क्या सच में खाली हो गया तमिलनाडु का खजाना? CM विजय थलापति के आरोपों में कितना दम
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने अपने पहले ही भाषण में कहा कि पूर्ववर्ती डीएमके सरकार ने राज्य की आर्थिक स्थिति को बर्बाद कर दिया है। तमिलनाडु के ऊपर करीब 10 लाख करोड़ का कर्ज है। स्टालिन ने इस बयान पर पलटवार किया था।

Vijay Thalapathy: तमिलनाडु में ऐतिहासिक जीत हासिल करके सत्ता में आने वाले विजय थलापति पहले ही दिन से विपक्ष की आलोचनाओं का सामना कर रहे हैं। पहला विवाद तो शपथ ग्रहण समारोह में वंदे मातरम् को लेकर हुआ। दूसरा विवाद उस वक्त शुरू हुआ जब विजय ने दावा किया कि पूर्ववर्ती डीएमके सरकार ने राज्य के ऊपर 10 लाख करोड़ का भारी कर्ज छोड़ा है और सरकारी खजाने को पूरी तरह से खाली कर दिया है। विजय के इन दावों पर पूर्व सीएम स्टालिन ने तीखा जवाब दिया है।
शपथ ग्रहण के बाद विजय ने जब राज्य की आर्थिक स्थिति पर फिर से बयान दिया, तो स्टालिन ने सोशल मीडिया के जरिए पलटवार किया। उन्होंने लिखा, "तुरंत यह कहना शुरू मत कीजिए कि सरकार के पास पैसा नहीं है। पैसा है। जरूरत लोगों को वह पैसा देने की इच्छा और शासन चलाने की क्षमता की है।” बता दें, तमिलनाडु की राजनीति में नई सरकार आने के बाद राज्य की आर्थिक स्थिति को लेकर बयानबाजी नई बात नहीं है। इससे पहले सत्ता में आने वाली डीएमके सरकार ने भी अपनी पूर्ववर्ती सरकार के ऊपर राज्य का खजाना खाली करने का आरोप लगाया था। लेकिन सवाल यही है कि क्या सच में तमिलनाडु की आर्थिक हालात खराब हैं?
भारत के सभी राज्यों में सबसे ज्यादा कर्ज तमिलनाडु पर: RBI
भारतीय रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक तमिलनाडु के ऊपर भारत के सभी राज्यों के मुकाबले सबसे ज्यादा कर्ज है। वर्ष 2025 के अंत तक राज्य के ऊपर करीब 9.56 लाख करोड़ रुपए की उधारी थी। यह पिछले कई वर्षों के दौरान राज्य सरकारों द्वारा लिया गया था। चूंकि, तमिलनाडु सबसे ज्यादा तेजी के साथ बढ़ने वाला देश भी है इसकी वजह से उसकी कर्ज संभालने की और भुगतान की क्षमता भी मजबूत है।
2011 के जीडीपी वर्ष आधार पर तमिलनाडु की विकास दर करीब 10.8 फीसदी है, जबकि 2024 में यह करीब 11.2 फीसदी रही थी। ऐसे में विशेषज्ञों के मुताबिक राज्य इस कर्ज को आसानी से संभाल सकता है।
कर्ज से अलग खर्च है विजय की परेशानी
तमिलनाडु की अर्थव्यवस्था कर्ज को संभालने के लिए सक्षम नजर आती है। विशेषज्ञों के मुताबिक थलापति की सरकार की सबसे बड़ी परेशानी वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतान में होने वाला खर्च है। इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में राज्य की लगभग 62% राजस्व प्राप्तियां इन अनिवार्य खर्चों पर जाने का अनुमान था, जिससे विकास कार्यों पर खर्च के लिए कम गुंजाइश बचती है। ऐसी स्थिति में विजय ने भी हर महीने 200 यूनिट फ्री देने का वादा किया है, जो सरकारी खर्चे को और भी ज्यादा बढ़ाता है।
एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में तमिलनाडु पहले ही सब्सिडी और कल्याणकारी योजनाओं पर 72,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करने की योजना बना चुका था। यह राशि सड़क और बुनियादी ढांचा जैसी विकास परियोजनाओं के लिए निर्धारित रकम से भी अधिक थी। अनुमान के अनुसार, विजय के चुनावी घोषणापत्र में किए गए सभी कल्याणकारी वादों को पूरा करने से राज्य पर वित्तीय दबाव काफी बढ़ सकता है। प्रस्तावित योजनाओं से वार्षिक कल्याणकारी खर्च लगभग 1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।




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