राजीव गांधी के हत्यारे प्रभाकरन का महिमामंडन कर रहे CM विजय, क्यों धर्मसंकट में पड़ी कांग्रेस?
तमिलनाडु की राजनीति में नया विरोधाभास! कांग्रेस के समर्थन से CM बने थलपति विजय ने मुल्लीवैक्कल स्मृति दिवस पर LTTE चीफ प्रभाकरन को श्रद्धांजलि दी है। जानिए क्या है टीवीके का 'तमिल राष्ट्रवाद' दांव और इस पर गांधी परिवार का ऐतिहासिक रुख।

'पिता को खोने का दुख क्या होता है, यह मैं अच्छी तरह जानती हूं... जब मैंने उन्हें खोया था, तो मैं अंदर से टूट गई थी और पूरी दुनिया से नाराज थी।' प्रियंका गांधी कई मौकों पर ये बात कह चुकी हैं। जब भी प्रियंका या राहुल गांधी अपने पिता और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या का जिक्र करते हैं, तो उनका यह दर्द छलक ही आता है। लेकिन इसी दर्द के साथ उन्होंने हमेशा यह भी साफ किया है कि उनके दिल में अपने पिता के हत्यारों के लिए कोई नफरत या क्रोध नहीं है। गांधी परिवार का यह व्यक्तिगत 'माफीनामा' और तमिलनाडु की वर्तमान राजनीति, आज एक ऐसे दिलचस्प और अजीबोगरीब चौराहे पर खड़े हैं, जहां धुर राजनीतिक विरोधाभास साफ नजर आता है।
कल यानी 18 मई की घटना ने तमिलनाडु की राजनीति में एक नया और बेहद संवेदनशील अध्याय जोड़ दिया है। जिन 'थलापति' विजय को कांग्रेस ने अपना समर्थन देकर सत्ता के शिखर पर बैठाया है, उन्हीं विजय ने मुख्यमंत्री की कुर्सी पर रहते हुए मुल्लीवैक्कल स्मरण दिवस (18 मई) के मौके पर LTTE चीफ वेलुपिल्लई प्रभाकरन को एक बार फिर सार्वजनिक रूप से श्रद्धांजलि अर्पित की है। दिलचस्प बात यह है कि इन्हीं विजय की पार्टी 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (TVK) ने पिछले साल भी LTTE (लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम) चीफ वेलुपिल्लई प्रभाकरन की सार्वजनिक तौर पर प्रशंसा की थी, जो राजीव गांधी की हत्या का मुख्य सूत्रधार था।
तमिलनाडु का ताजा राजनीतिक समीकरण: कांग्रेस और TVK का गठजोड़
मई 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजे ऐतिहासिक रहे हैं, जिसने राज्य की दशकों पुरानी द्रविड़ राजनीति को हिलाकर रख दिया है। अपनी स्थापना के महज दो साल के भीतर ही विजय की पार्टी TVK ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 100 से अधिक सीटें जीतीं और सबसे बड़े दल के रूप में उभरकर सत्ता के शिखर तक पहुंची। द्रमुक (DMK) से अलग होकर चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस के 5 विधायकों ने फ्लोर टेस्ट में विजय की सरकार को अपना समर्थन दिया। कांग्रेस नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि 'सांप्रदायिक ताकतों' को सत्ता से दूर रखने और 'पेरियार-कामराज' के आदर्शों वाली सरकार चलाने के लिए उन्होंने टीवीके (TVK) को समर्थन दिया है। हाल ही में विधानसभा में हुए फ्लोर टेस्ट में विजय की सरकार को 144 विधायकों का समर्थन मिला, जिसमें कांग्रेस, वामदलों और कुछ अन्य छोटे दलों की भूमिका बेहद अहम रही।
विरोधाभास की जड़: प्रभाकरन का महिमामंडन
राजनीतिक गलियारों में इस गठबंधन की चर्चा इसलिए तेज है क्योंकि विजय और कांग्रेस की विचारधारा के तार एक बेहद संवेदनशील इतिहास पर आपस में उलझते हैं। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने सोमवार को 'मुल्लीवईक्कल स्मृति दिवस' के अवसर पर दुनिया भर में रह रहे तमिल प्रवासियों के साथ एकजुटता व्यक्त की और उनके अधिकारों के लिए अपनी सरकार का समर्थन जारी रखने का संकल्प लिया। सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में 'तमिलगा वेत्री कषगम' (टीवीके) प्रमुख ने लिखा: "आइए हम मुल्लीवईक्कल की यादों को अपने दिलों में संजोकर रखें। हम विदेशों में रहने वाले अपने तमिल भाई-बहनों के अधिकारों के साथ हमेशा खड़े रहेंगे।"
क्या है 'मुल्लीवईक्कल स्मृति दिवस'?
