यह राष्ट्रीय शर्म? अपनी ही जमीं पर अपने ही लोगों को... एंजेल चकमा की हत्या पर शशि थरूर क्या बोले
थरूर ने लिखा कि यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति की हत्या नहीं है, बल्कि यह अज्ञानता, पूर्वाग्रह और समाज की विफल सोच का नतीजा है। उन्होंने कहा कि एंजेल चकमा की मौत को केवल एक खबर या आंकड़े तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर ने त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा की देहरादून में बेरहमी से हत्या किए जाने पर गहरी नाराजगी और क्षोभ जताया है। उन्होंने इसे नस्लीय नफरत करार देते हुए इसे एक 'राष्ट्रीय शर्म' बताया और कहा कि यह हमारे समाज की सोच और विविधता के प्रति असंवेदनशीलता को दिखाती है। शशि थरूर ने सोशल मीडिया मंच X पर एक लंबे पोस्ट में 24 वर्षीय छात्र एंजेल चकमा की मौत पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कि कोई भी भारतीय अपने ही देश में खुद को पराया महसूस न करे, इसके लिए समाज को बदलने की जरूरत है।
लोकसभा सांसद थरूर ने सोशल मीडिया पर लिखा, "उत्तराखंड में एंजेल चकवा की बेरहमी से हत्या सिर्फ एक दुखद घटना नहीं है, बल्कि यह एक राष्ट्रीय शर्म की बात है। त्रिपुरा का एक युवा, एक गर्वित भारतीय, नस्लीय भेदभाव का शिकार हुआ, उसे "चीनी" और "मोमो" जैसे अपमानजनक शब्दों से अपमानित किया गया, और आखिरकार उसकी हत्या कर दी गई। यह हिंसा की कोई अकेली घटना नहीं है; यह अज्ञानता, पूर्वाग्रह और हमारे समाज की अपनी विविधता को पहचानने और उसका सम्मान करने में विफलता का नतीजा है।"
भारत में नस्लवाद बढ़ रहा
उन्होंने आगे लिखा, “यह चौंकाने वाला और बहुत शर्मनाक है कि उत्तर भारत में नस्लवाद बढ़ रहा है, जो अक्सर हल्के-फुल्के मज़ाक या सिस्टम की अनदेखी की आड़ में छिपा होता है। पूर्वोत्तर, अपनी समृद्ध संस्कृति, भाषाओं और परंपराओं का केंद्र रहा है। यह भारतीय पहचान का हिस्सा है। फिर भी, इस क्षेत्र के लोगों को नियमित रूप से नस्लीय भेदभाव, बहिष्कार और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ता है। यह खत्म होना चाहिए।”
समाज को अपने पूर्वाग्रहों को छोड़ना होगा
कांग्रेस सांसद ने लिखा, हमें एंजेल चकमा के लिए न्याय की मांग करनी चाहिए, न केवल अदालतों में, बल्कि देश की अंतरात्मा में भी। उनकी मौत को सिर्फ़ एक आंकड़ा या कुछ समय की हेडलाइन तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। यह शिक्षा, सहानुभूति और सुधार के लिए एक आंदोलन को जन्म देना चाहिए। देशभर के स्कूलों को सभी भारतीय समुदायों के इतिहास और संस्कृतियों को पढ़ाना चाहिए। मीडिया को पूर्वोत्तर भारतीयों को गरिमा के साथ दिखाना चाहिए। और समाज को अपने पूर्वाग्रहों को छोड़ना होगा।"
भारतीय को अपनी ही ज़मीन पर पराया महसूस न कराया जाए
थरूर ने अपने पोस्ट के जरिए मांग की कि राजनीतिक नेताओं को इस मुद्दे पर बोलना चाहिए। धार्मिक नेताओं को आवाज़ उठानी चाहिए। उन्होंने लिखा, "चुप्पी सहमति है। मैं उन लोगों से अपील करता हूं जो धर्म को बनाए रखने का दावा करते हैं कि वे याद रखें कि हिंदू धर्म, अपने मूल में, बहुलवाद और समावेश की परंपरा है। यह एक ऐसी सभ्यता है जिसने हजारों सालों से मतभेदों को अपनाया है, जनजातियों, जातियों, भाषाओं और धर्मों को अपनी गोद में लिया है। हिंदू होने का मतलब है हर इंसान की पवित्रता का सम्मान करना, चाहे वह कैसा भी दिखे या कहीं का भी हो।" उन्होंने आह्वान किया, “आइए हम एंजेल चकवा के लिए न केवल शब्दों से, बल्कि क्रियात्मक रूप से भी शोक मनाएं। आइए हम एक ऐसा समाज बनाएं जहां किसी भी भारतीय को अपनी ही ज़मीन पर पराया महसूस न कराया जाए।”
क्या है पूरा मामला?
बता दें कि एंजेल चकमा त्रिपुरा के उनाकोटी जिले के रहने वाले थे और देहरादून में MBA के अंतिम वर्ष के छात्र थे। 9 दिसंबर को वे अपने भाई माइकल के साथ सेलाकुई बाजार गए थे। इसी दौरान कुछ लोगों ने उन्हें घेर लिया और कथित तौर पर नस्लीय गालियां दीं। आरोप है कि हमलावरों ने उन्हें “चीनी” और “मोमो” जैसे अपमानजनक शब्द कहे और फिर चाकू और पीतल के हथियारों से हमला कर दिया। हमले में गंभीर रूप से घायल एंजेल चकमा की 26 दिसंबर को इलाज के दौरान मौत हो गई।

इसी दुखद घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए शशि थरूर ने कहा कि यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति की हत्या नहीं है, बल्कि यह अज्ञानता, पूर्वाग्रह और समाज की विफल सोच का नतीजा है। उन्होंने कहा कि एंजेल चकमा की मौत को केवल एक खबर या आंकड़े तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। यह घटना शिक्षा, संवेदना और सामाजिक सुधार की शुरुआत बननी चाहिए। थरूर ने जोर देकर कहा कि भारत अपनी विविधता के लिए जाना जाता है और देश के हर नागरिक को, चाहे वह किसी भी राज्य या समुदाय से हो, सम्मान और सुरक्षा मिलनी चाहिए।




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