Is there turmoil within Mamata Banerjee party TMC leaders spotted at BJP meetings close aides meet Suvendu Adhikari ममता बनर्जी की टेंशन बढ़ी, BJP की मीटिंग में गए TMC नेता, करीबी शुभेंदु अधिकारी से मिले, India News in Hindi - Hindustan
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ममता बनर्जी की टेंशन बढ़ी, BJP की मीटिंग में गए TMC नेता, करीबी शुभेंदु अधिकारी से मिले

कल्याणी में हुई बैठक में बारासात सांसद के अलावा बैठक में भाग लेने वालों में देगंगा के तृणमूल विधायक अनीसुर रहमान बिश्वास, स्वरूपनगर की बीना मंडल, हरोआ के मोहम्मद अब्दुल मतीन और बशीरहाट क्षेत्र के तीन और विधायक शामिल थे।

Wed, 27 May 2026 07:18 AMNisarg Dixit लाइव हिन्दुस्तान
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ममता बनर्जी की टेंशन बढ़ी, BJP की मीटिंग में गए TMC नेता, करीबी शुभेंदु अधिकारी से मिले

विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद TMC यानी तृणमूल कांग्रेस में बड़ी राजनीतिक उथल पुथल के आसार हैं। खबरें हैं कि पार्टी की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार, छह विधायकों के साथ मंगलवार को कल्याणी में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की प्रशासनिक समीक्षा बैठक में शामिल हुईं। सिलीगुड़ी में भी कुछ ऐसा ही दृश्य देखने को मिला, जहां तृणमूल के पांच विधायकों ने उत्तर बंगाल विकास मंत्री निशिथ प्रमाणिक की अध्यक्षता में हुई राज्य सरकार की बैठक में भाग लिया।

बैठकों ने बदला माहौल

तृणमूल कांग्रेस में अपने साथ हुए व्यवहार पर सार्वजनिक रूप से निराशा व्यक्त करने के बाद हाल में संगठनात्मक पद से इस्तीफा देने वाली दस्तीदार भाजपा सरकार के आधिकारिक मंच पर ऐसे समय में नजर आईं, जब पश्चिम बंगाल के राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते दिख रहे हैं। राज्य के दो अलग-अलग हिस्सों में कुछ ही घंटों के अंतराल पर हुए इन दो घटनाक्रमों ने पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद के बदलते राजनीतिक परिदृश्य को लेकर जारी चर्चा में एक और आयाम जोड़ दिया।

कल्याणी में हुई मीटिंग में भी पहुंचे टीएमसी विधायक

कल्याणी में हुई बैठक में बारासात सांसद के अलावा बैठक में भाग लेने वालों में देगंगा के तृणमूल विधायक अनीसुर रहमान बिश्वास, स्वरूपनगर की बीना मंडल, हरोआ के मोहम्मद अब्दुल मतीन और बशीरहाट क्षेत्र के तीन और विधायक शामिल थे। कल्याणी स्थित एपीजे अब्दुल कलाम सभागार में आयोजित बैठक में उत्तर 24 परगना, नदिया और हुगली जिलों के अधिकारी और निर्वाचित जनप्रतिनिधि एकत्र हुए।

सबसे ज्यादा चर्चा काकोली घोष दस्तीदार की

हालांकि, राजनीतिक पर्यवेक्षकों के लिए दस्तीदार की उपस्थिति का महत्व बैठक के घोषित प्रशासनिक उद्देश्य से कहीं अधिक है। महज दो दिन पहले ही उन्होंने तृणमूल के बारासात संगठनात्मक जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था। इससे पहले, संसदीय दल के मुख्य सचेतक पद से हटाए जाने और उनकी जगह कल्याण बनर्जी को नियुक्त किए जाने के बाद, दस्तीदार ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था, '1976 से जुड़ाव, 1984 में शुरू हुई यात्रा। आज मुझे चार दशकों की निष्ठा का फल मिला है।'

