तेल को लेकर टेंशन में भारत? मिडिल ईस्ट में छिड़े घमासान के बीच आया बड़ा बयान
ईरान और अमेरिका के बीच यु्द्ध छिड़ा हुआ है। खाड़ी देश भी इसकी चपेट में आ चुके हैं। इन सबके बीच तेल की कीमतों को लेकर भी चिंताएं बढ़ गई हैं। केंद्रीय तेल मंत्रालय ने सोमवार को इसको लेकर बयान जारी किया।

ईरान और अमेरिका के बीच यु्द्ध छिड़ा हुआ है। खाड़ी देश भी इसकी चपेट में आ चुके हैं। इन सबके बीच तेल की कीमतों को लेकर भी चिंताएं बढ़ गई हैं। केंद्रीय तेल मंत्रालय ने सोमवार को इसको लेकर बयान जारी किया। इसमें कहा गया है कि भारत यह सुनिश्चित करेगा कि सभी अहम पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स वाजिब कीमतों पर उपलब्ध हो जाएं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा गया है कि सरकार मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक घटनाओं के कारण पैदा हो रहे हालात की निगरानी कर रही है। यह बयान कच्चे तेल, संशोधित पेट्रोलियम गैस और अन्य उत्पादों की आपूर्ति की समीक्षा के लिए कंपनी अधिकारियों के साथ बैठक के बाद आया है।
कितना तेल आयात करता है भारत
भारत अपने कच्चे तेल की जरूरत का 88 फीसदी और प्राकृतिक गैस की जरूरत का लगभग आधा हिस्सा आयात करता है। इस आपूर्ति का अधिकांश भाग ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ से होकर आता है, जिसे अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद ईरान ने बंद कर दिया है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के साथ कच्चे तेल, एलपीजी और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा की। मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा कि हम बदलती परिस्थिति पर निरंतर नजर बनाए हुए हैं। देश में प्रमुख पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता और किफायती दरों को सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक उपाय किए जाएंगे।
धमकी दे रहा है ईरान
बता दें कि ईरान फारस की खाड़ी के संकरे मुहाने, होर्मुज जलडमरूमध्य के पास आने वाले जहाजों को लगातार धमकी दे रहा है। माना जाता है कि उसने कई हमले किए हैं। ये हमले इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर की गई सैन्य कार्रवाई के चलते पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के दौरान हुए हैं। इन हमलों के चलते मध्य पूर्व में हालात काफी जटिल हो गए हैं।
एलएनजी का उत्पादन रोकेगी कतर की कंपनी
गौरतलब है कि कतर की सरकारी ऊर्जा कंपनी ‘कतर-एनर्जी’ ने सोमवार को घोषणा की कि वह पश्चिम एशिया में जारी भीषण सैन्य संघर्ष के कारण तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का उत्पादन रोकेगी। इस निर्णय से विश्व के शीर्ष आपूर्तिकर्ताओं में से एक बाजार से बाहर हो गया है। सरकारी स्वामित्व वाली इस कंपनी ने इस कठोर निर्णय के लिए क्षेत्र में व्याप्त युद्ध की स्थिति को उत्तरदायी ठहराया है।
कंपनी ने उत्पादन पुनः आरंभ करने के संबंध में किसी निश्चित समयसीमा का उल्लेख नहीं किया है। सैन्य संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में पहले ही भारी उछाल देखा जा रहा है।




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