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ईरान युद्ध के चलते भारत में लॉकडाउन? हरदीप पुरी ने बताया सच, पेट्रोल-डीजल पर बड़ी राहत

ईरान युद्ध और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत में लॉकडाउन लगने की अफवाहों पर केंद्रीय मंत्री ने सख्त बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है। पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाने का भी फैसला किया है। पढ़ें पूरी खबर।

Fri, 27 March 2026 10:37 AMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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ईरान युद्ध के चलते भारत में लॉकडाउन? हरदीप पुरी ने बताया सच, पेट्रोल-डीजल पर बड़ी राहत

ईरान में जारी युद्ध ने पूरी दुनिया को एक गहरे ऊर्जा संकट में धकेल दिया है। इस तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन बुरी तरह चरमरा गई है। महज एक महीने के भीतर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल से उछलकर सीधे 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गईं। इस युद्ध के कारण दक्षिण-पूर्व एशिया, अफ्रीका से लेकर यूरोप और अमेरिका तक ईंधन की भारी किल्लत और बेतहाशा महंगाई देखने को मिल रही है, जिससे वैश्विक बाजारों में दहशत का माहौल है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। ऐसे में कोरोना काल की तरह लॉकडाउन लगने जैसी अफवाहों ने जोर पकड़ लिया। हालांकि भारत सरकार ने इस पर साफ स्पष्टीकरण जारी किया है।

वैश्विक स्तर पर मचे इस हाहाकार और कच्चे तेल की सप्लाई बाधित होने की आशंकाओं के बीच, भारत में भी यह अफवाह तेजी से फैलने लगी थी कि ईंधन की खपत को नियंत्रित करने के लिए देश में लॉकडाउन लगाया जा सकता है या पेट्रोल-डीजल की राशनिंग हो सकती है। अब इन तमाम अटकलों और अफवाहों पर केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पूर्ण रूप से विराम लगा दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जारी एक अहम बयान में उन्होंने स्पष्ट किया है कि देश में लॉकडाउन लगाने का कोई भी प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन नहीं है।

केंद्रीय मंत्री ने देशवासियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि वैश्विक मोर्चे पर अस्थिरता के बावजूद भारत में तेल और गैस की सप्लाई पूरी तरह से सुरक्षित है। उन्होंने लोगों से पैनिक न करने की अपील करते हुए साफ किया कि देश में ईंधन का पर्याप्त भंडार मौजूद है, इसलिए सप्लाई बाधित होने या लॉकडाउन जैसी भ्रामक बातों में कोई सच्चाई नहीं है।

लॉकडाउन का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं

केंद्रीय मंत्री ने लिखा, 'वैश्विक स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है, और हम ऊर्जा, सप्लाई चेन और जरूरी वस्तुओं से जुड़े हालात पर लगातार नज़र बनाए हुए हैं। माननीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि देश में ईंधन, ऊर्जा और अन्य आवश्यक चीज़ों की आपूर्ति बिना किसी रुकावट के जारी रहे। हर संभावित चुनौती से निपटने के लिए हम पूरी तरह तैयार हैं। भारत ने पहले भी वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच अपनी मजबूती दिखाई है, और आगे भी हम समय पर, सक्रिय और समन्वित तरीके से कदम उठाते रहेंगे। लॉकडाउन को लेकर फैल रही अफवाहें पूरी तरह गलत हैं। मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि सरकार के स्तर पर ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। ऐसे समय में ज़रूरी है कि हम सभी शांत, ज़िम्मेदार और एकजुट रहें। इस तरह की स्थिति में अफवाह फैलाना और बेवजह डर का माहौल बनाना गैर-जिम्मेदाराना और हानिकारक है।'

अपने एक अन्य बयान में हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि कच्चे तेल की कीमतों में आई इस अप्रत्याशित वृद्धि का सीधा असर आम भारतीय की जेब पर न पड़े, इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने कड़ा और साहसिक फैसला लिया है। वैश्विक झटके का बोझ नागरिकों पर डालने के बजाय सरकार ने खुद राजस्व का नुकसान सहने का विकल्प चुना है।

पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क घटाया

इस रणनीति के तहत सरकार ने पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण कच्चे तेल की वैश्विक स्तर पर बढ़ती कीमतों से निपटने में हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) जैसी तेल विपणन कंपनियों की मदद करने के लिए पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क घटाकर तीन रुपये प्रति लीटर कर दिया है और डीजल पर इसे शून्य कर दिया गया है।

वित्त मंत्रालय द्वारा 26 मार्च को जारी एक अधिसूचना के अनुसार पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर तीन रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है जबकि डीजल पर यह शुल्क पहले के 10 रुपये से घटाकर शून्य कर दिया गया है। मंत्रालय ने कहा कि शुल्क में यह कटौती तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। भारत में ईंधन विपणन कंपनियां दबाव में हैं क्योंकि अमेरिका एवं इजराइल द्वारा ईरान पर 28 फरवरी को हमला किए जाने के बाद से अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि के बावजूद पेट्रोल और डीजल के खुदरा दाम स्थिर बने हुए हैं।

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पश्चिम एशिया संकट और हॉर्मुज जलडमरूमध्य का असर

यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया (ईरान-इजरायल-अमेरिका) संघर्ष के चलते हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ गया है। दुनिया के करीब 20% तेल का परिवहन इसी रास्ते से होता है। ईरान ने कुछ देशों के लिए रास्ता सीमित कर दिया है, लेकिन भारत को ‘मित्र देश’ मानते हुए भारतीय जहाजों को सुरक्षित निकास दिया जा रहा है। सरकार ने पहले ही 70% कच्चे तेल के आयात को हॉर्मुज से हटाकर वैकल्पिक स्रोतों (रूस, सऊदी अरब, UAE आदि) पर शिफ्ट कर लिया है। देश के पास 60 दिनों का ईंधन स्टॉक और एक महीने का एलपीजी भंडार उपलब्ध है। पेट्रोल, डीजल, केरोसिन, एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) और फ्यूल ऑयल की कोई कमी नहीं है।