iran recalls 180 sailors from india US sinks iranian warship sri lanka coast ईरान ने भारत से बुलाए अपने 180 नौसैनिक, कोच्चि से भरेंगे उड़ान; श्रीलंका से शवों को भी लिया, India News in Hindi - Hindustan
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ईरान ने भारत से बुलाए अपने 180 नौसैनिक, कोच्चि से भरेंगे उड़ान; श्रीलंका से शवों को भी लिया

श्रीलंका के पास अमेरिकी पनडुब्बी के हमले में ईरानी युद्धपोत तबाह। अब ईरान भारत (कोच्चि) से अपने 180 नौसैनिकों और शवों को वापस बुला रहा है। ऊर्जा संकट के बीच भारत-ईरान कूटनीति और मिडिल ईस्ट युद्ध की पूरी खबर पढ़ें।

Sat, 14 March 2026 06:54 AMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, कोच्चि
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ईरान ने भारत से बुलाए अपने 180 नौसैनिक, कोच्चि से भरेंगे उड़ान; श्रीलंका से शवों को भी लिया

ईरान और अमेरिका में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच भारत ने कोच्चि में खड़े ईरानी युद्धपोत IRIS Lavan के गैर-जरूरी चालक दल के सदस्यों को स्वदेश भेजने की तैयारी कर ली है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक जहाज के अधिकांश नाविकों को तुर्की की एक एयरलाइन के विमान से अगले कुछ घंटों में रवाना किया जा सकता है, बशर्ते विमान तय कार्यक्रम के अनुसार कोच्चि हवाई अड्डे पर उतर जाए। मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र के अनुसार, ईरान ने भारत से अपने लगभग 180 नौसैनिकों को वापस ले जाने के लिए विशेष परिवहन की व्यवस्था की है।

रायटर्स ने नाम न छापने की शर्त पर एक सूत्र के हवाले से लिखा कि इनमें से अधिकांश ईरानी नौसैनिक दक्षिण भारतीय शहर 'कोच्चि' से उड़ान भरेंगे। इसके साथ ही, ईरान उन नौसैनिकों के शव भी वापस ले जा रहा है, जिनकी श्रीलंका के तट के पास अमेरिकी हमले में अपना जहाज डूबने से मौत हो गई थी। भारत के विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और भारतीय नौसेना की तरफ से व्यावसायिक घंटों के बाद इस मामले में जानकारी मांगे जाने पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

सूत्रों ने बताया कि ईरान की ओर से किए गए अनुरोध के बाद तकनीकी खराबी के चलते इस युद्धपोत को आपातकालीन रूप से भारत में रुकने की अनुमति दी गई थी। जहाज को 1 मार्च को आपातकालीन डॉकिंग की मंजूरी दी गई थी और यह 4 मार्च से कोच्चि में खड़ा है।

183 चालक दल के सदस्य थे जहाज पर

बताया जा रहा है कि जहाज पर कुल 183 चालक दल के सदस्य मौजूद थे, जिन्हें कोच्चि में भारतीय नौसेना की सुविधाओं में ठहराया गया था। अब जहाज के अधिकांश गैर-जरूरी चालक दल के सदस्यों को स्वदेश भेजा जाएगा, जबकि कुछ तकनीकी और आवश्यक कर्मी जहाज के साथ कोच्चि में ही रहेंगे। सूत्रों के अनुसार, ईरानी नाविकों को तुर्की एयरलाइन के विमान से पहले आर्मेनिया ले जाया जाएगा। वहां से वे सड़क मार्ग के जरिए ईरान पहुंचेंगे।

अमेरिकी पनडुब्बी का हमला

यह घटनाक्रम ठीक एक हफ्ते बाद सामने आया है, जब एक अमेरिकी पनडुब्बी ने श्रीलंका के तट के पास ईरानी युद्धपोत (फ्रिगेट 'आईआरआईएस देना') को डुबो दिया था। इस घटना ने मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध को और अधिक भड़का दिया है और इस तनाव को भारत के काफी करीब ला दिया है। श्रीलंकाई अधिकारियों के अनुसार, ईरानी युद्धपोत पर 130 लोग सवार थे, जिनमें से लगभग 32 को बचा लिया गया था और अस्पताल में उनका इलाज किया गया। हालांकि, दर्जनों नौसैनिक अभी भी लापता हैं।

भारत का ऊर्जा संकट और कूटनीतिक प्रयास

भारत वर्तमान में एक गंभीर ऊर्जा संकट से जूझ रहा है, जिसके कारण देश भर में रसोई गैस (कुकिंग गैस) की भारी कमी हो गई है और जनजीवन प्रभावित हो रहा है। ऐसे में भारत अपने जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए ईरान के साथ लगातार बातचीत कर रहा है।

शनिवार को भारत ने बताया था कि उसने एक ईरानी नौसैनिक जहाज को अपने बंदरगाह पर रुकने की अनुमति दी थी। यह कदम अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा ईरानी युद्धपोत को डुबोए जाने की घटना से कुछ दिन पहले ही उठाया गया था। जहाजों की सुरक्षा और ऊर्जा संकट जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा करने के लिए भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पिछले कुछ दिनों में अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अरागची से चार बार फोन पर बातचीत की है।