भारत की जमीन से ईरान पर बमबारी करेगा अमेरिका? दावे पर सरकार का जवाब भी जान लीजिए
विदेश मंत्रालय (MEA) ने उस वायरल दावे को 'Fake News' बताया है जिसमें कहा गया था कि अमेरिका पश्चिमी भारत से ईरान पर बमबारी करेगा। जानें इस भ्रामक खबर और LEMOA समझौते का पूरा सच।

ईरान और अमेरिका-इजरायल में चल रहे युद्ध के बीच सोशल मीडिया पर भ्रामक और फर्जी खबरों का बाजार भी गर्म हो गया है। इसी कड़ी में एक दावा तेजी से वायरल हो रहा था जिसमें कहा गया कि अमेरिका ने ईरान पर हमला करने के लिए भारत से अपनी जमीन और सैन्य सुविधाओं के इस्तेमाल की अनुमति मांगी है। अब भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) की आधिकारिक फैक्ट-चेक विंग ने इस दावे का फैक्ट चेक किया है। जानिए क्या बोला विदेश मंत्रालय?
क्या था वायरल दावा?
MEA की फैक्ट-चेक विंग ने माइक्रोब्लॉगिंग साइट 'X' पर 'सुजान दत्ता' नामक एक यूजर के ट्वीट का स्क्रीनशॉट शेयर किया है। 20 मार्च की तारीख वाले इस कथित ट्वीट में लिखा था, 'ब्रेकिंग न्यूज: अमेरिका ने पश्चिमी भारत से ईरान पर बमबारी करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली एक सैन्य संपत्ति को सपोर्ट करने के लिए भारत से अनुमति मांगी है। नौकरशाही के शब्दों में, इसका मतलब LEMOA का इस्तेमाल करना है।' यह दावा सामने आते ही सोशल मीडिया पर हड़कंप मच गया और कई लोग इस संवेदनशील समय में भारत की तटस्थता और कूटनीतिक स्थिति पर सवाल उठाने लगे।
विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
इस भ्रामक दावे के वायरल होने के तुरंत बाद, भारतीय विदेश मंत्रालय के आधिकारिक एक्स हैंडल '@MEAFactCheck' ने मामले का संज्ञान लिया। मंत्रालय ने वायरल ट्वीट के स्क्रीनशॉट पर बड़ा सा लाल रंग का 'FAKE' स्टैंप लगाते हुए लोगों को सचेत किया। MEA ने अपने आधिकारिक पोस्ट में स्पष्ट किया, 'फेक न्यूज अलर्ट! कृपया सोशल मीडिया पर ऐसे झूठे और निराधार दावों तथा पोस्ट के प्रति सतर्क रहें।' इस स्पष्टीकरण ने साफ कर दिया है कि अमेरिका द्वारा ऐसा कोई अनुरोध नहीं किया गया है और न ही भारत अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी अन्य देश पर हमले के लिए होने देगा।
LEMOA को लेकर फैलाया गया भ्रम
इस फर्जी खबर में 'LEMOA' (लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट) का जिक्र कर इसे प्रामाणिक बनाने की कोशिश की गई थी। आपको बता दें कि LEMOA भारत और अमेरिका के बीच 2016 में हुआ एक रसद-विनिमय समझौता है। इसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं को एक-दूसरे के खास सैन्य ठिकानों पर ईंधन भरने, पोर्ट कॉल और मरम्मत जैसी रसद यानी लॉजिस्टिक सुविधाएं प्रदान करना है। इस समझौते का मतलब किसी भी देश को युद्ध के लिए सैन्य अड्डा स्थापित करने या वहां से आक्रामक हमले करने की अनुमति देना कतई नहीं है।
युद्ध और पुराने फैक्ट चेक
यह पहली बार नहीं है जब अंतरराष्ट्रीय तनाव के समय भारत को लेकर इस तरह की फर्जी खबरें फैलाई गई हों। ईरान युद्ध के बाद से ही भारत सरकार के तमाम मंत्रालय एक्टिव मोड में हैं और तमाम फैक्ट चेक किए जा रहे हैं। हाल ही में ईरान युद्ध के बीच भारत ने उन दावों को नकार दिया था जिनमें कहा गया था कि ईरान के खिलाफ हमले में अमेरिका भारतीय बंदरगाहों का इस्तेमाल कर रहा है। यह प्रतिक्रिया एक पूर्व अमेरिकी कर्नल के उस दावे के बाद आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिकी नौसेना मौजूदा संघर्ष में भारतीय बंदरगाहों का सहारा ले रही है।
इससे पहले रूस-यूक्रेन संघर्ष और मध्य-पूर्व के अन्य संकटों के दौरान भी सोशल मीडिया पर भारत के रुख, हथियारों की आपूर्ति और सैन्य गतिविधियों को लेकर कई गलत दावे पेश किए जा चुके हैं, जिनका MEA फैक्ट चेक विंग समय-समय पर पर्दाफाश करता रहा है। मौजूदा हालात में भी भारत सरकार कूटनीति, संवाद और शांतिपूर्ण समाधान के अपने सैद्धांतिक रुख पर कायम है। अधिकारियों ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय खबर पर विश्वास करने या उसे आगे बढ़ाने से पहले आधिकारिक सरकारी माध्यमों से उसकी पुष्टि जरूर कर लें।




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