Indira Gandhi double track policy to Rajiv assassination why soft corner for Prabhakaran in Tamil Nadu politics इंदिरा गांधी की 'डबल ट्रैक' नीति से राजीव हत्याकांड तक, प्रभाकरन पर तमिलनाडु की सियासत में सॉफ्ट कॉर्नर क्यों?, India News in Hindi - Hindustan
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इंदिरा गांधी की 'डबल ट्रैक' नीति से राजीव हत्याकांड तक, प्रभाकरन पर तमिलनाडु की सियासत में सॉफ्ट कॉर्नर क्यों?

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और TVK पार्टी के प्रमुख सी जोसेफ विजय ने लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम के संस्थापक वी प्रभाकरन को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर विजय ने लिखा कि हम मुल्लीवैक्कल की यादों को अपने दिलों में संजोकर रखेंगे।

Tue, 19 May 2026 04:22 PMDevendra Kasyap लाइव हिन्दुस्तान
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इंदिरा गांधी की 'डबल ट्रैक' नीति से राजीव हत्याकांड तक, प्रभाकरन पर तमिलनाडु की सियासत में सॉफ्ट कॉर्नर क्यों?

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और TVK पार्टी के प्रमुख सी जोसेफ विजय ने लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (LTTE) के संस्थापक वी प्रभाकरन को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर विजय ने लिखा कि हम मुल्लीवैक्कल की यादों को अपने दिलों में संजोकर रखेंगे। समुद्र पार रहने वाले अपने तमिल भाई-बहनों के अधिकारों के लिए हम हमेशा उनके साथ खड़े रहेंगे। सीएम विजय के इस बयान ने तमिलनाडु की राजनीति में तीखी बहस छेड़ दी है। सवाल उठ रहा है कि राजीव गांधी हत्याकांड के मुख्य आरोपी प्रभाकरन के प्रति राज्य की प्रमुख राजनीतिक दलों में नरम रुख क्यों जारी है?

प्रभाकरन: तमिल राष्ट्रवाद का प्रतीक

LTTE के संस्थापक और सर्वोच्च नेता वेलुपिल्लई प्रभाकरन को 18 मई 2009 को श्रीलंका की सेना ने मुल्लीवैक्कल में मार गिराया था। भारत में LTTE पर प्रतिबंध है और प्रभाकरन को राजीव गांधी हत्या का मुख्य आरोपी माना जाता है, लेकिन तमिलनाडु की राजनीति में वह आज भी तमिल अस्मिता और भावनात्मक प्रतीक बना हुआ है। विभिन्न दलों के नेताओं द्वारा जारी बयानों, पोस्टरों और स्मृति सभाओं में उसका नाम बार-बार उभरता है।

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समुद्री दूरी और साझा तमिल भावना

तमिलनाडु और श्रीलंका के बीच मात्र 30-40 किलोमीटर की समुद्री दूरी है। दोनों तरफ तमिल समुदाय की साझा भाषा, संस्कृति और गहरे भावनात्मक संबंध हैं। 1980 के दशक में श्रीलंका की सिंहली बहुसंख्यक सरकार की नीतियों ने तमिल अल्पसंख्यकों पर अत्याचार बढ़ाए। 1983 के 'ब्लैक जुलाई' दंगों में हजारों तमिलों की हत्या हुई। इस दौरान LTTE को कई तमिलों ने 'तमिल ईलम' की स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ने वाली ताकत के रूप में देखा। तमिलनाडु में द्रविड़ आंदोलन की विरासत ( पेरियार, अन्नादुरै और करुणानिधि की आत्मसम्मान राजनीति ) ने इस भावना को और मजबूती प्रदान की।

1980 के दशक में खुला समर्थन

उस समय AIADMK के संस्थापक और तत्कालीन मुख्यमंत्री एमजी रामचंद्रन (MGR) ने LTTE को खुलकर समर्थन दिया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, MGR ने आर्थिक मदद, प्रशिक्षण शिविर और हथियारों की आपूर्ति में सहयोग किया। प्रभाकरन खुद तमिलनाडु आया और MGR से मिला। DMK के करुणानिधि ने भी शुरुआती दौर में समर्थन दिया। DMK नेता आरएस भारती ने दावा किया था कि करुणानिधि ने प्रभाकरन को जेल जाने से बचाया था।

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इंदिरा गांधी की 'डबल ट्रैक' नीति

1983 के ब्लैक जुलाई के बाद इंदिरा गांधी सरकार ने रणनीतिक रूप से तमिल मिलिटेंट गुटों को समर्थन दिया था। बताया जाता है कि RAW के माध्यम से LTTE समेत छह प्रमुख गुटों को हथियार, प्रशिक्षण और आर्थिक मदद पहुंचाई गई। भारत में 32 प्रशिक्षण शिविर स्थापित किए गए। सार्वजनिक रूप से गैर-हस्तक्षेप का रुख अपनाया गया, लेकिन गुप्त रूप से ऑपरेशन चलाए गए। बताया जाता है कि इसका एक मात्र उद्देश्य था कि श्रीलंका सरकार को भारत-विरोधी गठबंधन से दूर रखना और बातचीत की मेज पर लाना।

राजीव गांधी की हत्या के बाद भी ‘सॉफ्ट कॉर्नर’

1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद LTTE पर पूर्ण प्रतिबंध लगा और खुला समर्थन कम हुआ। इसके बावजूद तमिलनाडु में प्रदर्शन, पोस्टर और भावनात्मक जुड़ाव जारी रहा। MDMK के वैको प्रभाकरन के खुल्लमखुल्ला समर्थक रहे, जबकि VCK के थोल थिरुमावलवन जैसे नेता LTTE को तमिल प्रतिरोध का प्रतीक मानते हैं। 2009 के अंतिम युद्ध में हजारों तमिल नागरिकों की मौत पर तमिलनाडु में उबाल आया था। करुणानिधि ने उपवास किया, जबकि AIADMK ने DMK-कांग्रेस गठबंधन पर 'तमिल नरसंहार' का आरोप लगाया था।

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2026 का चुनाव और प्रभाकरन

2021 के विधानसभा चुनाव में कई उम्मीदवारों ने प्रभाकरन के कटआउट लगाए थे, लेकिन 2026 के विधानसभा चुनावों में श्रीलंकाई तमिल मुद्दा प्रमुख चुनावी एजेंडा नहीं रहा, लेकिन विजय ने सितंबर 2025 में नागपट्टिनम में दिए भाषण में इस मुद्दे के जरिए भावनात्मक जुड़ाव बनाने की कोशिश की थी। दूसरी ओर DMK और AIADMK शुरू से ही केंद्र सरकार (चाहे BJP हो या कांग्रेस) पर 'श्रीलंकाई तमिलों की उपेक्षा' का आरोप लगाकर अपना वोट बैंक मजबूत करने की सियासी रणनीति अपनाती रही है।