिकार है। हालांकि, कानून के तहत किसी भी तोड़फोड़ की कार्रवाई से पहले, संपत्ति के मालिक को नोटिस देना और जवाब देने का अवसर देना जरूरी होता है। नोटिस में संबंधित लोगों को सात दिनों के भीतर कथित तौर पर अवैध हिस्सों को खुद गिराने का निर्देश दिया गया है।
मांगा गया है स्पष्टीकरण
इसके अलावा, उनसे इसी समय सीमा के भीतर यह स्पष्टीकरण देने को कहा गया है कि नगर निगम खुद इस निर्माण को क्यों न गिराए। नगर निगम ने इन संपत्तियों से जुड़े भवन निर्माण की योजनाओं, स्वीकृत नक्शों और अन्य संबंधित दस्तावेजों को भी जमा करने को कहा है। नोटिस में कहा गया है कि यदि मिले जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाते हैं, तो निगम सात दिनों से कम का एक अतिरिक्त नोटिस देकर तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू कर सकता है। इस तरह की तोड़फोड़ के दौरान आने वाला पूरा खर्च संपत्ति के मालिकों को ही उठाना होगा।




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