LPG गैस से पेट्रोल-डीजल तक… संकट से निपटने के लिए मोदी सरकार का तगड़ा प्लान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ वरिष्ठ मंत्रियों के साथ बैठक की और उनसे यह सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करने को कहा कि भारतीय उपभोक्ताओं को पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति और कीमत पर पश्चिम एशिया संघर्ष का असर न झेलना पड़े।

ईरान की अमेरिका और इजराइल से छिड़ी जंग ने दुनियाभर में ईंधन का हाहाकार मचा दिया है। भारत मे भी इसका असर दिख रहा है। खासतौर पर भारत में एलपीजी सिलेंडर और पेट्रोल-डीजल के संकट का डर बनने लगा है। हालांकि, सरकार की ओर से बार-बार यह कहा जा रहा है कि स्थिति सामान्य है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मोर्चा संभाल लिया है। वहीं, केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी हालात से निपटने की योजना के बारे में बताया है।
क्या है योजना?
उन्होंने कहा कि भारत के ऊर्जा आयात अलग-अलग स्रोतों और मार्गों से लगातार जारी हैं। उन्होंने बताया कि सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाए हैं कि देश में ईंधन की आपूर्ति पर किसी भी तरह का असर न पड़े। पुरी ने कहा- हमने यह सुनिश्चित किया है कि घरेलू उपभोक्ताओं को सीएनजी और पीएनजी की 100% आपूर्ति मिलती रहे। वहीं अन्य उद्योगों को भी 70 से 80 प्रतिशत तक गैस सप्लाई मिलती रहेगी, भले ही क्षेत्र में युद्ध जैसी स्थिति क्यों न हो। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए गैस की कोई कमी नहीं है और घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है।
जानकारी के मुताबिक भारत अब अतिरिक्त एलएनजी कार्गो भी मध्य पूर्व से बाहर के देशों से सुरक्षित करने की दिशा में काम कर रहा है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, सप्लाई चेन को स्थिर बनाए रखने के लिए सरकार वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों और नए शिपिंग मार्गों पर भी ध्यान दे रही है।
एक्शन मोड में पीएम मोदी
इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ वरिष्ठ मंत्रियों के साथ बैठक की और उनसे यह सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करने को कहा कि भारतीय उपभोक्ताओं को पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति और कीमत पर पश्चिम एशिया संघर्ष का असर न झेलना पड़े। सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी सक्रिय रूप से यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि भारतीय उपभोक्ताओं को पेट्रोलियम उत्पादों की बढ़ती कीमतों का सीधा असर न भुगतना पड़े, क्योंकि भारत कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का आयातक है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने मंत्रियों से समन्वय से काम करने और यह सुनिश्चित करने को कहा कि पेट्रोलियम उत्पादों और एलपीजी की कोई कमी नहीं हो। प्रधानमंत्री ने विदेश मंत्री एस जयशंकर, तेल मंत्री हरदीप सिंह पुरी, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के साथ बैठक कर देश में ऊर्जा की स्थिति पर चर्चा की।
सूत्रों ने कहा कि भारत, जो अपने अधिकांश ऊर्जा उत्पाद पश्चिम एशिया से प्राप्त करता है, अब अपनी खरीद में विविधता लाने के साथ अन्य देशों से भी ऊर्जा संसाधन ले रहा है- जिसमें अमेरिका, रूस, वेनेजुएला, ऑस्ट्रेलिया तथा अन्य महासागरीय देश शामिल हैं। इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
पश्चिम एशिया संकट के बीच, भारत ने कहा है कि एलपीजी उत्पादन, सीएनजी और पाइप्ड रसोई गैस को प्राकृतिक गैस का उपयोग करने वाले अन्य सभी क्षेत्रों पर प्राथमिकता दी जाएगी, क्योंकि सरकार ने घरों और परिवहन क्षेत्रों के लिए निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के संबंध में आवंटन में फेरबदल किया है।




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