'FIR लिखने से मना कर दिया था, कहा कि मामूली बात है', एंजेल चकमा के पिता ने लगाए गंभीर आरोप
तरुण प्रसाद चकमा बीएसएफ जवान हैं। उन्होंने हमले की दर्दनाक परिस्थितियों के बारे में विस्तार से बताया। चकमा ने कहा, ‘मुझे रात में अपने छोटे बेटे से हमले की सूचना मिली और मैं तुरंत देहरादून के लिए रवाना हो गया।’

त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा के पिता तरुण प्रसाद चकमा ने अपने बेटे की मौत को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि परिवार को शुरुआत में शिकायत दर्ज कराने में प्रतिरोध का सामना करना पड़ा। तरुण चकमा ने कहा, ‘वे एफआईआर दर्ज कराना चाहते थे, लेकिन उन्हें मना कर दिया गया और कहा गया कि यह मामूली बात है। जब हम वहां गए तब जाकर केस दर्ज किया गया।’
तरुण प्रसाद चकमा ने कहा कि पूर्वोत्तर के लोग भी भारतीय हैं और सरकार से यहां के लोगों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करना चाहिए। उन्होंने देश के अन्य हिस्सों में पढ़ाई या काम करने वाले बच्चों के लिए बेहतर सुरक्षा की मांग की। एएनआई से बात करते हुए चकमा ने कहा, 'पूर्वोत्तर से हमारे बच्चे दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जैसे विभिन्न जगहों पर काम या पढ़ाई करने जाते हैं। उनके साथ ऐसा व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए। हम सभी भारतीय हैं। मैं सरकार से सभी के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करने की मांग करता हूं।'
पिता ने किस बात की लगाई गुहार
तरुण प्रसाद चकमा बीएसएफ जवान हैं। उन्होंने हमले की दर्दनाक परिस्थितियों के बारे में विस्तार से बताया। चकमा ने कहा, 'मुझे रात में अपने छोटे बेटे से हमले की सूचना मिली और मैं तुरंत देहरादून के लिए रवाना हो गया। मैं नहीं चाहता कि मेरे बच्चे के साथ जो हुआ, वह किसी और के साथ हो। मैंने अपने बच्चे को गंभीर हालत में देखा। उसका बायां हाथ और पैर लकवाग्रस्त हो गए थे क्योंकि उसकी पीठ में 2 बार चाकू घोंपा गया था। उसके सिर से खून बह रहा था।'
CCTV फुटेज की जांच में क्या मिला
पिता के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज में तीन लोग मोटरसाइकिल पर आते दिखे। वे उनके बेटे पर टिप्पणी करते हैं और फिर हमला कर देते हैं। जब एंजेल चकमा ने बचाव की कोशिश की तो उसकी पीठ में चाकू घोंप दिया गया। उसे लात मारी गई और गर्दन पर गंभीर चोटें आईं। तरुण चकमा ने कहा, 'मैं घटना की रिपोर्ट दर्ज करने पुलिस के पास गया। उन्होंने घटनास्थल के CCTV फुटेज की जांच की। इसमें दिखता है कि मेरे बेटे को बाद में उसके दो दोस्तों ने बचाया। मेरे बच्चे को अस्पताल में भर्ती कराया गया।'




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