दुनिया भर के श्रीलंकाई तमिलों द्वारा हर साल 18 मई को 'मुल्लीवईक्कल स्मृति दिवस' के रूप में मनाया जाता है। मुल्लीथिवु जिले के छोटे से तटीय गांव 'मुल्लीवईक्कल' में लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) प्रमुख वी प्रभाकरन की मौत के बाद 18 मई 2009 को लगभग तीन दशक पुराना श्रीलंकाई गृहयुद्ध समाप्त हुआ था। संयुक्त राष्ट्र के अनुमानों के अनुसार, युद्ध के अंतिम चरणों में 40,000 से 70,000 तमिल नागरिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी, जिसके बाद मुल्लीवईक्कल युद्धकालीन अत्याचारों और नागरिकों की पीड़ा का वैश्विक प्रतीक बन गया।
गांधी परिवार का बड़ा दिल: नलिनी को माफी और न्याय
इस राजनीतिक विरोधाभास को गहराई से समझने के लिए गांधी परिवार के उस ऐतिहासिक स्टैंड को भी देखना होगा, जो उन्होंने राजीव गांधी के हत्यारों के प्रति अपनाया है। कांग्रेस पार्टी भले ही LTTE की विचारधारा और कृत्यों का कड़ा विरोध करती हो, लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर गांधी परिवार ने हत्यारों को माफ कर एक अलग नजीर पेश की है।
नलिनी को जीवनदान: 1991 में राजीव गांधी की हत्या की दोषी नलिनी श्रीहरन की फांसी की सजा को सोनिया गांधी की विशेष अपील पर ही उम्रकैद में बदला गया था।
प्रियंका की जेल में मुलाकात: साल 2008 में प्रियंका गांधी ने वेल्लोर जेल जाकर नलिनी से गुपचुप मुलाकात की थी। प्रियंका ने बाद में कहा था कि नलिनी से मिलना उनके लिए खुद को शांत करने और उस हिंसा व व्यक्तिगत त्रासदी से पूरी तरह उबरने का एक तरीका था।
राहुल गांधी का स्पष्ट रुख: राहुल गांधी भी कई सार्वजनिक मंचों से यह कह चुके हैं, "मैंने अपने पिता को खोया है और इसका मुझे भयंकर दर्द है। लेकिन मेरे अंदर हत्यारों के प्रति कोई नफरत या गुस्सा नहीं है... मैं उन्हें माफ कर चुका हूं।"
तमिलनाडु के सीएम विजय के 'नियो-द्रविड़ियन' दांव में क्या है खास?
18 मई का दिन श्रीलंकाई गृहयुद्ध की समाप्ति और 'मुल्लीवईक्कल नरसंहार' की याद में मनाया जाता है। इसी दिन प्रभाकरन की मृत्यु हुई थी। विजय का यह कदम यह स्पष्ट करता है कि वे तमिल अस्मिता और श्रीलंकाई तमिलों के मुद्दे पर LTTE की लाइन से खुद को अलग नहीं करने वाले हैं। मुख्यमंत्री बनने के बाद भी अपने रुख पर कायम रहना यह बताता है कि टीवीके (TVK) अपनी 'कोर तमिल' राजनीति को धार दे रही है।
प्रभाकरन और 'तमिल कॉज' से विजय का पुराना नाता
विजय के राजनीतिक संदेशों में तमिल मुद्दे और लिट्टे का जिक्र नया नहीं है।
2008 की भूख हड़ताल: जब श्रीलंकाई सेना तमिल विद्रोहियों के खिलाफ आक्रामक अभियान चला रही थी, तब विजय ने चेन्नई में श्रीलंकाई तमिलों के समर्थन में भूख हड़ताल की थी। तब उन्होंने कहा था, "ईलम तमिलों के लिए आजादी का सवेरा होने दें।"
मुल्लीवैक्कल की यादें: रविवार को प्रभाकरन की पुण्यतिथि पर विजय ने मुल्लीवईक्कल का जिक्र किया, जहां 2009 में श्रीलंकाई सेना ने लिट्टे चीफ को मार गिराया था।
सितंबर 2025 का भाषण: पिछले साल नागापट्टिनम में भी विजय ने ईलम तमिलों को "गर्भनाल से जुड़ा रिश्तेदार" बताते हुए कहा था कि उनके हकों के लिए आवाज उठाना हमारा कर्तव्य है।
द्रविड़ विचारधारा और तमिल राष्ट्रवाद का संगम
तमिलनाडु में डीएमके और एआईएडीएमके के छह दशक लंबे राजनीतिक एकाधिकार को खत्म करने के पीछे विजय का सिर्फ एक स्टार होना ही नहीं, बल्कि उनकी नई वैचारिक रणनीति भी है।
मिट्टी की दो आंखें: विजय का साफ मानना है कि द्रविड़ियन राजनीति (सामाजिक न्याय और कल्याणकारी नीतियां) और तमिल राष्ट्रवाद (सांस्कृतिक गौरव) एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। उनका सबसे चर्चित बयान है- "द्रविड़ विचारधारा और तमिल राष्ट्रवाद इस मिट्टी की दो आंखें हैं।"
प्रतीकों का इस्तेमाल: टीवीके के पार्टी झंडे में लाल और पीले रंग का इस्तेमाल किया गया है, जो लिट्टे और एनटीके (NTK) के सौंदर्यशास्त्र की याद दिलाते हैं। झंडे पर मौजूद युद्धक हाथी और 'वागई' का फूल तमिल सभ्यता के ऐतिहासिक गौरव को दर्शाते हैं।
आदर्शों का नया दायरा: पारंपरिक द्रविड़ पार्टियों के उलट विजय ने अपनी पार्टी के वैचारिक नायकों का दायरा बढ़ाया है। टीवीके के मंचों पर पेरियार के साथ-साथ बीआर आंबेडकर, के. कामराज, रानी वेलु नचियार और 'दक्षिण की झांसी की रानी' कही जाने वाली अंजलि अम्मल को भी जगह दी गई है।
विजय भले ही तमिल राष्ट्रवाद और प्रभाकरण से जुड़ी स्मृतियों का इस्तेमाल कर रहे हों, लेकिन उन्होंने कट्टर अलगाववाद या 'भूमिपुत्र' वाली बयानबाजी से खुद को पूरी तरह दूर रखा है। यह सावधानी इसलिए बरती गई है ताकि अल्पसंख्यक, शहरी गैर-तमिल समुदाय और मॉडरेट वोटर उनसे छिटक न जाएं।




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