खाने की थाली पर ईरान युद्ध की मार, गैस की किल्लत से रेस्टोरेंट का खाना 30% तक होगा महंगा
सप्लाई कम होने के साथ-साथ कमर्शियल सिलेंडरों की कीमतों में भी भारी उछाल आया है। 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत एक महीने पहले 1650 रुपये थी। अब यह बढ़कर 2100 से 2300 रुपये के बीच पहुंच गई है।
ईरान में जारी संघर्ष का असर भारत में रेस्टोरेंट और होटल उद्योग पर भी देखने को मिलने लगा है। भारत में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की भारी कमी हो गई है। इसका सीधा असर आपकी जेब पर पड़ने वाला है, क्योंकि रेस्टोरेंट संचालकों ने अप्रैल से खाने-पीने की चीजों के दाम 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ाने की तैयारी कर ली है। बेंगलुरु, मुंबई और दिल्ली जैसे बड़े शहरों में रेस्टोरेंट की रसोइयां ठंडी पड़ने लगी हैं।
Wow! Momo के सीईओ सागर दरयानी और Adiga’s के अरुण अडिगा जैसे उद्योग जगत के दिग्गजों का कहना है कि 9 मार्च से सप्लाई में अचानक बाधा आई है। बेंगलुरु के मशहूर रेस्टोरेंट 'अडिगास' के अनुसार, उन्हें सामान्य जरूरत का केवल 20% स्टॉक मिल रहा है। कई वितरकों ने सप्लाई पूरी तरह बंद कर दी है।
एक मध्यम आकार के दक्षिण भारतीय रेस्टोरेंट को डोसा और अन्य व्यंजनों के लिए रोजाना 6 से 10 सिलेंडरों की जरूरत होती है, जिसे वर्तमान में जुटाना नामुमकिन हो गया है। रेस्टोरेंट सुरक्षा कारणों से गैस का बड़ा स्टॉक जमा नहीं कर सकते, जिससे वे दैनिक डिलीवरी पर निर्भर हैं। सप्लाई रुकने से उनके सामने शटडाउन का खतरा मंडरा रहा है।
आसमान छूती कीमतें
सप्लाई कम होने के साथ-साथ कमर्शियल सिलेंडरों की कीमतों में भी भारी उछाल आया है। 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत एक महीने पहले 1650 रुपये थी। अब यह बढ़कर 2100 से 2300 रुपये के बीच पहुंच गई है। यदि संकट लंबा खिंचा, तो बाजार में सिलेंडरों की कालाबाजारी शुरू हो सकती है।
सरकार की प्राथमिकता- घरेलू रसोई पहले
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि ईरान में जारी संघर्ष के कारण एलपीजी की उपलब्धता सीमित है। सरकार ने रिफाइनरियों को निर्देश दिया है कि वे अतिरिक्त उत्पादन को घरेलू उपभोक्ताओं और अस्पतालों जैसे आवश्यक क्षेत्रों की ओर मोड़ें। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) ने भी अपने औद्योगिक ग्राहकों को सूचित किया है कि फिलहाल उन्हें सप्लाई देना संभव नहीं है।
क्यों पैदा हुआ यह संकट?
इस संकट की जड़ें इजरायल-ईरान-अमेरिका युद्ध में छिपी हैं। दुनिया का 20% तेल और गैस स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज जैसे संकरे समुद्री रास्ते से गुजरता है। युद्ध के कारण इस मार्ग पर आवाजाही प्रभावित होने की आशंका से वैश्विक बाजार सहमा हुआ है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिससे वह अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता के प्रति बेहद संवेदनशील है।
नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) और FHRAI ने सरकार को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। भारत के हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में लगभग 7 करोड़ लोग कार्यरत हैं। ग्लिस्को किचन्स के संस्थापक गगनदीप सिंह सपरा ने चेतावनी दी है कि क्लाउड किचन्स और रेस्टोरेंट्स बंद होने से हजारों श्रमिकों की आजीविका छिन सकती है।
आमतौर पर रेस्टोरेंट जून-जुलाई में कीमतें बढ़ाते हैं, लेकिन इस बार लागत के भारी बोझ के कारण यह वृद्धि अप्रैल में ही देखने को मिलेगी। यदि आने वाले हफ्तों में सप्लाई सामान्य नहीं हुई, तो कई छोटे रेस्टोरेंट बंद होने की कगार पर पहुंच सकते हैं।




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