ईरान से युद्ध में अमेरिका के सामने सबसे बड़ी चुनौती, जवाबी हमले रोकने में नाकामी न पड़ जाए भारी
Iran America War: अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध लगातार जारी है। ईरान ने इजरायल और खाड़ी देशों पर भी हमले किए हैं। अमेरिका, इजरायल और अन्य खाड़ी देशों के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी कि वह कितने समय तक ईरान के हमले को झेल सकते हैं।

Iran America War: अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध लगातार जारी है। ईरान ने इजरायल और खाड़ी देशों पर भी हमले किए हैं। अमेरिका, इजरायल और अन्य खाड़ी देशों के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी कि वह कितने समय तक ईरान के हमले को झेल सकते हैं। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि उनके पास कितने मिसाइल इंटरसेप्टर हैं। माना जा रहा है कि पिछले साल इस्लामिक रिपब्लिक के साथ संघर्ष के बाद इन देशों के पास मिसाइल इंटरसेप्टर की संख्या बहुत कम हो चुकी है। गौरतलब है कि ईरान हमलों के लिए लंबी दूरी वाली बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और ड्रोन्स का इस्तेमाल कर रहा है। यह सब उसने जून 2025 में इजरायली हमले के बाद लांच किया था।
जवाबी हमलों ने बढ़ाई मुश्किल
इस बार ईरान ने अमेरिका और इजरायल के हमलों के तत्काल बाद जवाबी हमले शुरू कर दिए। ईरान के निशाने पर इजरायल के साथ-साथ कतर, यूएई, सऊदी अरब, कुवैत और बहरीन भी शामिल हैं। ईरान ने इन देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागी हैं। ईरान के हथियारों से बचने के लिए बड़ी संख्या में इंटरसेप्टर्स की जरूरत होगी। सामान्य सैन्य सिद्धांत यह कहता है कि प्रत्येक हमले पर उसे खत्म करने के लिए दो या तीन इंटरसेप्टर फायर किए जाएं। एक जानकार का दावा है कि अगर ईरानी इसी रफ्तार के साथ हमले करता रहा तो मिसाइल इंटरसेप्टर के स्टॉक कुछ ही दिनों में कम पड़ सकते हैं। स्टिमसन सेंटर के केली ग्रिको ने कहाकि मिसाइल इंटरसेप्टर एक बड़ी चिंता हैं। खासतौर पर एंटी-बैलिस्टिक इंटरसेप्टर। जितनी तेजी से इनका इस्तेमाल हो रहा है, उतनी तेजी से इन्हें बनाया नहीं जा सकता।
ईरान लगातार कर रहा हमले
बता दें कि शनिवार को दर्जनों या उससे अधिक ईरानी मिसाइलों को रोक दिया गया। लेकिन कुछ मिसाइलें लक्ष्य तक पहुंचने में कामयाब रहीं। उधर ईरान लगातार हमले कर रहा है। इनके लिए पर्याप्त इंटरसेप्टर नहीं हैं और ऐसे में बड़ी संख्या में हमले करके ईरान बढ़त बना सकता है। सेंट्रल फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के अनुसार, अमेरिका ने पिछले जून में ईरान के खिलाफ 12-दिन के युद्ध के दौरान इजरायल को बचाने के लिए करीब 150 थाड इंटरसेप्टर दागे। ये हथियार अमेरिकी सूची में सबसे उच्चस्तरीय जमीनी मिसाइल रक्षा प्रणाली हैं। इसमें हर लॉकहीड मार्टिन कॉर्पोरेशन का इंटरसेप्टर करीब 15 मिलियन डॉलर का है। लेकिन पिछले साल केवल कुछ दर्जन ही खरीदे गए थे।

काफी ज्यादा है लागत
ऐसे हथियार इस तरह से डिजाइन किए गए हैं कि वे धरती के वायुमंडल के बाहर बैलिस्टिक मिसाइलों को नष्ट कर सकते हैं। लेकिन इंटरसेप्टर्स फायर करने की लागत बहुत अधिक है। अप्रैल 2024 में, इजरायल के साथ अमेरिकी, ब्रिटिश, फ्रेंच और जॉर्डनियन एयर फोर्सेस ईरान से मिसाइल और ड्रोन हमलों को नाकाम करने में लगी थीं। तब करीब 1.1 अरब डॉलर की लागत आई। जबकि यह कुछ घंटे तक ही चला था।
क्या करेंगी अमेरिकी और इजरायली सेनाएं
अमेरिका और इजरायली सेनाएं यह कोशिश करेंगी कि ईरान के पास उपलब्ध मिसाइलों और लांचरों की संख्या कम की जाए। साथ ही उनके इस्तेमाल को रोकने के लिए शीर्ष कमांडरों को मारने की भी योजना रहेगी। पूर्व नौसेना कमांडर इयाल पिन्को तेल अवीव के बाहर बार इलान विश्वविद्यालय में शोध करते हैं। उन्होंने कहाकि कौन सा पक्ष दूसरों से अधिक समय तक टिक पाएगा, यह एक गंभीर सवाल है। उन्होंने जेरूसलम प्रेस क्लब की ब्रीफिंग में कहाकि अभी और भी कई हमले होने वाले हैं। ईरान के पास हजारों मिसाइलें और ड्रोन हैं, विशाल भंडार है। वे सत्ता बनाए रखने के लिए सब कुछ करेंगे।
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