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क्या बोलीं सांसद

इस सोशल मीडिया पोस्ट ने पार्टी के भीतर पनप रहे असंतोष को लेकर अटकलें तेज कर दीं, जिससे मुख्यमंत्री की बैठक में उनकी उपस्थिति तुरंत राजनीतिक रूप से अहम हो गई। हालांकि, दस्तीदार ने अटकलों को तवज्जो नहीं देने की कोशिश की। उन्होंने संक्षेप में कहा, 'प्रशासन सभी का है।'

बैठक में उपस्थित तृणमूल विधायकों ने भी यही कहा कि वे केवल विकास संबंधी चिंताओं को लेकर आए हैं। बीना मंडल ने कहा, 'मैं अपने निर्वाचन क्षेत्र के विकास के लिए आई हूं। हमारे कुल छह विधायक बैठक में शामिल हुए हैं।' अब्दुल मतीन ने कहा, 'राज्य सरकार ने हमें आमंत्रित किया था, इसलिए मैं बतौर विधायक आया हूं।'

अनीसुर रहमान बिश्वास ने कहा कि उनके निर्वाचन क्षेत्र में कई पिछड़े क्षेत्र हैं और समग्र विकास के लिए सरकार के सहयोग की आवश्यकता है।

यहां भी पहुंचे टीएमसी विधायक

इसी तरह का दृश्य सिलीगुड़ी स्थित राज्य सचिवालय की उत्तर बंगाल शाखा, उत्तरकन्या में भी देखने को मिला, जहां मॉनसून से पहले प्रमाणिक की अध्यक्षता में आयोजित एक प्रशासनिक बैठक में विपक्षी विधायकों ने भाग लिया। सिंचाई विभाग के वरिष्ठ इंजीनियरों और अन्य शीर्ष अधिकारियों के साथ आयोजित बैठक में उत्तर बंगाल के कई तृणमूल विधायकों ने भाग लिया, जिनमें सबीना यास्मीन, गुलाम रब्बानी, बिप्लब मित्रा, कनैलाल अग्रवाल और प्रसून मुखोपाध्याय शामिल थे।

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तृणमूल विधायकों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे एक रचनात्मक प्रयास बताया। गुलाम रब्बानी और बिप्लब मित्रा जैसे नेताओं ने कहा कि वे अपनी मर्जी से बैठक में शामिल हुए थे और जनता के लिए काम करना चाहते हैं। उन्होंने बैठक को सार्थक बताया, लेकिन स्पष्ट किया कि उनकी भागीदारी को दल-बदल की किसी योजना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

क्या बोले शुभेंदु अधिकारी

बाद में पत्रकारों से बात करते हुए, मुख्यमंत्री ने इस बैठक को पश्चिम बंगाल की पुरानी राजनीतिक संस्कृति से बदलाव का संकेत बताया। उन्होंने कहा, 'जब हम विपक्ष में थे, हमें प्रशासनिक बैठकों में आमंत्रित नहीं किया जाता था। हमने तय किया कि विधायकों को आमंत्रित किया जाएगा। बारासात की सांसद ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। बसीरहाट के कई विपक्षी विधायक भी यहां शामिल हुए। हमने उनमें से एक को बोलने का अवसर भी दिया।'

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दिलचस्प बात यह है कि इस घटनाक्रम को तृणमूल के भीतर से भी समर्थन मिला। पार्टी विधायक ऋतब्रत बनर्जी, जिन्होंने हाल ही में पार्टी नेतृत्व के एक वर्ग की आलोचना की थी, ने तृणमूल सांसदों और विधायकों की भागीदारी का स्वागत किया और इसे एक स्वस्थ लोकतांत्रिक प्रक्रिया बताया। उन्होंने कहा, 'यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि पिछले 15 वर्षों में इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।'

संघवाद प्रतिदिन की रिपोर्ट के अनुसार, बनर्जी और अधिकारी ने दिल्ली के बाद बंगाल विधानसभा में फिर मुलाकात की। इसके अलावा विधायक संदीपन साहा ने भी मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी। अब इन्हें लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं जारी हैं। हालांकि, बनर्जी ने किसी भी तरह की अटकलों को खारिज किया है।

(PTI भाषा इनपुट के साथ)